रूस और लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। रूस की संघीय सुरक्षा एजेंसी (FSB) ने Telegram के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पावेल दुरोव पर आतंकवाद को बढ़ावा देने और कट्टरपंथी गतिविधियों को सुविधा उपलब्ध कराने के गंभीर आरोप लगाए हैं। रूसी अधिकारियों ने उनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और उन्हें इंटरनेशनल वॉन्टेड लिस्ट में भी शामिल कर लिया गया है।
रूसी कानून के तहत यदि इन आरोपों में पावेल दुरोव दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। इस कार्रवाई के बाद रूस में Telegram के भविष्य को लेकर नई बहस शुरू हो गई है और प्लेटफॉर्म पर संभावित पूर्ण प्रतिबंध की अटकलें भी तेज हो गई हैं।
Telegram पर आतंकवादी और यूक्रेनी एजेंसियों की मदद का आरोप
FSB का आरोप है कि Telegram प्रशासन को कई बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद ऐसे चैनलों, चैट समूहों और बॉट्स को नहीं हटाया गया जिनका इस्तेमाल यूक्रेनी खुफिया एजेंसियां, आतंकवादी संगठन और कट्टरपंथी समूह रूस के भीतर तोड़फोड़, आतंकी हमलों, सामूहिक हिंसा और साइबर धोखाधड़ी जैसी गतिविधियों के समन्वय के लिए कर रहे थे।
रूसी एजेंसी का दावा है कि इन गतिविधियों के कारण कई लोगों की जान भी गई है। FSB ने यह भी आरोप लगाया कि Telegram पर मौजूद एक लोकप्रिय डेटिंग चैटबॉट का इस्तेमाल यूक्रेनी सुरक्षा एजेंसियों ने रूस के युवाओं को फंसाने, भर्ती करने और उन्हें तोड़फोड़ व आतंकी गतिविधियों के लिए प्रेरित करने में किया।
एजेंसी के अनुसार जुलाई 2025 से अब तक 12 से 22 वर्ष आयु वर्ग के 46 युवाओं को सरकारी संस्थानों पर हमले, आगजनी और अन्य गंभीर अपराधों के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है।
रूस में Telegram पर लगातार बढ़ रहा दबाव
Telegram रूस के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स में से एक है, लेकिन इसका सरकार के साथ टकराव कोई नया मामला नहीं है। वर्ष 2018 से 2020 के बीच रूस ने Telegram को ब्लॉक करने की कोशिश की थी, हालांकि यह प्रयास पूरी तरह सफल नहीं हो सका।
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस ने इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नियंत्रण और कड़ा कर दिया। Facebook, Instagram और X जैसे कई पश्चिमी प्लेटफॉर्म पहले ही प्रतिबंधित किए जा चुके हैं, जबकि YouTube की सेवाओं पर भी विभिन्न प्रकार की सीमाएं लागू हैं। Signal और Viber जैसे मैसेजिंग ऐप्स को भी ब्लॉक किया जा चुका है।
रूस वर्तमान में अपने सरकारी समर्थित मैसेजिंग ऐप ‘MAX’ को बढ़ावा दे रहा है। हालांकि आलोचकों का आरोप है कि यह प्लेटफॉर्म नागरिकों की निगरानी का माध्यम बन सकता है।
पावेल दुरोव ने लगाए थे निजता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमले के आरोप
पावेल दुरोव ने पहले भी दावा किया था कि रूसी अधिकारी Telegram पर नियंत्रण बढ़ाने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा निजता के अधिकार को कमजोर करने के उद्देश्य से उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं। उनका कहना था कि उन पर लगाए गए आरोप राजनीतिक दबाव बनाने का माध्यम हैं।
रूस छोड़ चुके हैं दुरोव, फ्रांस में भी हो चुकी है गिरफ्तारी
रूस में जन्मे पावेल दुरोव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म VKontakte (VK) की स्थापना की थी। बाद में सरकारी दबाव के बीच उन्होंने कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेच दी और रूस छोड़ दिया। वर्तमान में वे दुबई से Telegram का संचालन करते हैं। उनके पास फ्रांस और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की नागरिकता भी है।
दुरोव पहले भी कानूनी जांच का सामना कर चुके हैं। वर्ष 2024 में फ्रांस की राजधानी पेरिस में उन्हें इस आरोप में गिरफ्तार किया गया था कि Telegram का इस्तेमाल मादक पदार्थों की तस्करी, बाल यौन शोषण सामग्री के प्रसार और अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है तथा कंपनी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ पर्याप्त सहयोग नहीं कर रही थी।
हालांकि दुरोव ने सभी आरोपों से इनकार किया था और 2025 में कई महीने फ्रांस में बिताने के बाद दुबई लौट गए थे। उस समय रूस ने फ्रांस की कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण और चुनिंदा बताया था। अब रूस की ताजा कार्रवाई ने Telegram और उसके संस्थापक की कानूनी चुनौतियों को और बढ़ा दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रूस Telegram पर और कड़े प्रतिबंध लगाता है, तो इसका असर करोड़ों उपयोगकर्ताओं और वैश्विक डिजिटल संचार व्यवस्था पर पड़ सकता है।
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