महाकुंभ 2025 के दौरान त्रिवेणी संगम में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। लेकिन जो इस भव्य आयोजन में शरीक नहीं हो सके, उनके लिए योगी सरकार ने एक अनोखी पहल की – त्रिवेणी के पावन जल को ‘महा प्रसाद’ के रूप में घर-घर पहुंचाना। अब यही पवित्र जल विदेशों में बसे श्रद्धालुओं तक भी पहुंचने लगा है।
जर्मनी पहुंची पहली खेप: विदेशों से आई मांग
प्रयागराज के एनआरएलएम उपायुक्त राजीव कुमार सिंह ने जानकारी दी कि जिले के जसरा की “नारी शक्ति महिला प्रेरणा समिति” द्वारा इस गंगा जल की पैकेजिंग की जा रही है। इसी क्रम में हाल ही में कांच की 1000 बोतलों में भरा त्रिवेणी का गंगा जल जर्मनी भेजा गया है।
यह पवित्र जल श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि के माध्यम से उन जर्मन श्रद्धालुओं तक पहुंचाया गया है जो किसी कारणवश महाकुंभ में भाग नहीं ले सके।
महिलाओं की आत्मनिर्भरता का प्रतीक: 50,000+ बोतलों की पैकेजिंग
महाकुंभ के आयोजन के समय ही त्रिवेणी संगम जल की पैकेजिंग का कार्य महिला स्वयं सहायता समूहों को सौंपा गया था। जसरा की समिति की प्रभारी नमिता सिंह बताती हैं कि अब तक 50,000 से अधिक बोतलों में गंगा जल की आपूर्ति की जा चुकी है।
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नागपुर के ‘शिव शंभू ग्रुप’ को भेजा गया: 50,000 बोतल
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अंतरराष्ट्रीय पैकेज (जर्मनी): 250 एमएल की कांच की बोतल
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राष्ट्रीय पैकेज (भारत के भीतर): 500 एमएल की बोतल
उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में अग्निशमन विभाग (Fire Department) के माध्यम से त्रिवेणी जल पहुंचाया गया। इसका उद्देश्य उन श्रद्धालुओं तक इस पवित्र जल को पहुंचाना था, जो किसी कारणवश प्रयागराज नहीं आ सके।
असम से टैंकर में जल लेने पहुंचे संत राजा रामदास
इस पवित्र जल की मांग सिर्फ बोतलों तक सीमित नहीं रही। हाल ही में गुवाहाटी, असम से “परम शिवम शिव मंदिर योगाश्रम” के संत राजा रामदास खुद टैंकर लेकर त्रिवेणी संगम पहुंचे और अग्निशमन विभाग की सहायता से जल भरवाकर असम रवाना हुए।
सीएफओ प्रमोद शर्मा ने बताया कि विभाग ने इस विशेष धार्मिक उद्देश्य में पूर्ण सहयोग प्रदान किया।
मुख्य संदेश:
“महाकुंभ अब केवल प्रयागराज तक सीमित नहीं, यह वैश्विक श्रद्धा का केंद्र बन गया है। पवित्र त्रिवेणी जल की विदेशों में भी मांग इस बात का प्रतीक है कि भारत की संस्कृति, आस्था और परंपरा की जड़ें अब वैश्विक धरती पर भी गहराई से स्थापित हो रही हैं।”
महाकुंभ का यह रूप — आस्था, सेवा, महिला सशक्तिकरण और वैश्विक भारतीयता — सभी को प्रेरित करने वाला है। यूपी सरकार की यह पहल न केवल श्रद्धालुओं की भावना का सम्मान है, बल्कि लोक सहभागिता से संचालित सफल प्रशासनिक मॉडल का उदाहरण भी है।