पश्चिम बंगाल में भाजपा नेता Suvendu Adhikari के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद राज्य की राजनीतिक हिंसा एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गई है।
2026 विधानसभा चुनावों के बाद लगातार सामने आ रही हिंसक घटनाओं के बीच अब 2021 के चर्चित देवाशीष आचार्य मामले को भी फिर से याद किया जा रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि बंगाल में राजनीतिक प्रतिशोध और हिंसा का माहौल लंबे समय से बना हुआ है।
कौन थे देवाशीष आचार्य?
Debashish Acharya वही व्यक्ति थे जिन्होंने वर्ष 2015 में Abhishek Banerjee को कथित तौर पर थप्पड़ मारा था।
घटना के तुरंत बाद कथित रूप से तृणमूल कांग्रेस समर्थकों ने उनकी पिटाई की थी। बाद में पुलिस ने देवाशीष आचार्य को हत्या की कोशिश सहित कई गंभीर धाराओं में गिरफ्तार किया था।
अभिषेक बनर्जी का बयान भी बना था चर्चा का विषय
उस समय अभिषेक बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उन्होंने देवाशीष आचार्य को “माफ” कर दिया है और उनके खिलाफ नरमी बरतने की अपील की थी।
हालांकि घटना के बाद Subrata Mukherjee के बयान ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। उन्होंने भीड़ द्वारा की गई हिंसा को “प्रतिक्रिया” बताया था, जिसकी विपक्ष ने कड़ी आलोचना की थी।
2021 में रहस्यमयी हालात में हुई थी मौत
करीब छह साल बाद जून 2021 में देवाशीष आचार्य पूर्वी मिदनापुर में गंभीर रूप से घायल अवस्था में पाए गए थे।
रिपोर्ट्स के अनुसार:
- उन्हें देर रात तमलुक जिला अस्पताल में छोड़ दिया गया था
- कुछ अज्ञात लोग उन्हें अस्पताल लाए थे
- इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई
पुलिस जांच में यह भी सामने आया था कि गायब होने से पहले वह एक चाय की दुकान पर थे, जहां उन्हें एक फोन कॉल आया था। इसके बाद वह वहां से निकल गए और फिर लापता हो गए।
परिवार और BJP ने उठाए थे सवाल
देवाशीष आचार्य के परिवार ने उनकी मौत को हत्या बताया था। वहीं भाजपा नेताओं ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की थी।
हालांकि उस समय पुलिस ने मामले की जांच जारी रहने की बात कही थी।
चंद्रनाथ रथ हत्या के बाद फिर चर्चा में आया मामला
अब भाजपा नेता चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद पुराने राजनीतिक हिंसा के मामलों को फिर से उठाया जा रहा है।
भाजपा का आरोप है कि बंगाल में राजनीतिक विरोधियों को डराने, धमकाने और हिंसा के जरिए दबाने का एक “पुराना पैटर्न” रहा है।
दूसरी ओर All India Trinamool Congress ने इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी करार दिया है।
बंगाल की राजनीति में बढ़ता तनाव
West Bengal में चुनाव बाद लगातार हिंसा, हमलों और राजनीतिक टकराव की घटनाओं ने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में बंगाल की राजनीति और अधिक आक्रामक हो सकती है।
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