देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी INDIA गठबंधन के बीच चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। इसी बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए पांच सवाल पूछे हैं। उन्होंने 2014 और 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की हार, चुनाव आयोग की भूमिका, अवैध प्रवासियों के नाम मतदाता सूची से हटाने और पूर्व में हुए SIR अभियानों को लेकर विपक्ष से जवाब मांगा है।
SIR विवाद के बीच किरेन रिजिजू ने कांग्रेस को घेरा, पांच सवालों से बढ़ाई सियासी गर्मी
देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ रहा है। कांग्रेस और INDIA गठबंधन के अन्य दल मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया, पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। वहीं, भारतीय जनता पार्टी इस प्रक्रिया को मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण बता रही है।
इसी राजनीतिक विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कांग्रेस पार्टी को सीधे चुनौती देते हुए पांच सवाल पूछे। रिजिजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस भारतीय लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने अपने राजनीतिक बयान में कांग्रेस को एक परिवार के नेतृत्व वाली पार्टी बताते हुए बाहरी ताकतों के साथ मिलीभगत का भी आरोप लगाया। हालांकि, यह केंद्रीय मंत्री का राजनीतिक आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध कराए गए विवरण में नहीं की गई है। रिजिजू ने कांग्रेस से इन सवालों का स्पष्ट जवाब देने की मांग की और चुनावी प्रक्रिया पर विपक्ष की आलोचना को लेकर अपनी आपत्ति जताई।
I challenge Congress party to answer to the basic questions:
1. How did congress get only 44 MPs in 2014 Lok Sabha election when Election Commissioners were appointed by their Govt?
2. When Gyanesh Kumar was not CEC in 2024, how did Congress face a hatric defeat?
3. Will…
— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) October 31, 2026
पहला सवाल: 2014 में कांग्रेस सिर्फ 44 लोकसभा सीटों पर क्यों सिमट गई?
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस से पहला सवाल 2014 के लोकसभा चुनाव परिणामों को लेकर पूछा। उन्होंने कहा कि जब 2014 में चुनाव आयोग के सदस्यों की नियुक्ति कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में हुई थी, तब कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में केवल 44 सीटें ही क्यों मिलीं? 2014 के आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्पष्ट बहुमत हासिल किया था, जबकि कांग्रेस का प्रदर्शन ऐतिहासिक रूप से कमजोर रहा था।
रिजिजू ने इसी चुनावी परिणाम का उदाहरण देते हुए कांग्रेस के चुनाव आयोग संबंधी आरोपों पर सवाल उठाया। उनका तर्क था कि जब कांग्रेस के कार्यकाल में नियुक्त चुनाव आयोग की निगरानी में भी पार्टी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा था, तो चुनावी हार को केवल चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया से जोड़कर देखना उचित नहीं है।
दूसरा सवाल: 2024 में ज्ञानेश कुमार CEC नहीं थे, फिर कांग्रेस को लगातार तीसरी हार कैसे मिली?
किरेन रिजिजू ने अपने दूसरे सवाल में 2024 के लोकसभा चुनाव और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति का मुद्दा उठाया। उन्होंने कांग्रेस से पूछा कि जब 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं थे, तब कांग्रेस लगातार तीसरी बार केंद्र में सरकार बनाने में असफल क्यों रही?
2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान राजीव कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त थे। ज्ञानेश कुमार उस समय चुनाव आयुक्त के पद पर कार्यरत थे और बाद में मुख्य चुनाव आयुक्त बने। रिजिजू ने इस तथ्य का उल्लेख करते हुए कांग्रेस के उन राजनीतिक आरोपों पर सवाल उठाया, जिनमें चुनाव आयोग की नियुक्तियों और चुनावी निष्पक्षता को लेकर सरकार की आलोचना की जाती रही है।
केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस से पूछा कि क्या पार्टी अपनी लगातार चुनावी असफलताओं का कारण केवल संवैधानिक संस्थाओं को मानती है या अपने राजनीतिक प्रदर्शन की भी समीक्षा करेगी।
तीसरा सवाल: क्या कांग्रेस के मौजूदा मुख्यमंत्री इस्तीफा देंगे और माफी मांगेंगे?
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने अपने तीसरे सवाल में कांग्रेस शासित राज्यों की सरकारों को लेकर राजनीतिक चुनौती दी। उन्होंने पूछा कि यदि कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है, तो क्या उसके मौजूदा मुख्यमंत्री अपने पदों से इस्तीफा देंगे और 2014 से 2026 के बीच चुनाव जीतकर सरकार बनाने के लिए माफी मांगेंगे?
इस सवाल के जरिए रिजिजू ने कांग्रेस के चुनावी प्रक्रिया संबंधी रुख में कथित विरोधाभास का मुद्दा उठाया। उनका तर्क था कि कांग्रेस जिन चुनावी प्रक्रियाओं के आधार पर जीत हासिल करती है, उन्हीं प्रक्रियाओं पर हार के समय सवाल उठाना राजनीतिक रूप से असंगत है।
चौथा सवाल: क्या अवैध प्रवासियों, मृतकों और डुप्लिकेट नामों को मतदाता सूची से हटाना गलत है?
किरेन रिजिजू ने अपने चौथे सवाल में SIR की मूल प्रक्रिया और मतदाता सूची की शुद्धता का मुद्दा उठाया। उन्होंने कांग्रेस से पूछा कि क्या मतदाता सूची में मौजूद अवैध प्रवासियों, मृत व्यक्तियों, दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके लोगों और एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों को हटाया जाना चाहिए या नहीं?
मतदाता सूची के पुनरीक्षण का एक प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल पात्र मतदाताओं के नाम ही सूची में दर्ज हों। चुनावी प्रक्रिया में गलत या दोहरी प्रविष्टियों को पहचानना और नियमानुसार सुधार करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
हालांकि, किसी व्यक्ति का केवल दूसरे स्थान पर चले जाना या उसके दस्तावेजों में विसंगति होना स्वतः उसका मताधिकार समाप्त करने का आधार नहीं बनता। नाम हटाने की कार्रवाई में कानून के तहत निर्धारित सत्यापन, सूचना और आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।
पांचवां सवाल: क्या कांग्रेस सरकारों के समय हुए SIR अभियान भी अवैध थे?
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने अपने पांचवें सवाल में देश के चुनावी इतिहास का उल्लेख करते हुए कांग्रेस को चुनौती दी। उन्होंने सवाल किया कि क्या पूर्व में विभिन्न वर्षों में आयोजित विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रियाएं भी अवैध थीं?
रिजिजू ने अपने बयान में 1952-56, 1958-61, 1965-66, 1983-84, 1987-88, 1993, 1995 और 2002-2004 के दौरान मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियानों का उल्लेख किया।
उन्होंने कांग्रेस से पूछा कि यदि अतीत में ऐसी प्रक्रियाएं स्वीकार्य थीं, तो वर्तमान में SIR को लेकर विरोध क्यों किया जा रहा है? इस सवाल के जरिए केंद्रीय मंत्री ने मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को भारतीय चुनावी व्यवस्था की ऐतिहासिक प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत किया।
SIR क्या है और मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण क्यों किया जाता है?
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची की समीक्षा और अद्यतन करने की एक प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची में पात्र नागरिकों की सही जानकारी सुनिश्चित करना, मृत मतदाताओं की प्रविष्टियों की पहचान करना, दोहरे नामों को ठीक करना और आवश्यकतानुसार अन्य त्रुटियों को सुधारना होता है।
भारत में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत निर्वाचन आयोग को दी गई है। मतदाता सूची से संबंधित कार्य जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और लागू नियमों के अंतर्गत किए जाते हैं। मतदाता सूची की शुद्धता लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि कोई पात्र नागरिक प्रशासनिक गलती या अनुचित प्रक्रिया के कारण मतदान के अधिकार से वंचित न हो।
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