पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला जब राज्य की आपराधिक जांच विभाग (CID) की टीम पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास और उसके सामने मौजूद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के केंद्रीय कार्यालय पहुंच गई। विधानसभा फर्जी हस्ताक्षर मामले की जांच के सिलसिले में हुई इस कार्रवाई ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है।
जानकारी के अनुसार, करीब 17 CID अधिकारियों और कोलकाता पुलिस के जवानों ने इस हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन में हिस्सा लिया। जांच एजेंसी को सूचना मिली थी कि TMC के राष्ट्रीय महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी कथित तौर पर परिसर में मौजूद हैं।
अभिषेक बनर्जी की तलाश में पहुंची CID
सूत्रों के मुताबिक, CID की टीम अभिषेक बनर्जी से पूछताछ करना चाहती थी। एजेंसी को खुफिया इनपुट मिले थे कि वे कालीघाट स्थित पार्टी कार्यालय में मौजूद हैं। हालांकि, मौके पर पहुंचने के बाद अधिकारियों को बताया गया कि अभिषेक वहां मौजूद नहीं हैं।
घटना के समय ममता बनर्जी दिल्ली दौरे पर थीं और उनकी वापसी शाम तक होने की संभावना थी। उनकी वापसी से पहले ही जांच एजेंसी ने कार्रवाई तेज कर दी।
मुख्य गेट पर हुआ तीखा विवाद
CID अधिकारियों को आवास के मुख्य प्रवेश द्वार पर TMC स्टाफ के विरोध का सामना करना पड़ा। दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक बहस और नोकझोंक चली।
स्टाफ ने अधिकारियों को अंदर प्रवेश की अनुमति देने से इनकार करते हुए कहा कि संबंधित व्यक्ति परिसर में मौजूद नहीं हैं और उनकी अनुपस्थिति में तलाशी की अनुमति नहीं दी जा सकती।
दूसरी ओर CID अधिकारियों ने कहा कि जांच के लिए परिसर की तलाशी आवश्यक है और जांच में बाधा डालना गंभीर मामला हो सकता है।
फर्जी हस्ताक्षर मामले से जुड़ा है पूरा विवाद
CID सूत्रों के अनुसार, जिस कथित बैठक में विधानसभा से जुड़े फर्जी हस्ताक्षर किए जाने का आरोप है, वह इसी परिसर में आयोजित हुई थी। इसी कारण यह स्थान जांच एजेंसी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जांच एजेंसी का दावा है कि मामले से जुड़े कुछ अहम तथ्य और दस्तावेज इसी परिसर से जुड़े हो सकते हैं।
अभिषेक बनर्जी को जारी हुआ था तीसरा नोटिस
इससे पहले CID ने अभिषेक बनर्जी को तीसरा नोटिस जारी करते हुए मंगलवार शाम 5 बजे तक भवानी भवन स्थित मुख्यालय में उपस्थित होने को कहा था।
बताया जा रहा है कि अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता हाई कोर्ट में निर्धारित सुनवाई का हवाला देते हुए अतिरिक्त समय मांगा था, लेकिन जांच एजेंसी ने यह अनुरोध स्वीकार नहीं किया।
लगातार तीन समन जारी होने के बाद अब CID की यह कार्रवाई राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बंगाल की राजनीति में बढ़ा सियासी तापमान
CID की इस कार्रवाई के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। विपक्ष इसे कानून के दायरे में चल रही जांच बता रहा है, जबकि TMC समर्थक इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई करार दे रहे हैं।
फिलहाल पूरे मामले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं और आने वाले दिनों में इस जांच से जुड़े नए खुलासे सामने आने की संभावना है।
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