रांची की ‘ब्लाइंड बस्ती’: आंखों से नहीं, आहट और स्पर्श से दुनिया पहचानते हैं लोग; रोजगार और पुनर्वास की आस
रांची के खादगढ़ा बस स्टैंड के पास एक ऐसी बस्ती बसी है, जहां रहने वाले लोगों के लिए सूरज का उगना और ढलना कोई दृश्य अनुभव नहीं है। यहां सुबह और रात की पहचान हवा की बदलती छुअन, वाहनों के शोर, आसपास क?...