राजस्थान के पाली में एक फ्रॉड का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ हिंदुओं के गाँव में मुस्लिमों के नाम से फर्जी अकाउंट बनाकर ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ से 7 करोड़ रुपए ले लिए गए। इन गाँवों में एक भी मुस्लिम नहीं हैं। जिन खातों में ये ट्रांसफर किए गए, वे पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों के नाम पर बनाए गए हैं। पाली में ऐसे लगभग 29 हजार फर्जी खाते मिले हैं।
जाँच में पाली जिले के देसूरी में 20 हजार, रानी में 9,004 और मारवाड़ जंक्शन में 62 फर्जी खाते मिले। इस मामले में अब मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। हैरानी की बात है कि ये फर्जीवाड़ा साल 2020 में हुआ, लेकिन अधिकारियों ने यह बात सामने नहीं आने दी। इस मामले में उन्होंने FIR भी नहीं दर्ज करवाई थी। हालाँकि, अधिकारियों ने फर्जी खातों को ब्लॉक करके उसमें राशि जाने पर रोक लगा दी थी।
साल 2019 से अगस्त 2020 के बीच फर्जी किसानों के नाम से CSC और ईमित्र के माध्यम से पीएम सम्मान निधि के लिए आवेदन किया गया। आवेदन का पटवारी ने सत्यापन किया और उसे तहसीलदार को भेज दिया। तहसीलदार ने भी जाँच करके आवेदन पत्रों को कलेक्टर भेज दिया। इस तरह ये सूची केंद्र सरकार के पास पहुँच गई।
इसके बाद केंद्र सरकार ने इन खातों में किसान निधि के पैसे भेजने शुरू कर दिए। अब आशंका जताई जा रही है कि सरकारी आईडी को हैक करके इन आवेदनों को स्वीकृत कर लिया गया था। हालाँकि, इस मामले की फिलहाल जाँच चल रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि इन आवेदनों को एक ही सरकारी आईडी को हैक करके स्वीकृत किया गया था या अलग-अलग आईडी से।
दरअसल, साल 2020 में अधिकारियों ने पाया कि देसूरी में पीएम किसान सम्मान निधि के लिए आवेदनों की भारी संख्या में आवेदन किए गए। इसके कारण लंबित आवेदनों की संख्या में भारी वृद्धि हो गई। उस साल 5 नवंबर को 265 लंबित आवेदनों की संख्या 21 दिसंबर तक अचानक 19,331 तक पहुँच गई। अधिकारियों ने जाँच किया तो पता चला कि ये खाते फर्जी हैं।
जाँच में पता चला कि ये खाते पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों के नाम पर बनाए गए हैं। इनमें से 95 प्रतिशत खाते मुस्लिमों के नाम से थे। जाँच में पता चला कि देसूरी गाँव में एक भी मुस्लिम नहीं हैं। इस तरह राजस्थान के बाहर के 4,793 बैंक अकाउंट में किसान सम्मान निधि का 1 करोड़ 51 लाख 24 हजार रुपए ट्रांसफर भी हो चुके थे। इसके बाद इन खातों को फ्रीज कर दिया गया।
यही हाल रानी ब्लॉक के वरकाणा गाँव का भी है। इस गाँव में भी एक भी मुस्लिम नहीं हैं। यहाँ मुस्लिमों के नाम से 9,004 फर्जी खाते खोल लिए गए। इन सबका पंजीकरण एक ही दिन किया गया था। आश्चर्य की बात ये है कि ये सभी खाते रानी स्थित बैंक की एक शाखा में खोले गए। मुस्लिमों के नाम पर बने इन खातों में किसान सम्मान निधि की 3 किस्त भी जा चुकी थी।
जाँच के दौरान पता चला कि ये सभी खाते पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों के नाम पर खुले हैं। इनमें 90 प्रतिशत नाम मुस्लिम हैं। इन सभी का पंजीकरण एक ही समय पर किया गया था और इन सभी आवेदनों को सरकारी पोर्टल पर अलग-अलग तारीख को एक ही समय में स्वीकृत भी किया गया था। वहीं, राज्य के मारवाड़ जंक्शन में फिलहाल 62 फर्जी खाते मिले हैं।
अधिकारियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश और बिहार में कई ऐसे गिरोह सक्रिय हैं, जो फर्जी आईडी बनाकर किसान सम्मान निधि के पैसे ले रहे हैं। बिना किसी ओटीपी के पोर्टल पर इन फर्जी आवेदनों को स्वीकृत कर लिया गया, जबकि उस गाँव के जो असली किसान हैं उनके आवेदन को खारिज कर दिया गया। इस तरह कुल 32 हजार फर्जी आवेदन दिए गए थे।
छत्तीसगढ़ में भी मुस्लिमों के नाम पर फर्जी किसान
राजस्थान में सामने आया मामला किसी बड़े गिरोह का काम लगता है, क्योंकि ऐसा ही मामला मार्च 2024 में छत्तीसगढ़ में भी सामने आया था। बेमेतरा जिले के एक गाँव में 856 फर्जी किसानों के खातों में किसान सम्मान निधि का पैसा डालने का आरोप लगा था। इनमें से 198 किसानों के खातों तो पश्चिम बंगाल में थे। मामला सामने आने के बाद जिले के कलेक्टर ने जाँच के आदेश दिए थे।
दरअसल, जिले के बेरला ब्लॉक के बरगाँव में 656 मुस्लिमों के नाम पर खुले खातों में इस योजना के पैसे जा रहे थे। जाँच में पता चला कि इस गाँव में सिर्फ 19 मुस्लिम किसान ही हैं। ये सभी गाँव में रहते भी नहीं थे। इस पूरे मामले में लगभग 3 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया था। ये वो मामले हैं, जो अब तक सामने आए हैं।