श्रीलंका के राष्ट्रपति दिसानायके ने चीन का नाम लिए बिना उसे कड़ा संदेश दिया है। पीएम मोदी की मौजूदगी में उन्होंने भारत को आश्वस्त करते हुए कहा कि श्रीलंका अपने भू-क्षेत्र का उपयोग भारत के सुरक्षा हितों के प्रतिकूल कदम उठाने के लिए नहीं होने देगा। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी और श्रीलंका के राष्ट्रपति दिसानायके ने सामपुर सौर ऊर्जा परियोजना का वर्चुअल उद्घाटन किया। इसके साथ ही भारत एवं श्रीलंका ने रक्षा सहयोग संबंधी समझौते पर बड़ी डील की है। रणनीतिक रूप से भारत के लिए यह समझौता काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दोनों देशों के बीच श्रीलंका को बहु-क्षेत्रीय अनुदान सहायता पर भी सहमति बनी। इसके अलावा भारत एवं श्रीलंका ने त्रिंकोमाली को ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए। बता दें कि पीएम मोदी बिम्मटेक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद शुक्रवार को कोलंबो पहुंचे हैं। दिसानायके के साथ वार्ता से पहले, मोदी का श्रीलंका की राजधानी के मध्य में स्थित ऐतिहासिक ‘इंडीपेंडेंस स्क्वायर’ (स्वतंत्रता चौक) पर औपचारिक स्वागत किया गया। किसी अन्य देश के नेता को यहां संभवत: पहली बार इस प्रकार सम्मानित किया गया है। दिसानायके ने ‘स्क्वायर’ पर प्रधानमंत्री का स्वागत किया। ‘अधिकारियों ने कहा कि यह पहला मौका है जब किसी अन्य देश के नेता का ‘स्क्वायर’ पर इस तरह से स्वागत किया गया।
#WATCH | Colombo, Sri Lanka | Foreign Secretary Vikram Misri says, "President of Sri Lanka stated very clearly that Sri Lankan territory will not be used or be allowed to be used in any manner that is inimical or detrimental to india's interests. During discussions today, he said… pic.twitter.com/vICXHykmuB
— ANI (@ANI) April 5, 2025
भारत-श्रीलंका रक्षा और ऊर्जा समझौते: क्या मायने हैं?
1. चीन को अप्रत्यक्ष लेकिन स्पष्ट संदेश
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श्रीलंका के राष्ट्रपति ने कहा कि:
“श्रीलंका अपने भू-क्षेत्र का उपयोग भारत के सुरक्षा हितों के प्रतिकूल कदम उठाने के लिए नहीं होने देगा।”
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यह बयान चीन के बढ़ते सैन्य और बंदरगाह प्रभाव (जैसे हम्बनटोटा पोर्ट) को देखते हुए बेहद अहम है।
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यह भारत के क्षेत्रीय सुरक्षा हितों की खुली पैरवी है, जिसे पहले कई श्रीलंकाई सरकारें कूटनीतिक भाषा में टालती रही हैं।
2. रक्षा सहयोग समझौता: पहली बार ऐतिहासिक कदम
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यह समझौता भारत-श्रीलंका के बीच सैन्य सहयोग, प्रशिक्षण, और सामरिक समन्वय को बढ़ावा देगा।
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खासकर श्रीलंका की नौसेना की क्षमता बढ़ाने में भारत मदद करेगा — जो हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में चीन की “String of Pearls” नीति का जवाब है।
3. सामपुर सौर ऊर्जा परियोजना और त्रिंकोमाली समझौता
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त्रिंकोमाली को ऊर्जा हब में बदलना भारत के लिए रणनीतिक जीत है:
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यह बंदरगाह क्षेत्र भारत के पूर्वी समुद्री हितों के करीब है।
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इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और श्रीलंका की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा।
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सामपुर सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट भारत की “International Solar Alliance” नीति का विस्तार है।
4. 5,000 धार्मिक स्थलों की सौर ऊर्जा से रोशनी
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धार्मिक स्थलों पर सौर छत प्रणाली लगाना न केवल ऊर्जा सहयोग है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक साझेदारी को भी दर्शाता है।
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यह श्रीलंका में “सॉफ्ट पावर” डिप्लोमेसी का एक बढ़िया उदाहरण है।
5. ‘मित्र विभूषण’ से सम्मानित होना
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श्रीलंका द्वारा पीएम मोदी को “मित्र विभूषण” देना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत के संकटकालीन सहयोग की स्वीकृति है:
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कोविड महामारी, आर्थिक संकट, 2019 आतंकी हमले — हर स्थिति में भारत श्रीलंका के साथ खड़ा रहा।
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भविष्य की रणनीतिक तस्वीर
क्षेत्र | संभावित प्रभाव |
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सुरक्षा | श्रीलंका में भारत की रणनीतिक गहराई बढ़ेगी, खासकर नौसेना उपस्थिति में |
ऊर्जा | त्रिंकोमाली और सामपुर भारत के लिए लॉन्ग-टर्म ऊर्जा हब बन सकते हैं |
कूटनीति | भारत की “Neighbourhood First” नीति को नया बल मिलेगा |
चीन की रणनीति | हम्बनटोटा जैसे चीनी बंदरगाहों पर निगरानी रखने के लिए भारत को विकल्प मिलेगा |