अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद सख्त और विवादित बयान दिया है। व्हाइट हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान को “एक ही रात में खत्म किया जा सकता है” और यह कार्रवाई मंगलवार (07 अप्रैल 2026) की रात भी हो सकती है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच सीजफायर को लेकर बातचीत चल रही है, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
ईरान से एयरमैन रेस्क्यू ऑपरेशन का खुलासा
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में फंसे अमेरिकी एयरमैन को बचाने के लिए चलाए गए एक बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी भी दी।
उन्होंने बताया कि इस मिशन में कुल 155 विमान और करीब 200 सैनिकों को तैनात किया गया था। इस ऑपरेशन में:
- 4 बमवर्षक विमान
- 64 लड़ाकू जेट
- 48 एयर टैंकर (ईंधन भरने वाले विमान)
- 13 रेस्क्यू विमान
शामिल थे। ट्रंप ने इसे “ऐतिहासिक मिशन” बताते हुए कहा कि इसमें तकनीकी कौशल, रणनीति और किस्मत—तीनों का योगदान रहा।
#WATCH | Washington, DC: US President Donald Trump says, "The entire country could be taken out in one night, and that night might be tomorrow night"
"We are here today to celebrate the success of one of the largest, most complex, most harrowing combat searches ever attempted by… pic.twitter.com/20JAcH0eTh
— ANI (@ANI) April 6, 2026
न्यूक्लियर हथियारों पर सख्त रुख
डोनाल्ड ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका किसी भी हालात में ईरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने देगा। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो कड़ा सैन्य कदम उठाया जा सकता है।
इस बयान से मध्य-पूर्व में पहले से चल रहे तनाव के और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ऑपरेशन लीक पर ट्रंप की चेतावनी
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सरकार के अंदर किसी “जासूस” की मौजूदगी हो सकती है, जिसने इस गुप्त रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी लीक की।
उन्होंने कहा कि प्रशासन इस व्यक्ति की पहचान करने के लिए गंभीरता से जांच कर रहा है।
साथ ही, ट्रंप ने उस पत्रकार को भी चेतावनी दी, जिसने सबसे पहले इस ऑपरेशन की खबर प्रकाशित की थी। उन्होंने कहा:
“अगर वह व्यक्ति जानकारी साझा नहीं करता, तो उसे जेल जाना पड़ सकता है।”
हालांकि, उन्होंने किसी पत्रकार या मीडिया संस्थान का नाम नहीं लिया।
वैश्विक असर
ईरान को लेकर दिया गया यह बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान कूटनीतिक प्रयासों को प्रभावित कर सकते हैं और क्षेत्रीय स्थिरता पर असर डाल सकते हैं।
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