Supreme Court of India ने I-PAC रेड विवाद में सुनवाई के दौरान Mamata Banerjee के व्यवहार को लेकर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यदि कोई मुख्यमंत्री केंद्रीय एजेंसी की जांच में हस्तक्षेप करता है, तो इसे केवल केंद्र और राज्य के बीच राजनीतिक विवाद नहीं माना जा सकता, बल्कि यह कानून के राज और संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में लोकतांत्रिक व्यवस्था पर खतरा उत्पन्न होता है। मामले में केंद्रीय एजेंसी Enforcement Directorate (ED) ने आरोप लगाया था कि जांच के दौरान उनके काम में बाधा डाली गई, जो उनकी कानूनी जिम्मेदारी में रुकावट है।
राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि ED एक सरकारी विभाग है, न कि कोई व्यक्ति, इसलिए वह अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर नहीं कर सकता। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ED के अधिकारी भी भारतीय नागरिक हैं और यदि उन्हें डराया-धमकाया जाता है या उनके कार्य में बाधा डाली जाती है, तो यह उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
Justice Prashant Kumar Mishra की अगुवाई वाली पीठ ने राज्य सरकार के इस तर्क पर कड़े सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि जब कोई संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति सक्रिय जांच स्थल पर पहुंचकर हस्तक्षेप करता है, तो यह जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
यह मामला अब कानून के शासन, संस्थाओं की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
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