कर्नाटक में बच्चों के खिलाफ अपराधों में भारी वृद्धि एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है। POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) से जुड़े मामलों में खतरनाक बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे राज्य सरकार और प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं।
2024-2025 के चौंकाने वाले आंकड़े:
🔹 साल 2025 के पहले दो महीनों में हर दिन औसतन 10 POCSO केस दर्ज हुए।
🔹 2024 में 8,233 मामले, जो 2023 से 7% अधिक हैं।
🔹 4,003 POCSO केस, जो 2021 की तुलना में 38.89% ज्यादा हैं।
🔹 2021 से 2024 तक कुल 13,990 मामलों में से सिर्फ 353 में सजा— यानी सजा दर बेहद कम।
🔹 26% से ज्यादा आरोपितों को बरी कर दिया गया।
अन्य चौंकाने वाले अपराध:
🔹 बाल श्रम के 105 मामले।
🔹 बाल विवाह के 152 मामले।
🔹 किशोर न्याय उल्लंघन के 142 मामले।
🔹 2024 में 3,766 बच्चों का अपहरण।
मुख्य कारण:
🔹 पुलिस की लापरवाही और गलत जांच— दोषियों को सजा मिलने की दर बेहद कम।
🔹 मनोवैज्ञानिक सहायता की कमी— पीड़ित बच्चों के पुनर्वास पर ध्यान नहीं।
🔹 सरकारी तंत्र का निष्क्रिय रवैया— प्रशासन अपराधों को रोकने में विफल।
विशेषज्ञों की राय:
बाल अधिकार कार्यकर्ता वसुदेव शर्मा का कहना है कि अगर जांच सही तरीके से हो और दोषियों को कड़ी सजा मिले, तो इस तरह के अपराधों में कमी आ सकती है।
कर्नाटक सरकार पर इन अपराधों पर कड़ी कार्रवाई करने और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ रहा है।