राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत की शिवाजी महाराज को आधुनिक युग का आदर्श बताने वाली यह टिप्पणी ऐतिहासिक संदर्भ और समकालीन राष्ट्रवाद से जुड़ी है।
मोहन भागवत के भाषण के प्रमुख बिंदु:
- शिवाजी महाराज ने पराजय के युग को बदला
- भागवत ने कहा कि भारत में विदेशी आक्रमणों का सिलसिला सिकंदर से शुरू हुआ और बाद में इस्लाम के नाम पर आक्रांताओं ने आक्रमण किए।
- उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज ने पहली बार इस पराजय के सिलसिले को तोड़ा और समाधान पेश किया।
- विजयनगर साम्राज्य और राजस्थान के राजाओं के पास भी इस समस्या का समाधान नहीं था, लेकिन मराठा साम्राज्य ने इसे समाप्त किया।
- शिवाजी महाराज राष्ट्र प्रेरणा के प्रतीक
- आरएसएस व्यक्ति-आधारित संगठन नहीं है, लेकिन शिवाजी महाराज राष्ट्र के लिए हमेशा प्रेरणा रहे हैं।
- उन्होंने कहा कि हनुमान पौराणिक युग के आदर्श हैं, जबकि शिवाजी महाराज आधुनिक युग के आदर्श हैं।
- शिवाजी की रणनीति, नेतृत्व और राष्ट्र-निर्माण का मॉडल आज भी प्रासंगिक है।
- शिवाजी महाराज की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है
- उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि दक्षिण भारत के अभिनेता शिवाजी गणेशन ने शिवाजी पर बनी फिल्म में काम किया, जिससे उनका नाम गणेशन से बदलकर ‘शिवाजी गणेशन’ हो गया।
- यह दर्शाता है कि शिवाजी महाराज का प्रभाव न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे भारत पर रहा है।
शिवाजी महाराज और आधुनिक भारत:
🔹 राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य रणनीति:
- शिवाजी महाराज ने छापामार युद्ध (गुरिल्ला वारफेयर) की नई रणनीति अपनाई, जिसे भारतीय सेना भी आधुनिक रूप में अपनाती है।
- उन्होंने स्वराज्य और हिंदवी राज्य की संकल्पना प्रस्तुत की, जो आत्मनिर्भर भारत की सोच से मेल खाती है।
🔹 धर्म और समावेशी शासन:
- शिवाजी ने धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया। उन्होंने सभी धर्मों के प्रति सम्मानजनक दृष्टिकोण रखा, जिसे आज ‘सर्वधर्म समभाव’ की संकल्पना से जोड़ा जा सकता है।
🔹 प्रशासनिक सुधार और सुशासन:
- उन्होंने कर-व्यवस्था, नौसैनिक शक्ति और किलेबंदी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार किए।
- आज भी उनकी प्रशासनिक नीतियों को भारतीय प्रशासनिक सेवाओं के अध्ययन में शामिल किया जाता है।
मोहन भागवत की यह टिप्पणी शिवाजी महाराज के ऐतिहासिक योगदान और उनकी वर्तमान प्रासंगिकता को रेखांकित करती है। राष्ट्रवाद, सुशासन और सैन्य रणनीति के क्षेत्र में उनकी भूमिका आज भी प्रेरणादायी है। शिवाजी महाराज केवल इतिहास का हिस्सा नहीं बल्कि आधुनिक भारत के लिए भी एक प्रेरणास्रोत हैं।