कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के मुस्लिम आरक्षण पर दिए गए बयान को लेकर राज्यसभा में जो हंगामा हुआ, वह एक बड़े राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दे को उजागर करता है।
मुद्दे की जड़:
डीके शिवकुमार ने कहा था कि यदि जरूरत पड़ी तो वे संविधान में बदलाव करके मुस्लिम आरक्षण को लागू करेंगे। इस पर केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने इसे संविधान विरोधी और बाबा साहब अंबेडकर की मूल भावना के खिलाफ बताया।
बीजेपी का पक्ष:
- बीजेपी का कहना है कि संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की इजाजत नहीं देता।
- कांग्रेस मुस्लिम लीग की नीति को आगे बढ़ा रही है, जिसे अंबेडकर ने खारिज कर दिया था।
- जेपी नड्डा ने कांग्रेस से जवाब मांगा और कहा कि विपक्ष को इस पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
कांग्रेस का बचाव:
- कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि संविधान को कोई बदल नहीं सकता और उनकी पार्टी ने संविधान बचाने के लिए भारत जोड़ो यात्रा निकाली थी।
- उन्होंने बीजेपी पर संविधान की रक्षा का झूठा प्रचार करने का आरोप लगाया।
राजनीतिक असर:
यह विवाद सिर्फ राज्यसभा तक सीमित नहीं रहेगा। कर्नाटक में हाल ही में हुए चुनावों में मुस्लिम आरक्षण एक बड़ा मुद्दा था, और अब यह 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए भी एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है।
- बीजेपी इसे ‘तुष्टिकरण’ की राजनीति बता रही है।
- कांग्रेस इसे सामाजिक न्याय का मुद्दा कह सकती है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि बीजेपी इस विवाद को कितनी आक्रामकता से आगे ले जाती है और कांग्रेस इसे कैसे बैलेंस करती है। क्या आपको इस मुद्दे पर और गहराई से जानकारी चाहिए?