तुलसी गबार्ड की भारत यात्रा और रायसीना डायलॉग में उनकी स्पष्ट और मुखर टिप्पणी पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत-अमेरिका के बढ़ते सहयोग को रेखांकित करती है। डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (DNI) के रूप में गबार्ड की भूमिका और उनका सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान पर सीधा हमला करना, इस बात का संकेत देता है कि अमेरिका में भी पाकिस्तान की आतंकवाद-समर्थक नीतियों को लेकर असहजता बढ़ रही है।
रायसीना डायलॉग में गबार्ड के प्रमुख बिंदु:
- पाकिस्तान को आतंकवाद का प्रायोजक बताया: गबार्ड ने पाकिस्तान की भूमिका को उजागर करते हुए कहा कि इस्लामी आतंकवाद सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि अमेरिका, बांग्लादेश और मध्य-पूर्व के कई देशों के लिए भी खतरा है।
- भारत में पाकिस्तान प्रायोजित हमलों की निंदा: उन्होंने भारत में हुए आतंकी हमलों को कट्टरपंथी आतंकवाद करार दिया और इसे जड़ से खत्म करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
- अमेरिका-भारत सहयोग को अहम बताया: उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई लड़ने के लिए रणनीतियां बना रहे हैं।
- आतंकवाद वैश्विक समस्या: उन्होंने कहा कि यह सिर्फ क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है, जिससे अमेरिका भी अछूता नहीं है।
प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया और भारत का रुख
इससे एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पॉडकास्ट में पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को “एक्सपोर्ट” करने पर चिंता व्यक्त की थी। मोदी सरकार शुरू से पाकिस्तान से संबंध सुधारने की कोशिश करती रही है, लेकिन हर बार उसे धोखे का सामना करना पड़ा।
- लाहौर यात्रा और नवाज शरीफ को शपथ ग्रहण में बुलाना – मोदी ने व्यक्तिगत पहल कर संबंध सुधारने की कोशिश की, लेकिन उरी, पठानकोट और पुलवामा जैसे आतंकी हमलों ने भारत को कठोर नीति अपनाने पर मजबूर किया।
- पाकिस्तान की “स्टेट पॉलिसी” के रूप में आतंकवाद – मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि पाकिस्तान ने आतंकवाद को अपनी राष्ट्रीय नीति बना लिया है और इसके चलते वैश्विक सुरक्षा खतरे में है।
भारत-अमेरिका का बढ़ता सामरिक सहयोग
- अमेरिका अब खुलकर आतंकवाद के खिलाफ भारत का समर्थन कर रहा है।
- इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग और आतंकवाद विरोधी अभियानों में साझेदारी को और मजबूत किया जा रहा है।
- अमेरिका की इंटेलिजेंस चीफ द्वारा भारत में आकर पाकिस्तान पर सीधा हमला करना अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के रुख को मजबूती देता है।
भविष्य की संभावनाएं
- अमेरिका पाकिस्तान को लेकर और सख्त हो सकता है, जिससे पाकिस्तान पर आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ेगा।
- भारत आतंकवाद के मुद्दे को और आक्रामक तरीके से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा सकता है।
- अमेरिका, भारत और अन्य सहयोगी देश आतंकवाद के खिलाफ एकजुट रणनीति बना सकते हैं, जिससे पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की संभावना बढ़ेगी।
तुलसी गबार्ड के बयानों से स्पष्ट है कि अमेरिका अब पाकिस्तान की “आतंकवाद नीति” को हल्के में लेने के मूड में नहीं है। रायसीना डायलॉग में उनकी उपस्थिति भारत-अमेरिका सहयोग को और मजबूत करेगी और पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाएगी।