जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। भारत ने इस्लामी सहयोग संगठन (Organisation of Islamic Cooperation – OIC) के मंच पर जम्मू-कश्मीर और भारत के आंतरिक मामलों को लेकर की गई टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने 17 और 18 अक्टूबर 2026 को इराक की राजधानी बगदाद में आयोजित OIC विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक से जुड़े प्रस्तावों में भारत के खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज किया है।
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में इन आरोपों को दुर्भावनापूर्ण, पक्षपाती और तथ्यहीन बताते हुए कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ राजनीतिक प्रचार के लिए कर रहा है। भारत ने OIC के सदस्य देशों से संगठन की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने की अपील भी की है।
इस्लामी सहयोग संगठन में 57 सदस्य देश हैं। यह संगठन मुस्लिम जगत से जुड़े राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सहयोग के लिए काम करता है। हालांकि, भारत लंबे समय से जम्मू-कश्मीर के संबंध में OIC की टिप्पणियों का विरोध करता रहा है।
बगदाद में OIC की बैठक के बाद भारत की तीखी प्रतिक्रिया
इराक की राजधानी बगदाद में आयोजित OIC विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक के दौरान जम्मू-कश्मीर सहित भारत से जुड़े विषयों पर प्रस्ताव सामने आने की जानकारी दी गई है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने सोमवार, 19 अक्टूबर को जारी बताए गए बयान में इन प्रस्तावों पर आपत्ति जताई और कहा कि संगठन ने एक बार फिर पाकिस्तान को अपने मंच का इस्तेमाल भारत के खिलाफ करने दिया।
भारत के अनुसार, पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आरोपों को बार-बार स्वीकार करना OIC की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है। विदेश मंत्रालय ने सदस्य देशों से अपेक्षा जताई कि वे संगठन के भीतर अधिक जिम्मेदार और संतुलित दृष्टिकोण अपनाएंगे।
पाकिस्तान पर भारत का आरोप—OIC के मंच से फैलाया जा रहा दुष्प्रचार
भारतीय विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गलत जानकारी और राजनीतिक रूप से प्रेरित दावे प्रस्तुत कर रहा है। मंत्रालय के अनुसार, OIC के प्रस्तावों में भारत के बारे में की गई टिप्पणियां दुर्भावनापूर्ण, पक्षपाती और तथ्यहीन हैं।
भारत ने कहा कि पाकिस्तान अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए संगठन का इस्तेमाल कर रहा है। विदेश मंत्रालय ने इस बात पर निराशा व्यक्त की कि OIC ने एक बार फिर पाकिस्तान की ओर से प्रस्तुत दावों को अपने प्रस्तावों में स्थान दिया। यह भारत सरकार का आधिकारिक पक्ष है, जबकि OIC और पाकिस्तान के अपने अलग कूटनीतिक दृष्टिकोण हैं।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग: विदेश मंत्रालय
विदेश मंत्रालय ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं। भारत ने कहा कि इन केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का OIC को कोई अधिकार नहीं है।
मंत्रालय के अनुसार, राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रचार या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पारित प्रस्ताव भारत की क्षेत्रीय संप्रभुता को लेकर उसके संवैधानिक और कूटनीतिक रुख को नहीं बदल सकते। भारत ने पहले भी OIC की ओर से जम्मू-कश्मीर पर जारी बयानों का विरोध करते हुए उन्हें अपने आंतरिक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप बताया है।
अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में विकास का दावा
भारतीय विदेश मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटाए जाने के बाद हुए विकास कार्यों का भी उल्लेख किया। भारत सरकार के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर में बुनियादी ढांचे, सड़क संपर्क, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
मंत्रालय ने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी, पर्यटन सुविधाओं और विकास परियोजनाओं से स्थानीय लोगों को लाभ मिल रहा है। भारत ने इन उपलब्धियों को जम्मू-कश्मीर में विकास और आर्थिक अवसर बढ़ाने की दिशा में उठाए गए कदमों के रूप में प्रस्तुत किया।
पाकिस्तान के नियंत्रण वाले कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप
विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के नियंत्रण वाले कश्मीर के कुछ हिस्सों की स्थिति को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। भारत ने कहा कि वहां विरोध प्रदर्शनों के दौरान आम नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग और दमन की घटनाएं सामने आई हैं।
मंत्रालय ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई में महिलाओं और बच्चों सहित कई लोगों की जान गई है। भारत ने मीडिया पर प्रतिबंध और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों का भी उल्लेख किया।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर पर भारत की आलोचना करने के बजाय अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में नागरिक अधिकारों और शासन से जुड़े सवालों का जवाब देना चाहिए। ये आरोप भारत सरकार की ओर से लगाए गए हैं और प्रत्येक घटना का स्वतंत्र सत्यापन अलग से आवश्यक है।
पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों और सीमा पार आतंकवाद पर भारत का रुख
भारतीय विदेश मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर को लेकर अपने पुराने कूटनीतिक रुख को दोहराया। मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तान से जुड़े दो प्रमुख मुद्दे हैं। पहला, उन क्षेत्रों से पाकिस्तान का हटना जिन पर भारत अपना अधिकार जताता है और जिन्हें वह पाकिस्तान के अवैध कब्जे में मानता है। दूसरा, सीमा पार आतंकवाद को समर्थन बंद करना।
भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है। पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा के लिए आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है।
इस्लामोफोबिया से जुड़े आरोपों को भी भारत ने किया खारिज
OIC के प्रस्तावों में भारत से संबंधित अन्य टिप्पणियों पर भी विदेश मंत्रालय ने आपत्ति जताई। भारत ने विशेष रूप से इस्लामोफोबिया यानी इस्लाम या मुसलमानों के प्रति भय, पूर्वाग्रह और भेदभाव से जुड़े आरोपों को खारिज किया। मंत्रालय ने दावा किया कि पाकिस्तान ऐसे आरोपों के जरिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपने देश में अल्पसंख्यकों की स्थिति, सांप्रदायिक हिंसा और शासन से जुड़े मुद्दों से हटाने की कोशिश कर रहा है।
भारत ने इन आरोपों को पाकिस्तान की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बताया। हालांकि, धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों से जुड़े मुद्दों का आकलन स्वतंत्र साक्ष्यों और संबंधित रिपोर्टों के आधार पर किया जाना चाहिए।
OIC की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर भारत ने उठाए सवाल
विदेश मंत्रालय ने OIC की भूमिका पर भी सवाल उठाए। भारत ने कहा कि पाकिस्तान के दावों को बार-बार समर्थन देना संगठन की निष्पक्षता और विश्वसनीयता के लिए नुकसानदायक है। मंत्रालय ने सदस्य देशों से अपेक्षा जताई कि वे संगठन की कार्यप्रणाली की समीक्षा करेंगे और अधिक संतुलित तथा जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाएंगे।
भारत ने यह भी संकेत दिया कि अंतरराष्ट्रीय संगठनों को किसी एक सदस्य देश के राजनीतिक एजेंडे का माध्यम बनने से बचना चाहिए।
OIC क्या है और इसमें कितने देश शामिल हैं?
इस्लामी सहयोग संगठन यानी OIC एक अंतरसरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 1969 में हुई थी। इसका मुख्यालय सऊदी अरब के जेद्दा में स्थित है। इस संगठन के 57 सदस्य देश हैं। OIC मुस्लिम जगत के साझा हितों, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, आर्थिक विकास, सामाजिक मुद्दों और विभिन्न वैश्विक विषयों पर काम करता है।
पाकिस्तान OIC का सदस्य है और जम्मू-कश्मीर का मुद्दा संगठन के मंच पर उठाता रहा है। भारत OIC का सदस्य नहीं है। हालांकि, कई OIC सदस्य देशों के साथ भारत के मजबूत आर्थिक, व्यापारिक, ऊर्जा और रणनीतिक संबंध हैं।
भारत और OIC के बीच जम्मू-कश्मीर पर पहले भी हो चुका है विवाद
यह पहला अवसर नहीं है जब जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत ने OIC के बयानों का विरोध किया हो। अतीत में भी संगठन की ओर से जम्मू-कश्मीर को लेकर जारी टिप्पणियों पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
भारत का लगातार रुख रहा है कि जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न अंग है और इस विषय पर किसी बाहरी संगठन का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है। वहीं, पाकिस्तान इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है। दोनों देशों के बीच जम्मू-कश्मीर लंबे समय से एक प्रमुख विवाद का विषय बना हुआ है।
भारत की प्रतिक्रिया के क्या हैं कूटनीतिक मायने?
OIC के प्रस्तावों पर भारत की प्रतिक्रिया उसकी क्षेत्रीय संप्रभुता और विदेश नीति से जुड़े स्थापित रुख को दर्शाती है।
भारत ने एक ओर पाकिस्तान के आरोपों को खारिज किया है, तो दूसरी ओर OIC के सदस्य देशों से संगठन के भीतर सुधार और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की अपेक्षा जताई है।
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