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पर्यटकों के लिए बंद हुई रंग बदलने वाली फूलों की घाटी

पर्यटकों के लिए बंद हुई रंग बदलने वाली फूलों की घाटी

आज से विश्व धरोहर फूलों की घाटी आम पर्यटकों के लिए बंद कर दी गयी है। इस साल 13,161 देशी और विदेशी पर्यटकों ने घाटी का दीदार किया। शीतकाल के बाद अब अगले साल एक जून को फूलों की घाटी को आम पर्यटकों के लिए खोला जाएगा ।

बद्रीनाथ धाम राष्ट्रीय मार्ग में श्री हेमकुंड धाम ट्रैक रूट पर विश्व धरोहर फूलों की घाटी है और इसे देखने और इस पर शोध करने हर साल सैकड़ों सैलानी पहुंचते हैं।

इतने पर्यटक पहुंचे

फूलों की घाटी प्रकृति प्रेमियों के लिए सदा से ही आकर्षण का केंद्र रही है। यहां का नैसर्गिक प्राकृतिक सौंदर्य हर किसी को अभिभूत कर देता है। फूलो की घाटी में वर्ष 2014 में 484 पर्यटक, 2015 में 181, 2016 में 6503, 2017 में 13752, 2018 में 14742 पर्यटक, 2019 में 17424 पर्यटक, 2020 में कोरोना संक्रमण के कारण 932 पर्यटक ही घाटी में पहुंचे थे, 2021 में 9404 पर्यटक फूलों की घाटी आये। 2022 में 20827 पर्यटक और इस साल 2023 में 12 हजार 707 देशी और 401 विदेशी पर्यटकों सहित कुल 13 हजार 161 देशी विदेशी प्रकृति प्रेमियों ने रंग बदलने वाली घाटी का दीदार किया, पिछले साल की तुलना में इस साल कम पर्यटक यहां पहुंचे। इस साल पर्यटको से वन विभाग को 20 लाख 93 हजार 300 रुपए का राजस्व भी प्राप्त हुआ।

इस समय खुलती है

सीमांत जनपद चमोली में मौजूद विश्व धरोहर रंग बदलने वाली फूलों की घाटी को हर साल आवाजाही के लिए 1 जून को आम पर्यटकों के लिए खोल दिया जाता है जबकि अक्तूबर अंतिम सप्ताह में 31 अक्तूबर को ये घाटी आवाजाही के लिए बंद हो जाती है।

यहां है विश्व धरोहर

उत्तराखंड के चमोली जिले में पवित्र हेमकुंड साहब मार्ग स्थित फूलों की घाटी को उसकी प्राकृतिक खूबसूरती और जैविक विविधता के कारण 2005 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया। 87.5 वर्ग किमी में फैली फूलों की ये घाटी न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। फूलों की घाटी में दुनियाभर में पाए जाने वाले फूलों की 500 से अधिक प्रजातियां मौजूद हैं। हर साल देश विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं। यह घाटी आज भी शोधकर्ताओं के आकर्षण का केंद्र है। नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान और फूलों की घाटी सम्मिलित रूप से विश्व धरोहर स्थल घोषित हैं।

पर्वतारोही फ्रैंक स्मिथ से है नाता

फ्रैंक स्मिथ 1931 में कामेट पर्वत के अभियान से लौट रहे थे तब रास्ता भटकने के बाद 16700 फीट ऊंचे दर्रे को पार कर भ्यूंडार घाटी में पहुंचे और उन्होंने यहां मौजूद फूलों की इस घाटी को देखा तो यहां मौजूद असंख्य प्रजातियों के फूलों की सुंदरता को देखकर वो आश्चर्यचकित होकर रह गये। फूलों की इस घाटी का आकर्षण फ्रैंक स्मिथ को दुबारा 1937 में यहाँ खींच लाया और उन्होंने यहाँ के फूलों पर गहन अध्ययन व शोध किया और 300 से अधिक फूलों की प्रजातियों के बारे में जानकारी एकत्रित की, जिसके बाद फ्रैंक स्मिथ नें 1938 में फूलों की घाटी में मौजूद फूलों पर ”वैली ऑफ फ्लावर” नाम की एक किताब प्रकाशित की। इसके बाद दुनिया ने इसे जाना। फ्रैंक स्मिथ इस फूलों की घाटी से किस्म के बीज अपने देश ले गये थे।

तीन सौ प्रजाति से अधिक फूल!

फूलों की घाटी में तीन सौ प्रजाति के फूल अलग-अलग समय पर खिलते हैं। यहां जैव विविधता का खजाना है। यहां पर उगने वाले फूलों में पोटोटिला, प्राइमिला, एनिमोन, एरिसीमा, एमोनाइटम, ब्लू पॉपी, मार्स मेरी गोल्ड, ब्रह्म कमल, फैन कमल जैसे कई फूल यहाँ खिले रहते हैं। घाटी मे दुर्लभ प्रजाति के जीव जंतु, वनस्पति, जड़ी बूटियों का है संसार बसता है। यहाँ तितलियों का भी संसार है। इस घाटी में कस्तूरी मृग, मोनाल, हिमालय का काला भालू, गुलदार, हिम तेंदुआ भी दिखता है।

हर 15 दिन में रंग बदलती है ये घाटी!

फूलों की घाटी में जुलाई से अक्टूबर के मध्य 500 से अधिक प्रजाति के फूल खिलते हैं। खास बात यह है कि हर 15 दिन में अलग-अलग प्रजाति के रंगबिरंगे फूल खिलने से घाटी का रंग भी बदल जाता है। यह ऐसा सम्मोहन है, जिसमें हर कोई कैद होना चाहता

 

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