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‘अंतरिक्ष से आज भी भारत सारे जहां से अच्छा दिखता है’, प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले शुभांशु शुक्ला

‘अंतरिक्ष से आज भी भारत सारे जहां से अच्छा दिखता है’, प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले शुभांशु शुक्ला

भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अपने ऐतिहासिक Axiom-4 मिशन से भारत लौट आए हैं और इस अवसर पर उन्होंने पृथ्वी विज्ञान एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन के साथ मुलाकात की। तीनों ने संयुक्त रूप से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया, जिसमें न केवल इस मिशन की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया बल्कि भारत के भविष्य के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रमों और वैश्विक अंतरिक्ष सहयोग की दिशा में उठाए जा रहे कदमों की भी चर्चा की गई। इस दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अंतरिक्ष में किए गए प्रयोग केवल वहीं तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनकी प्रतिकृतियां धरती पर भी लाभ पहुंचाती हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि “ये प्रयोग एक भारतीय द्वारा किए गए हैं, लेकिन इनका लाभ पूरी मानव जाति को होगा।” मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘विश्व बंधु भारत’ की परिकल्पना का यह सबसे उज्ज्वल उदाहरण है, जिसे अब अंतरिक्ष विज्ञान ने वास्तविक रूप में साकार किया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रेस वार्ता में इसरो और भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की ऐतिहासिक यात्रा को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष विभाग लगभग 70 वर्षों से अस्तित्व में है और 1969 में औपचारिक रूप से इसरो की स्थापना की गई थी। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने वैश्विक मानकों, रणनीतियों और वैज्ञानिक पैरामीटर्स को अपनाते हुए खुद को दुनिया की अग्रणी अंतरिक्ष शक्तियों की कतार में खड़ा किया है। उन्होंने याद दिलाया कि यह कहानी 2018 में शुरू हुई, जब स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से ऐलान किया कि भारत अब एक भारतीय को अंतरिक्ष में भेजने के लिए तैयार है। यह भारत की अंतरिक्ष यात्रा का ऐतिहासिक मोड़ था, जिसने गगनयान कार्यक्रम का मार्ग प्रशस्त किया।

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने भावुक स्वर में कहा कि “भारत आज भी अंतरिक्ष से सारे जहां से अच्छा दिखता है। जय हिंद, जय भारत।” उन्होंने मिशन को अत्यंत सफल बताया और कहा कि सभी तकनीकी उद्देश्यों को पूरा करने में सफलता मिली है। शुक्ला ने स्पष्ट किया कि मानव अंतरिक्ष मिशन का वास्तविक लाभ केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं होता, बल्कि अंतरिक्ष में प्रत्यक्ष अनुभव और वहां से प्राप्त ज्ञान अमूल्य होता है। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में अंतरिक्ष में रहकर उन्होंने जो भी जानकारी एकत्र की है, वह न केवल गगनयान बल्कि भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की तैयारी के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। शुक्ला ने साझा किया कि अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने के बाद शरीर कई शारीरिक और जैविक परिवर्तनों से गुजरता है। उन्होंने बताया कि 20 दिन तक शून्य गुरुत्वाकर्षण में रहने के बाद जब पृथ्वी पर लौटते हैं, तो शरीर को फिर से गुरुत्वाकर्षण में ढलने में कठिनाई होती है।

इस अवसर पर इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में दक्षिण एशियाई उपग्रह का निर्माण कर उसे प्रक्षेपित किया गया और यह उपग्रह दक्षिण एशियाई देशों को मुफ्त में प्रदान किया गया। यही नहीं, भारत ने G20 देशों के लिए भी एक विशेष G20 उपग्रह तैयार किया है। उन्होंने अंतरिक्ष उद्योग में तेजी से हो रही प्रगति की ओर ध्यान आकर्षित किया और बताया कि “10 साल पहले हमारे पास अंतरिक्ष क्षेत्र में केवल एक स्टार्टअप था, जबकि आज यह संख्या 300 से अधिक हो चुकी है।” उन्होंने गर्व से कहा कि GSLV-F16 रॉकेट ने 30 जुलाई को NASA-ISRO सिंथेटिक एपर्चर रडार (NISAR) को सटीक कक्षा में स्थापित किया, जो भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग का ऐतिहासिक कदम है। इसके अलावा, उन्होंने घोषणा की कि अगले 2-3 महीनों में इसरो अमेरिका का 6500 किलोग्राम का संचार उपग्रह भी प्रक्षेपित करेगा, जिसे भारतीय प्रक्षेपण यान के माध्यम से लॉन्च किया जाएगा।

यह पूरा आयोजन भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के उस सुनहरे भविष्य की झलक देता है, जहां एक ओर भारतीय अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में नए आयाम गढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इसरो और भारत की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमता पूरे विश्व के लिए नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त कर रही है।

 

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