बॉम्बे हाईकोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी द्वारा समाचार पत्र समूह ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ (The Indian Express) के खिलाफ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए दो कथित मानहानिकारक पोस्ट को तत्काल हटाने का आदेश देने से फिलहाल इनकार कर दिया है। हालांकि, अदालत ने जेठमलानी की ओर से दिए गए इस आश्वासन को स्वीकार कर लिया है कि वह संबंधित ट्वीट्स को दोबारा प्रकाशित या रीपोस्ट नहीं करेंगे।
न्यायमूर्ति आरिफ एस. डॉक्टर की एकल पीठ ने 2 नवंबर 2026 को द इंडियन एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर मानहानि मुकदमे में अंतरिम आवेदन पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने माना कि इस प्रारंभिक चरण में ट्वीट्स को दोबारा प्रकाशित नहीं करने का आश्वासन समाचार पत्र समूह को पर्याप्त अंतरिम संरक्षण प्रदान करता है।
अदालत ने विवादित ट्वीट्स को हटाने के अनुरोध पर अंतिम निर्णय फिलहाल टाल दिया है। मामले में दोनों पक्षों को अपने विस्तृत जवाब और दस्तावेज दाखिल करने का अवसर दिया गया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर 2026 को होगी।
क्या है महेश जेठमलानी और द इंडियन एक्सप्रेस के बीच विवाद?
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक बहुत लंबा-चौड़ा पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि इंडियन एक्सप्रेस अखबार अपने संस्थापक के संकल्पों को भुलाकर कांग्रेस और उसकी सहयोगियों की कठपुतली बन चुका है। वकील महेश जेठमलानी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि उसने पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान इंडियन एक्सप्रेस को 81 लाख रुपये दिए।
And there comes the proof. Congress gave Indian Express INR 81 lakhs during the West Bengal elections. And then in the Karnataka elections. Much more than it gave any other newspaper singularly. Much more to tumble out soon.
It's not done, bro! It's just the tip of the iceberg. https://t.co/RaIt7EKrt1 pic.twitter.com/G6tZ9j3n6E
— Mahesh Jethmalani (@JethmalaniM) September 28, 2026
उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस, उसके इतिहास और उसकी रिपोर्टिंग में कथित तौर पर आए बदलाव को लेकर एक लंबा-चौड़ा पोस्ट किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस रामनाथ गोयनका ने अखबार को नेहरू-गांधी परिवार की कथित तानाशाही वाली सोच के खिलाफ खड़ा किया था, सर्कुलेशन घटने के साथ ही वह सोनिया गांधी, उनके परिवार और सहयोगियों के हाथों की कठपुतली बन गया है।
यूपीए सरकार के दौरान की रिपोर्टिंग पर भी निशाना
- महेश जेठमलानी का आरोप है कि यूपीए सरकार के दौरान भी बड़े-बड़े घोटालों पर यह अखबार कभी आगे नहीं रहा और उस सरकार के समर्थन में लगा रहा।
- उनके मुताबिक जब 2012 घोटालों के बोझ से यूपीए सरकार लड़खड़ा रही थी, तब इस अखबार सेना की दो टुकड़ियों को तख्तापलट के लिए बढ़ने की कोशिश वाली झूठी खबर लगाई। उन्होंने इसे भारतीय सेना की साख तोड़ने का प्रयास भी बताया।
- जेठमलानी के मुताबिक बेशक इस तरह की रिपोर्ट बहुत ही अलोकप्रिय हो चुकी सरकार के प्रति सहानुभूति जुटाने के लिए दी गई।
Times have sadly changed. And circulation has dwindled, as it must when you lose your moral compass. The irrepressible Ramnath Goenka moulded the Indian Express into a bulwark against the autocratic DNA of the Nehru-Gandhi family.
When that dynasty sought to illegally…
— Mahesh Jethmalani (@JethmalaniM) September 27, 2026
इंडियन एक्सप्रेस ने कोर्ट से की थी ट्वीट हटाने की मांग
द इंडियन एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड ने महेश जेठमलानी और अन्य प्रतिवादियों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करते हुए विवादित सोशल मीडिया पोस्ट के कुछ हिस्सों को हटाने के लिए अंतरिम राहत मांगी थी। समाचार पत्र समूह का तर्क था कि संबंधित पोस्ट उसकी प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकते हैं।
मुकदमे में समाचार पत्र समूह ने अदालत से अनुरोध किया कि कथित मानहानिकारक सामग्री को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने का निर्देश दिया जाए। हालांकि, अदालत ने इस स्तर पर तत्काल हटाने का आदेश देने के बजाय दोनों पक्षों की दलीलों और प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों पर विस्तृत सुनवाई आवश्यक मानी।
जेठमलानी के वकील ने कहा- विवादित पोस्ट के बाद किए जा चुके हैं करीब 45 ट्वीट
सुनवाई के दौरान महेश जेठमलानी की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि विवादित पोस्ट प्रकाशित किए जाने के बाद उनके मुवक्किल लगभग 45 अन्य ट्वीट कर चुके हैं।
बचाव पक्ष के अनुसार, नए ट्वीट्स की वजह से विवादित पोस्ट अब उनके X अकाउंट पर तुरंत दिखाई नहीं देते। उन्हें देखने के लिए उपयोगकर्ता को काफी नीचे तक स्क्रॉल करना पड़ता है। इस दलील के जरिए बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष यह स्थिति रखी कि संबंधित पोस्ट अब अकाउंट पर प्रमुखता से दिखाई नहीं दे रहे हैं।
हालांकि, द इंडियन एक्सप्रेस के वकील ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि जेठमलानी भविष्य में इन ट्वीट्स को दोबारा पोस्ट या रीट्वीट कर सकते हैं। समाचार पत्र समूह ने इसी आशंका को देखते हुए अदालत से अंतरिम संरक्षण की मांग की।
दोबारा ट्वीट नहीं करने का आश्वासन, हाईकोर्ट ने किया स्वीकार
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति आरिफ एस. डॉक्टर ने महेश जेठमलानी के वकील से पूछा कि क्या उनके मुवक्किल विवादित ट्वीट्स को दोबारा प्रकाशित करने वाले हैं या भविष्य में ऐसा करने की संभावना है। इस पर जेठमलानी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अंध्यारुजिना ने अपने मुवक्किल के निर्देश पर अदालत को बताया कि संबंधित ट्वीट्स को दोबारा प्रकाशित नहीं किया जाएगा। अदालत ने इस बयान को स्वीकार करते हुए आदेश में दर्ज किया।
न्यायमूर्ति डॉक्टर ने कहा कि प्रतिवादी की ओर से ट्वीट्स को दोबारा प्रकाशित नहीं करने का आश्वासन इस प्रारंभिक अंतरिम चरण में वादी को पर्याप्त संरक्षण प्रदान करता है। इस प्रकार अदालत ने तत्काल ट्वीट हटाने का निर्देश जारी किए बिना ही पुनर्प्रकाशन नहीं करने के आश्वासन को रिकॉर्ड पर ले लिया।
ट्वीट्स हटाने पर फैसला क्यों टाला गया?
द इंडियन एक्सप्रेस ने विवादित पोस्ट के कुछ चिह्नित हिस्सों को हटाने की मांग भी की थी। हालांकि, महेश जेठमलानी की ओर से अदालत को बताया गया कि वह अपने ट्वीट्स के समर्थन में सामग्री और दस्तावेज रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करना चाहते हैं।
बचाव पक्ष ने कहा कि संबंधित आरोपों के औचित्य को स्पष्ट करने के लिए विस्तृत हलफनामा दाखिल किया जाएगा। न्यायमूर्ति आरिफ एस. डॉक्टर ने माना कि ट्वीट्स को हटाने के अनुरोध पर निर्णय लेने के लिए विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता होगी। अदालत के अनुसार, इस दौरान बचाव पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले औचित्य संबंधी तर्कों और मुकदमे की पोषणीयता (Maintainability) पर भी विचार करना होगा।
यही कारण है कि अदालत ने अंतरिम आवेदन पर अंतिम विचार दोनों पक्षों की लिखित दलीलें और आवश्यक दस्तावेज दाखिल होने तक स्थगित कर दिया।
20 नवंबर तक जवाब, 25 नवंबर तक प्रत्युत्तर दाखिल करने की अनुमति
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मामले में आगे की सुनवाई से पहले दोनों पक्षों को अपने लिखित जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है। अदालत के आदेश के अनुसार, महेश जेठमलानी और अन्य प्रतिवादियों को 20 नवंबर 2026 तक अपना विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने की अनुमति दी गई है।
इसके बाद द इंडियन एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड आवश्यकता होने पर 25 नवंबर 2026 तक प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल कर सकता है। इन दस्तावेजों के माध्यम से दोनों पक्ष अपने तर्क, साक्ष्य और कानूनी आधार अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर सकेंगे।
27 नवंबर को बॉम्बे हाईकोर्ट में अगली सुनवाई
बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर 2026 के लिए निर्धारित की है। अगली सुनवाई में विवादित ट्वीट्स को हटाने की अंतरिम मांग, बचाव पक्ष की ओर से पेश किए जाने वाले औचित्य संबंधी तर्क और मुकदमे की पोषणीयता जैसे मुद्दों पर आगे विचार हो सकता है।
फिलहाल अदालत ने महेश जेठमलानी के विवादित ट्वीट्स को तत्काल हटाने का आदेश नहीं दिया है, लेकिन उन्हें दोबारा प्रकाशित नहीं करने का आश्वासन स्वीकार कर लिया है।
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