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‘400 पार के लक्ष्य में अमरावती भी शामिल…’, भाजपा उम्मीदवार नवनीत राणा ने अमित शाह से की मुलाकात

‘400 पार के लक्ष्य में अमरावती भी शामिल…’, भाजपा उम्मीदवार नवनीत राणा ने अमित शाह से की मुलाकात

अमरावती से भाजपा उम्मीदवार नवनीत राणा  ने शुक्रवार को अपने पति रवि राणा के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में मुलाकात की। वहीं, अमित शाह से मिलने के बाद उन्होंने कहा कि मैं जीवन में एक नई पारी की शुरुआत कर रही हूं और मैं उनका आशीर्वाद लेने के लिए यहां आई हूं। उन्होंने आगे कहा कि मैं उन्हें विश्वास दिलाने आई हूं कि मोदी जी का जो सपना है ‘अब की बार 400 पार’ उसमें एक अमरावती भी जरूर रहेगा।

अमरावती से जीत का किया दावा

उन्होंने अमरावती में उनके सामने चुनौती से जुड़े एक सवाल पर बोलते हुए कहा कि साल 2019 में एक बड़े वेव के बाद भी अमरावती के लोगों ने मुझे चुन कर सांसद पहुंचाया था। उस समय अमरावती के लोगों को भरोसा था कि मेरी आवाज सांसद में उठेगी। उन्होंने आगे कहा कि मैंने पांच सालों तक जनता की आवाज को संसद में उठाया है। उन्होंने भरोसा जताया कि इस बार भी लोग मुझे चुनकर संसद भेजेंगे।

गठबंधन के नेताओं को रास नहीं आया नवनीत का आना

जहां एक ओर नवनीत राणा दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात कर रही हैं, तो वहीं अमरावती से निर्दलीय सांसद नवनीत राणा को पार्टी में शामिल करने और उन्हें चुनाव लड़ाने का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का फैसला महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन से जुड़े कुछ नेताओं को रास नहीं आया है और उन्होंने इसे ‘राजनीतिक आत्महत्या’ करार दिया है। इस घटनाक्रम की न केवल कांग्रेस ने आलोचना की है, बल्कि सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगी निर्दलीय विधायक बच्चू कडू और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना से जुड़े पूर्व सांसद आनंदराव अडसुल ने भी इस फैसले पर आपत्ति जताई है। कडू ने राणा की उम्मीदवारी को ‘लोकतंत्र का पतन’ बताया और कहा कि उन्हें हराना होगा। अडसुल ने इस कदम को महायुति का ‘राजनीतिक आत्महत्या’ वाला कदम बताया और घोषणा की कि भले ही उनकी पार्टी उनका समर्थन नहीं करे, फिर भी वह राणा के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे।

नवनीत ने शिवसेना सांसद को दी थी शिकस्त  

नवनीत राणा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अमरावती से अविभाजित शिवसेना के तत्कालीन सांसद अडसुल को हराया था। चुनाव के बाद उनके खिलाफ फर्जी जाति प्रमाणपत्र जमा करने के आरोप लगने लगे। बंबई उच्च न्यायालय ने 8 जून, 2021 को कहा था कि राणा ने ‘मोची’ जाति का जो प्रमाणपत्र जमा किया है उसे फर्जी दस्तावेजों के जरिए धोखाधड़ी से हासिल किया गया। अदालत ने उन पर दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। उच्चतम न्यायालय ने उनके जाति प्रमाणपत्र को रद्द करने के उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर पिछले महीने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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