यह घटना उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण और अंतरधार्मिक विवाह को लेकर बढ़ती सामाजिक और राजनीतिक चर्चाओं का एक नया उदाहरण है। बस्ती और बरेली में मुस्लिम युवतियों द्वारा हिंदू धर्म अपनाकर विवाह करने की ये घटनाएँ ‘घर वापसी’ अभियानों और धर्म परिवर्तन से जुड़े कानूनी और सामाजिक पहलुओं पर ध्यान आकर्षित कर रही हैं।
मुख्य बिंदु:
- बस्ती जिले की घटना:
- सलाया खातून ने दीपक नामक युवक से विवाह कर ‘शैलजा’ नाम अपनाया।
- जेबा खातून ने भी हिंदू धर्म अपनाकर ‘श्रेया’ नाम रखा।
- दोनों का विवाह शिव मंदिर, अमहट में संपन्न हुआ।
- विश्व हिंदू महासंघ के जिला अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने घर वापसी करवाई और धर्मांतरण की प्रक्रिया पूरी कराई।
- बड़ी संख्या में स्थानीय लोग इस आयोजन में उपस्थित रहे।
- बरेली की घटना:
- कुलसुम नाम की युवती ने अगस्त्य मुनि आश्रम में सनातन धर्म अपनाया।
- उसने राजेश नामक युवक से विवाह किया और अपना नाम ‘ममता’ रखा।
- युवती ने अपने परिजनों से जान का खतरा बताया।
- आश्रम के महंत केके शंखधार ने पुष्टि की कि युवती बालिग है और उसने स्वेच्छा से हिंदू धर्म अपनाने का निर्णय लिया।
संवैधानिक और कानूनी पहलू:
- उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण कानून (उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021) के तहत यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म बदलता है, तो उसे जिला मजिस्ट्रेट को सूचित करना आवश्यक होता है।
- जबरन या धोखाधड़ी से कराए गए धर्म परिवर्तन पर कठोर सजा का प्रावधान है।
- यदि इन युवतियों ने स्वेच्छा से धर्म बदला है, तो कानूनी तौर पर यह वैध है, लेकिन किसी भी प्रकार के दबाव या लालच की जांच की जा सकती है।
सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव:
- हिंदू संगठनों द्वारा इसे ‘घर वापसी’ अभियान के रूप में प्रचारित किया जा सकता है।
- मुस्लिम समुदाय में नाराजगी या विरोध देखने को मिल सकता है, खासकर अगर इसे धार्मिक ध्रुवीकरण के रूप में देखा जाए।
- स्थानीय प्रशासन और कानून-व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है, खासकर यदि इस तरह की घटनाओं की संख्या बढ़ती है।
इस घटना का राजनीतिक और सामाजिक असर आने वाले दिनों में और गहरा हो सकता है, खासकर उत्तर प्रदेश में 2024 लोकसभा चुनावों के बाद की राजनीति में।