किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं। दोनों मुलाकातों के केंद्र में युद्ध, क्षेत्रीय अस्थिरता, समुद्री सुरक्षा और शांति की कोशिशें रहीं। ईरानी पक्ष के मुताबिक, राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने प्रधानमंत्री मोदी से भारत के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों और प्रभाव का इस्तेमाल कर क्षेत्र को युद्ध और रक्तपात से निकालकर बातचीत की दिशा में ले जाने में सहयोग मांगा।
ईरानी राष्ट्रपति की PM मोदी से शांति के लिए अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की बिश्केक में यह अहम आमने-सामने मुलाकात ऐसे समय हुई, जब पश्चिम एशिया गंभीर संघर्ष और तनाव से गुजर रहा है। ईरानी पक्ष की ओर से जारी जानकारी के अनुसार पेजेश्कियान ने कहा कि युद्ध जारी रहना न ईरान, न क्षेत्र और न ही मानवता के हित में है।
उन्होंने भारत की क्षेत्रीय और वैश्विक भूमिका का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी से विभिन्न पक्षों के साथ भारत के संपर्कों का इस्तेमाल कर उन्हें युद्ध और रक्तपात से दूर संवाद तथा समझौते की दिशा में बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। पेजेश्कियान ने कहा कि मौजूदा समस्याओं का समाधान बातचीत और सहयोग में ही है।
ईरान के राष्ट्रपति ने अमेरिका पर भी निशाना साधते हुए कहा कि तेहरान समझौतों और बातचीत के प्रति प्रतिबद्ध रहा है, लेकिन अमेरिकी पक्ष ने अपने दायित्व पूरे नहीं किए। उनका कहना था कि इसके बावजूद ईरान समझौते और आपसी समझ बनाने की कोशिश जारी रखना चाहता है।
मोदी ने कहा- संवाद और कूटनीति से निकले समाधान
भारत सरकार की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई और भारत का पुराना रुख दोहराया कि सभी विवादों का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए।
मोदी ने क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति और स्थिरता स्थापित करने के प्रयास जारी रखने पर जोर दिया। उन्होंने साफ कहा कि नागरिकों तथा नागरिक बुनियादी ढांचे को किसी भी परिस्थिति में नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।
समुद्री मार्ग और नाविकों की सुरक्षा पर खास जोर
मोदी-पेजेश्कियान वार्ता में समुद्री सुरक्षा भी महत्वपूर्ण मुद्दा रही। प्रधानमंत्री मोदी ने Freedom of Navigation and Commerce यानी नौवहन और व्यापार की स्वतंत्रता की रक्षा करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा भारत के लिए भी बड़ी चिंता है, क्योंकि क्षेत्र में अस्थिरता का सीधा असर ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर पड़ सकता है।
दोनों नेताओं के बीच परिवहन, समुद्री सहयोग, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति और चाबहार बंदरगाह से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। ईरानी पक्ष के मुताबिक दोनों देश उपलब्ध आर्थिक संभावनाओं का इस्तेमाल कर व्यापार और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने के पक्ष में हैं।
भारत-ईरान व्यापार बढ़ाने पर भी चर्चा
युद्ध और क्षेत्रीय सुरक्षा के अलावा भारत और ईरान ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर भी बातचीत की। प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के साथ भारत की पुरानी दोस्ती को अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़ाने और दोनों देशों के बीच व्यापार को अधिक विविध बनाने की इच्छा जताई।
ईरान ने भी राजनीतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की बात कही।
प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पेजेश्कियान को भारत में होने वाले BRICS Summit में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। भारत की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक मोदी ने कहा कि वह BRICS शिखर सम्मेलन में पेजेश्कियान का भारत में स्वागत करने को लेकर उत्सुक हैं।
पुतिन से मिले मोदी, यूक्रेन युद्ध पर दिया बड़ा संदेश
इसी SCO सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ भी द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं ने भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी के साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर युद्ध समाप्त करने और शांति की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लगातार चलते युद्ध से दुनिया को बाहर निकलकर युद्ध के अंत की तरफ बढ़ना चाहिए। मोदी ने दोहराया कि भारत संघर्षों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को ही सही रास्ता मानता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध का हर दिन मानवता को पीछे ले जाता है, जबकि शांति की दिशा में उठाया गया हर कदम दुनिया को नई उम्मीद देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत शांति स्थापित करने के सभी प्रयासों का समर्थन करता रहा है और आगे भी करता रहेगा।
2022 में भी मोदी ने कहा था- यह युद्ध का युग नहीं
रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पहले भी राष्ट्रपति पुतिन के सामने शांति का संदेश दे चुके हैं। सितंबर 2022 में उज्बेकिस्तान के समरकंद में हुए SCO सम्मेलन के दौरान मोदी ने पुतिन से कहा था कि “आज का युग युद्ध का नहीं है।”
अब बिश्केक की बैठक में भी भारत ने उसी नीति को आगे बढ़ाते हुए संवाद, कूटनीति और शांतिपूर्ण समाधान को प्राथमिकता दी है।
भारत-रूस संबंधों पर भी हुई व्यापक चर्चा
मोदी और पुतिन ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, मोबिलिटी और दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क समेत कई क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की। दोनों नेताओं ने भारत-रूस की ‘Special and Privileged Strategic Partnership’ को आगे मजबूत करने पर सहमति जताई।
प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को 12-13 सितंबर 2026 को भारत में होने वाले 18वें BRICS Summit के लिए भी आमंत्रित किया है।
बिश्केक से दुनिया को भारत का शांति संदेश
बिश्केक में ईरान और रूस के नेताओं के साथ प्रधानमंत्री मोदी की बैठकों ने एक बार फिर भारत की उस विदेश नीति को सामने रखा जिसमें युद्ध के बजाय बातचीत और कूटनीति के जरिए विवादों को सुलझाने पर जोर दिया जाता है।
एक तरफ ईरानी राष्ट्रपति ने भारत की वैश्विक पहुंच का इस्तेमाल क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए करने की अपील की, तो दूसरी ओर मोदी ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन को यूक्रेन युद्ध समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।
पश्चिम एशिया और यूक्रेन, दोनों संघर्षों पर भारत का संदेश लगभग एक जैसा रहा—युद्ध का अंत, संवाद की शुरुआत और शांतिपूर्ण समाधान।
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