ब्रिटेन की शरण व्यवस्था यानी UK Asylum System एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। अवैध प्रवासन और शरणार्थियों को लेकर पहले से जारी राजनीतिक और सामाजिक बहस के बीच ब्रिटेन के Home Office से जुड़े एक व्हिसलब्लोअर ने दावा किया है कि बड़ी संख्या में ऐसे asylum applications सामने आते हैं, जिनमें एक जैसी कहानियां, संदिग्ध दस्तावेज और कथित रूप से तैयार किए गए सबूत इस्तेमाल किए जाते हैं।
ब्रिटिश अखबार The Times की हालिया रिपोर्ट में व्हिसलब्लोअर ने यहां तक दावा किया कि उसके अनुभव में “100 में केवल एक” asylum claim वास्तविक लगता है। हालांकि इस आंकड़े की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और इसे पूरे ब्रिटिश asylum system पर लागू आधिकारिक आंकड़ा नहीं माना जा सकता। Home Office का कहना है कि प्रत्येक आवेदन की व्यक्तिगत परिस्थितियों और उपलब्ध सबूतों के आधार पर जांच की जाती है।
क्या हैं ‘Package Claims’? एक जैसी कहानी से शरण पाने का आरोप
रिपोर्ट के अनुसार, Home Office के कथित व्हिसलब्लोअर ने कुछ आवेदनों के लिए “Package Claims” शब्द का इस्तेमाल किया। इसके तहत आरोप है कि आवेदक एक ही asylum application में कई अलग-अलग आधार जोड़ देते हैं, ताकि किसी एक आधार पर मामला कमजोर होने की स्थिति में दूसरे आधार से शरण पाने की संभावना बनी रहे।
व्हिसलब्लोअर ने दावा किया कि कुछ मामलों में अलग-अलग आवेदकों की कहानियां बेहद मिलती-जुलती पाई गईं। उदाहरण के तौर पर कुछ इराकी कुर्द आवेदकों द्वारा कथित तौर पर प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से संबंध होने और इसी वजह से जान का खतरा होने जैसी कहानियां पेश की गईं। इसी तरह पाकिस्तान से जुड़े कुछ मामलों में समलैंगिक संबंधों के आधार पर उत्पीड़न का दावा करने वाले आवेदकों की कहानियों और सबूतों में कथित समानता की बात कही गई है।
BBC की अंडरकवर जांच में भी सामने आया था कथित नेटवर्क
यह विवाद इसलिए भी गंभीर है क्योंकि अप्रैल 2026 में BBC ने एक अंडरकवर जांच प्रकाशित की थी। BBC के पत्रकारों ने खुद को पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए ऐसे अंतरराष्ट्रीय छात्रों के रूप में पेश किया था, जिनके वीजा समाप्त होने वाले थे और जिनके पास asylum मांगने का वास्तविक आधार नहीं था।
जांच में BBC ने दावा किया कि कुछ immigration advisers और कानूनी क्षेत्र से जुड़े लोगों ने उन्हें झूठा LGBTQ+ asylum case तैयार करने के तरीके बताए। इनमें फर्जी व्यक्तिगत कहानी तैयार करना, LGBTQ+ क्लबों में तस्वीरें खिंचवाना, समर्थन पत्र जुटाना, कथित पार्टनर तैयार करना और मेडिकल दस्तावेजों के जरिए केस मजबूत करने जैसे तरीके शामिल थे।
फर्जी केस के लिए £7,000 तक की फीस का आरोप
BBC की जांच के अनुसार, एक कानूनी फर्म से जुड़े adviser ने कथित फर्जी asylum application तैयार करने के लिए £7,000 तक की फीस बताई थी और दावा किया था कि Home Office से आवेदन खारिज होने की संभावना बेहद कम होगी।
एक अन्य मामले में BBC के अंडरकवर रिपोर्टर को कथित तौर पर बताया गया कि किसी व्यक्ति को उसका पुरुष पार्टनर दिखाया जा सकता है और LGBTQ+ समूहों या क्लबों से तस्वीरें तथा समर्थन संबंधी दस्तावेज जुटाए जा सकते हैं।
BBC की रिपोर्ट में यह आरोप भी सामने आया कि कुछ आवेदकों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं या दूसरे मेडिकल आधारों से जुड़े संदिग्ध दस्तावेज हासिल कर asylum case मजबूत करने के तरीके बताए गए।
पत्नी को ब्रिटेन लाकर ‘Lesbian Claim’ कराने की सलाह का भी आरोप
BBC की जांच का एक चौंकाने वाला हिस्सा वह था जिसमें एक अंडरकवर रिपोर्टर ने बताया कि उसकी पत्नी पाकिस्तान में रहती है। रिपोर्ट के अनुसार, उसे कथित तौर पर सलाह दी गई कि asylum मिलने के बाद पत्नी को ब्रिटेन बुलाया जा सकता है और बाद में वह भी खुद को lesbian बताते हुए अलग asylum claim पेश कर सकती है।
BBC ने अपनी जांच में इसे उस कथित “shadow industry” का हिस्सा बताया, जो उन लोगों को झूठी कहानियां और सबूत तैयार करने में मदद कर रही थी जिनके छात्र, वर्क या टूरिस्ट वीजा समाप्त होने वाले थे।
पाकिस्तान-बांग्लादेश के मामलों में LGBTQ+ आधार क्यों महत्वपूर्ण?
ब्रिटेन में asylum किसी व्यक्ति को तब दिया जा सकता है जब उसके पास अपने देश लौटने पर उत्पीड़न या गंभीर नुकसान का वास्तविक और प्रमाणित खतरा हो।
पाकिस्तान में पुरुषों के बीच समलैंगिक यौन संबंध कानून के तहत अपराध हैं और संबंधित प्रावधान में जेल की सजा का प्रावधान है। हालांकि ब्रिटिश सरकार की अपनी country guidance यह भी कहती है कि ऐसे कानूनों के तहत prosecutions दुर्लभ हैं और हर asylum case का फैसला उसकी व्यक्तिगत परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए।
बांग्लादेश में भी Section 377 के तहत पुरुषों के बीच same-sex sexual activity अपराध है। UK Home Office की अप्रैल 2026 की country guidance के मुताबिक कानून शायद ही लागू किया जाता हो, लेकिन LGBTQ+ लोगों को सामाजिक भेदभाव, प्रताड़ना और शत्रुतापूर्ण माहौल का सामना करना पड़ सकता है।
इसलिए केवल किसी व्यक्ति का पाकिस्तान या बांग्लादेश से होना अपने-आप asylum का आधार नहीं है। ब्रिटिश अधिकारियों को यह जांच करनी होती है कि आवेदक के व्यक्तिगत मामले में उत्पीड़न या गंभीर नुकसान का वास्तविक खतरा मौजूद है या नहीं।
राजनीतिक उत्पीड़न के दावों पर भी सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, संदिग्ध मामलों में केवल sexual orientation ही नहीं बल्कि राजनीतिक उत्पीड़न को भी asylum का आधार बनाया गया।
व्हिसलब्लोअर का आरोप है कि कुछ बांग्लादेशी आवेदकों ने राजनीतिक दलों से जुड़े होने और अपने देश लौटने पर उत्पीड़न का खतरा होने का दावा किया, लेकिन इंटरव्यू के दौरान वे कथित तौर पर अपनी ही पार्टी या उसकी राजनीति से जुड़े बुनियादी सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
‘100 में सिर्फ एक दावा असली’—क्या वास्तव में ऐसा है?
यह इस पूरी रिपोर्ट का सबसे सनसनीखेज दावा है, लेकिन इसे सावधानी से समझना जरूरी है।
“100 में एक asylum claim genuine” होने का आंकड़ा ब्रिटिश सरकार का आधिकारिक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक Home Office insider/whistleblower का व्यक्तिगत आकलन है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि ब्रिटेन में आधिकारिक तौर पर 99% asylum claims फर्जी साबित हो चुके हैं।
इसके उलट, हालिया UNHCR audit ने ब्रिटेन की asylum decision-making में दूसरी तरह की समस्याओं की ओर भी इशारा किया है। समीक्षा में पाया गया कि निर्णय प्रक्रिया में गुणवत्ता, इंटरव्यू, तथ्य जुटाने और interpretation से जुड़ी कमियां ऐसी परिस्थितियां पैदा कर सकती हैं जिनमें गलत तरीके से asylum दिया भी जा सकता है और वास्तविक दावेदार का आवेदन गलत तरीके से खारिज भी हो सकता है।
ब्रिटेन में Immigration को लेकर बढ़ती बेचैनी
ब्रिटेन में irregular migration और asylum policy को लेकर जनता में चिंता बढ़ी है। हालिया YouGov सर्वे में 57% लोगों ने Channel के रास्ते आने वाले migrants को asylum application पर फैसला होने तक हिरासत में रखने का समर्थन किया। वहीं 58% ने अधिक safe and legal asylum routes का भी समर्थन किया, जिससे संकेत मिलता है कि जनमत केवल asylum के खिलाफ नहीं बल्कि अनियंत्रित या अनियमित migration को लेकर अधिक चिंतित है।
फर्जी asylum applications से जुड़े ताजा आरोप इस बहस को और तेज कर सकते हैं। साथ ही ऐसे मामले वास्तविक उत्पीड़न झेलने वाले शरणार्थियों और LGBTQ+ asylum seekers के लिए भी समस्या पैदा करते हैं, क्योंकि व्यापक fraud की धारणा genuine claims की विश्वसनीयता पर भी संदेह पैदा कर सकती है।
Home Office का क्या कहना है?
BBC की अंडरकवर जांच सामने आने के बाद Home Office ने कहा था कि asylum system का धोखे से फायदा उठाने वालों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ने पर उन्हें ब्रिटेन से हटाया भी जा सकता है। वहीं ताजा आरोपों पर सरकार का कहना है कि asylum claims की credibility जांचने के लिए प्रक्रियाएं मौजूद हैं और प्रत्येक आवेदन को उसकी व्यक्तिगत परिस्थितियों के आधार पर देखा जाता है।
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