कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन के अन्य नेताओं के सुप्रीम कोर्ट परिसर पहुंचने के दौरान हुई नारेबाजी और कथित हंगामे मामले में आज सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को इस मामले में फटकार लगाई। साथ ही नोटिस भी जारी किया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट मार्च का जिक्र करते हुए कहा, “न्यायपालिका को कोई धमका नहीं सकता।”
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने सुप्रीम कोर्ट परिसर में हुई कथित नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन का मुद्दा उठाया। गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन से वकीलों में नाराजगी है और इसे अदालत पर दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस तरह के प्रयास कमजोर होते हैं और अदालत इनसे प्रभावित नहीं होती।
राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट मार्च पर CJI सूर्यकांत की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अदालत की स्वतंत्रता और गरिमा को लेकर स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को किसी भी प्रकार के दबाव या धमकी से प्रभावित नहीं किया जा सकता।
वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने जब विपक्षी नेताओं के विरोध प्रदर्शन को अदालत पर दबाव बनाने का प्रयास बताया, तब CJI ने कहा कि ऐसे प्रयास इतने कमजोर हैं कि उन पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश ने यह भी टिप्पणी की कि कुछ लोग अदालत के बाहर अलग तरह की बयानबाजी करते हैं, लेकिन अदालत के भीतर आने पर उनकी भाषा बदल जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायाधीश बाहरी घटनाओं से पूरी तरह अनजान नहीं रहते, लेकिन न्यायिक फैसले कानून और तथ्यों के आधार पर ही लिए जाते हैं।
कोर्ट परिसर में कथित नारेबाजी से नाराज वकील, SCBA को लिखी चिट्ठी
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने अदालत को बताया कि 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट परिसर में हुई घटनाओं से कई वकील आहत हैं।
भाटिया के अनुसार, लगभग 200 वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) को पत्र लिखकर इस घटना पर चिंता जताई है। उनका आरोप था कि न्यायालय परिसर में नारेबाजी और राजनीतिक प्रदर्शन के जरिए न्यायिक व्यवस्था पर दबाव बनाने की कोशिश की गई।
इस मुद्दे को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी अदालत के समक्ष उठाया। दोनों कानूनविदों की ओर से न्यायालय परिसर की गरिमा और न्यायिक संस्थाओं की स्वतंत्रता का सवाल उठाया गया।
‘ये कमजोर प्रयास हैं, इन पर कोई ध्यान नहीं देता’ – CJI
विरोध प्रदर्शन को लेकर हुई बहस के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की टिप्पणी विशेष रूप से चर्चा में रही।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कथित दबाव बनाने के प्रयास कमजोर होते हैं और न्यायपालिका इनसे प्रभावित नहीं होती। CJI ने यह भी कहा कि अदालत किसी अलग-थलग स्थान पर नहीं बैठी है और बाहर होने वाली घटनाओं की जानकारी न्यायाधीशों को भी रहती है।
सुप्रीम कोर्ट परिसर के CCTV फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश
सुनवाई के दौरान अदालत परिसर में हुई कथित नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन से संबंधित सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का मुद्दा भी सामने आया।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को संरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि आवश्यकता पड़ने पर घटना से जुड़े तथ्यों की जांच की जा सके।
12 अक्टूबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में निकला था सुप्रीम कोर्ट मार्च
इस पूरे विवाद की शुरुआत 12 अक्टूबर 2026 को हुई थी, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक के नेताओं ने चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला था।
विपक्षी दलों ने SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए थे। विपक्ष का आरोप था कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हो सकती हैं और इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित होने की आशंका है।
इन्हीं मुद्दों को लेकर विपक्षी नेताओं ने न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की थी। मार्च के दौरान बड़ी संख्या में राजनीतिक नेता और समर्थक सुप्रीम कोर्ट के आसपास एकत्र हुए थे। आरोप है कि इस दौरान अदालत परिसर के भीतर भी नारेबाजी हुई, जिसके बाद यह मामला विवादों में आ गया।
SIR को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच विवाद
मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची की जांच और उसे अद्यतन करना है।
इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने कई सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची से पात्र नागरिकों के नाम हटाए जाने की आशंका को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
वहीं, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूचियों की शुद्धता सुनिश्चित करना उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है। इस प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम शामिल रखना और अपात्र या दोहराई गई प्रविष्टियों की पहचान करना महत्वपूर्ण होता है।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर फिर छिड़ी बहस
राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं के सुप्रीम कोर्ट मार्च के बाद न्यायपालिका की स्वतंत्रता और राजनीतिक विरोध प्रदर्शन की सीमाओं पर चर्चा तेज हो गई है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने और संवैधानिक संस्थाओं के फैसलों की आलोचना करने का अधिकार है। हालांकि, अदालतों की कार्यवाही में बाधा डालना या न्यायिक प्रक्रिया को अनुचित तरीके से प्रभावित करने का प्रयास अलग कानूनी सवाल खड़े कर सकता है।
इस मामले में महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट में विरोध प्रदर्शन को लेकर की गई टिप्पणियों और SIR से संबंधित मूल याचिकाओं की सुनवाई को अलग-अलग समझा जाना चाहिए।
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