उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में शिक्षा विभाग से जुड़े करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े ने प्रशासन और पुलिस महकमे को हिलाकर रख दिया है। जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय में तैनात एक चपरासी इल्हाम-उर-रहमान शम्सी पर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये निकालकर अपने करीबी लोगों के खातों में ट्रांसफर करने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले में पुलिस ने अब तक उसकी तीन बीवियों, रिश्तेदारों और कथित प्रेमिकाओं समेत कई लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
क्या है पूरा मामला?
शुक्रवार (1 मई 2026) को पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए इल्हाम शम्सी की दूसरी पत्नी अजारा खान, तीसरी पत्नी लुबना, साली फातिमा, सास नाहिद, रिश्तेदार आफिया खान और प्रेमिकाएं परवीन खातून व आशकारा परवीन को गिरफ्तार किया। इससे पहले फरवरी में उसकी पहली पत्नी अर्शी खातून को भी गिरफ्तार किया जा चुका था, जो फिलहाल जमानत पर बाहर है।
जांच में खुलासा हुआ है कि इन सभी के बैंक खातों में कई वर्षों के दौरान 8 करोड़ 15 लाख रुपये से अधिक की रकम ट्रांसफर की गई थी।
चपरासी से घोटाले का मास्टरमाइंड बनने तक
इल्हाम शम्सी मूल रूप से बीसलपुर इंटर कॉलेज में चपरासी के पद पर तैनात था। करीब आठ साल पहले उसने जुगाड़ के जरिए खुद को DIOS कार्यालय से अटैच करा लिया। धीरे-धीरे उसने वेतन बिल, सैलरी टोकन और ट्रेजरी से जुड़े कार्यों में दखल बनाना शुरू किया।
इसी दौरान उसने फर्जी शिक्षक, बाबू और ठेकेदारों के नाम पर सरकारी धन निकालने का नेटवर्क तैयार किया। जांच एजेंसियों के मुताबिक उसने फर्जी बेनेफिशियरी आईडी बनाकर अलग-अलग नामों से सरकारी रकम अपने करीबियों के खातों में ट्रांसफर करवाई।
53 बैंक खाते और 98 ट्रांजेक्शन
अब तक की जांच में कुल 53 संदिग्ध बैंक खातों की पहचान हुई है, जिनके जरिए करीब 98 ट्रांजेक्शन किए गए। इस पैसे का इस्तेमाल महंगे फ्लैट, जमीन खरीदने और लग्जरी लाइफस्टाइल पर किया गया।
पुलिस पूछताछ में चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई कि इल्हाम की तीनों बीवियां अलग-अलग शहरों में रह रही थीं। दूसरी पत्नी अजारा खान ने दावा किया कि उसे इल्हाम की अन्य शादियों की जानकारी तक नहीं थी।
बैंक मैनेजर की सतर्कता से खुला घोटाला
इस पूरे मामले का खुलासा फरवरी 2026 में हुआ, जब बैंक ऑफ बड़ौदा के एक मैनेजर ने पीलीभीत के जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह को पत्र लिखकर ट्रेजरी से एक निजी खाते में 1 करोड़ 15 लाख रुपये ट्रांसफर होने की जानकारी दी।
इसके बाद डीएम ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की, जिसमें शिक्षा विभाग में लंबे समय से चल रहे फर्जी वेतन भुगतान के खेल का पर्दाफाश हुआ।
अब तक की कार्रवाई
पुलिस ने अब तक 5 करोड़ 50 लाख रुपये से अधिक की रकम विभिन्न बैंक खातों में फ्रीज कर दी है। एडिशनल एसपी विक्रम दहिया के अनुसार, यह कार्रवाई अभी शुरुआती है और पूरे नेटवर्क की गहन जांच जारी है।
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