गुजरात के जामनगर में स्पेशल TADA कोर्ट ने बहुचर्चित गोसाबरा RDX लैंडिंग केस में 24 साल बाद ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। करीब 200 पन्नों के इस फैसले में कोर्ट ने 12 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 5 से 7 साल की सजा सुनाई, जबकि 17 आरोपियों को बरी कर दिया गया।
यह मामला 1993 के मुंबई बम धमाके 1993 से जुड़ा हुआ है, जिसकी साजिश जामनगर के बेदी इलाके में रची गई थी। जांच में सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का हाथ था, जिसके निर्देश पर हथियारों और RDX की तस्करी की गई थी।
इस केस की शुरुआत 1996 में हुई थी, जब जामनगर पुलिस ने 29 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। बाद में 2019 में 7 और आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई, जिसके बाद ट्रायल शुरू हुआ। लंबी न्यायिक प्रक्रिया, अलग-अलग अदालतों में याचिकाओं और अन्य कारणों से केस में देरी होती रही।
इस मामले में कुल 46 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज हुआ था, जिनमें से 11 की सुनवाई के दौरान मौत हो गई, जबकि 6 आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा बरी किया जा चुका है। शेष 29 आरोपियों में से कोर्ट ने 12 को दोषी पाया और सजा सुनाई।
जांच के दौरान 63 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जिनके आधार पर आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश किए गए। इस केस की जांच उस समय के आईपीएस अधिकारियों पी.के. झा, सतीश वर्मा और मनोज शशिधर ने की थी। सरकार की ओर से स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर तुषारभाई गोकानी ने केस की पैरवी की।
करीब 2500 पन्नों की चार्जशीट और दो दशकों से अधिक लंबी सुनवाई के बाद आए इस फैसले को देश के महत्वपूर्ण आतंकी मामलों में एक बड़ा न्यायिक निर्णय माना जा रहा है।
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