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सीएम धामी ने कालू सिद्ध मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में की पूजा-अर्चना, गौशाला में गौ-पूजन कर दिया संस्कृति संदेश

सीएम धामी ने कालू सिद्ध मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में की पूजा-अर्चना, गौशाला में गौ-पूजन कर दिया संस्कृति संदेश

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी शहर के मुख्य चौराहे पर स्थित ऐतिहासिक और जनआस्था के प्रमुख केंद्र कालू सिद्ध मंदिर में आयोजित तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में विधिवत भाग लिया। चौराहा चौड़ीकरण योजना के अंतर्गत मंदिर को पीछे शिफ्ट कर नए स्थान पर भव्य रूप से पुनर्निर्मित किया गया है। इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री ने पूजा-अर्चना कर मंदिर में छत्र चढ़ाया और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की।

मुख्यमंत्री के आगमन पर मंदिर परिसर में पारंपरिक उत्साह का माहौल रहा। परंपरागत वेशभूषा में सजी कलश यात्रा में शामिल महिलाओं ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। इस दौरान मंदिर समिति अध्यक्ष एवं पीठाधीश महंत कालू गिरी महाराज तथा महंत त्रिवेणी गिरी महाराज की अगुवाई में संतों ने मुख्यमंत्री को रुद्राक्ष की माला पहनाकर सम्मानित किया। प्राण प्रतिष्ठा की विधि वैदिक परंपराओं के अनुसार आचार्य डॉ. भूवन चंद्र त्रिपाठी के नेतृत्व में 16 आचार्यों की टीम ने संपन्न कराई।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मंदिर क्षेत्रवासियों की गहरी आस्था का केंद्र है और इसके सौंदर्यपूर्ण पुनर्निर्माण में मंदिर समिति की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य विकास कार्यों के साथ-साथ धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण भी सुनिश्चित करना है। इस भव्य आयोजन में सांसद अजय भट्ट, भाजपा जिला अध्यक्ष प्रताप सिंह बिष्ट, विधायक बंशीधर भगत (कालाढूंगी), राम सिंह कैड़ा (भीमताल), मंडी अध्यक्ष अनिल कपूर ‘डब्बू’, राज्य दर्जा मंत्री सुरेश भट्ट, दिनेश आर्य, महापौर गजराज सिंह बिष्ट, रेनू अधिकारी, नवीन वर्मा सहित पार्टी पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं हजारों श्रद्धालुजन शामिल रहे।

इसके पश्चात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लालकुआं नगर निगम गौशाला पहुंचकर गौ-पूजन किया। उन्होंने कहा कि गौसेवा उत्तराखंड की संस्कृति का अभिन्न अंग है और यह हमारी धार्मिक चेतना और सभ्यता की पहचान भी है। उन्होंने लोगों से गौसंवर्धन और संरक्षण के लिए जागरूक रहने की अपील की। मुख्यमंत्री ने यह संदेश भी दिया कि गौमाता के संरक्षण से ही समाज और संस्कृति को मजबूती मिलती है। इस अवसर पर गौशाला परिसर में मौजूद लोगों ने गौसेवा को आत्मसात करने की प्रेरणा ली।

यह आयोजन जहां एक ओर धार्मिक आस्था को मजबूती देने वाला रहा, वहीं दूसरी ओर यह उत्तराखंड सरकार की संस्कृति-संवर्धन और आस्था संरक्षण की प्रतिबद्धता का भी प्रतीक बना।

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