मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने ईरान के साथ व्यापार को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। पाकिस्तान ने ईरान के लिए छह नए व्यापार मार्ग खोल दिए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच सामान की आवाजाही आसान हो जाएगी।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नाकाबंदी लागू की गई है, जिससे ईरान के व्यापार पर असर पड़ा है।
बंदरगाहों पर फंसे कंटेनरों को मिलेगी राहत
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के लिए भेजे जाने वाले हजारों कंटेनर पाकिस्तान के बंदरगाहों—ग्वादर और कराची/पोर्ट कासिम—पर फंसे हुए थे। इससे व्यापार प्रभावित हो रहा था और कारोबारी परेशान थे।
अब नए मार्गों के खुलने से यह सामान आसानी से ईरान तक पहुँच सकेगा।
पाकिस्तान ने खोले ये 6 व्यापार मार्ग
पाकिस्तान ने जिन प्रमुख मार्गों को चालू किया है, उनमें शामिल हैं:
- ग्वादर से गब्द
- कराची/पोर्ट कासिम से लियारी, ओरमारा, पसनी होकर गब्द
- कराची/पोर्ट कासिम से खुजदार, दलबंदिन होकर ताफ्तान
- ग्वादर से तुर्बत, होशाब, पंजगुर, नाग, बेसिमा, क्वेटा/लाकपास होकर ताफ्तान
- ग्वादर से लियारी, खुजदार, क्वेटा/लाकपास होकर ताफ्तान
- कराची/पोर्ट कासिम से ग्वादर होकर गब्द
इन मार्गों के जरिए पाकिस्तान के प्रमुख बंदरगाह सीधे ईरान सीमा से जुड़ गए हैं।
Trump admin, you have a problem. Your good friend Pakistan appears to have just opened six overland links to Iran, helping the regime bypass your counter-blockade in the Strait of Hormuz. This will help Iran continue to resist US pressure. Islamabad double deals America…AGAIN! pic.twitter.com/gbNZeuQy0G
— Derek J. Grossman (@DerekJGrossman) April 29, 2026
समय और लागत में कमी
खासतौर पर ग्वादर-गब्द मार्ग को सबसे अहम माना जा रहा है। पहले जहाँ इस रूट पर 18 घंटे लगते थे, अब यह दूरी लगभग 3 घंटे में पूरी हो सकेगी। इससे व्यापार तेज होगा और लागत में भी कमी आएगी।
अमेरिकी रणनीति पर असर?
पाकिस्तान के इस फैसले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि इससे अमेरिका की ईरान पर बनाई गई रणनीति कमजोर पड़ सकती है।
पाकिस्तान ने तीसरे देशों के सामान को भी अपने रास्ते से ईरान भेजने की अनुमति दे दी है, जिससे अमेरिकी नाकाबंदी का असर कम हो सकता है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिकी प्रतिबंधों में एक “कानूनी रास्ता” खोल सकता है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान अब क्षेत्रीय रणनीति में संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
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