यह मामला भारत में ऐतिहासिक और धार्मिक संवेदनशीलता से जुड़ा हुआ है, जिसमें मुगल शासक औरंगजेब की विरासत पर बहस छिड़ गई है। विवाद की शुरुआत महाराष्ट्र से हुई थी, जब समाजवादी पार्टी के नेता अबू आज़मी ने औरंगजेब की तारीफ की, जिससे हिंदुत्ववादी संगठनों और बीजेपी नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया आई। इसके बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने औरंगजेब की कब्र हटाने की बात कही, लेकिन कानून के दायरे में रहते हुए।
कैसे बढ़ा विवाद?
- अबू आजमी का बयान: समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने औरंगजेब को अच्छा शासक बताया था, जिससे हिंदू संगठनों और बीजेपी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
- महाराष्ट्र में विवाद: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और बीजेपी सांसद उदयनराजे भोसले ने औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग की।
- नागपुर में हिंसा: इस मुद्दे को लेकर नागपुर में हिंदू संगठनों और मुस्लिम समुदाय के बीच झड़प हुई।
- उत्तर प्रदेश में प्रदर्शन:
- मुजफ्फरनगर में शिवसेना का प्रदर्शन: शिवसेना कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और औरंगजेब मुर्दाबाद के नारे लगाए।
- शिवसेना जिलाध्यक्ष की घोषणा: बिट्टू सिखेड़ा ने ऐलान किया कि जो कोई औरंगजेब की कब्र तोड़ेगा, उसे 5 बीघा जमीन और 11 लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा।
- रासुका लगाने की मांग: शिवसेना ने मांग की कि औरंगजेब का समर्थन करने वालों की भारतीय नागरिकता समाप्त कर उन्हें पाकिस्तान या बांग्लादेश भेजा जाए।
औरंगजेब की कब्र का ऐतिहासिक महत्व
औरंगजेब की कब्र महाराष्ट्र के औरंगाबाद (अब छत्रपति संभाजीनगर) में स्थित है और यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में है।
सरकार का रुख
महाराष्ट्र सरकार इस मामले को कानून के दायरे में हल करने की बात कह रही है, जबकि हिंदू संगठनों का कहना है कि मुगल शासकों की विरासत को मिटाना जरूरी है।
संभावित परिणाम
- इस विवाद से महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में राजनीतिक और सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है।
- शिवसेना और हिंदू संगठनों का आक्रामक रवैया बीजेपी की हिंदुत्व राजनीति को और धार दे सकता है।
- मुस्लिम संगठनों की प्रतिक्रिया और संभावित विरोध-प्रदर्शन से हालात बिगड़ सकते हैं।
- ASI और केंद्र सरकार के रुख पर भी नजर रहेगी कि क्या वे औरंगजेब की कब्र को हटाने का कोई निर्णय लेते हैं या नहीं।