फ्रांस की सरकारी एजेंसी विगिनम (Viginum) ने चीन समर्थित एक बड़े डिजिटल प्रोपेगेंडा नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। जांच में खुलासा हुआ है कि 13 फर्जी न्यूज वेबसाइटों का एक संगठित नेटवर्क विभिन्न भाषाओं में चीन के पक्ष में प्रचार कर रहा था। फ्रांसीसी एजेंसी के अनुसार, ये वेबसाइटें सीधे चीन की सरकारी मीडिया संस्था और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के नियंत्रण वाले चैनल CGTN (चाइना ग्लोबल टेलीविजन नेटवर्क) से जुड़ी हुई थीं।
फ्रांसीसी अधिकारियों ने इस अभियान को ‘फॉन मियानजू’ (Fawn Mianju) नाम दिया है। इसका खुलासा 4 जून 2026 को किया गया। जांच के अनुसार, इस नेटवर्क का उद्देश्य पश्चिमी देशों और अफ्रीका के फ्रेंच भाषी क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं की सोच और जनमत को प्रभावित करना था।
स्वतंत्र मीडिया बनकर फैला रहा था चीन समर्थक नैरेटिव
विगिनम की रिपोर्ट के मुताबिक, इन वेबसाइटों को वर्ष 2025 में लॉन्च किया गया था और इन्हें स्वतंत्र एवं निष्पक्ष समाचार प्लेटफॉर्म के रूप में प्रस्तुत किया गया। नेटवर्क में फ्रेंच भाषा की ‘Actu Méridien’, स्पेनिश की ‘Amigo News’, अंग्रेजी और वियतनामी भाषा की कई वेबसाइटें शामिल थीं।
इन प्लेटफॉर्म्स पर लगातार ऐसी खबरें प्रकाशित की जा रही थीं जिनमें चीन को विमानन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), तकनीकी नवाचार और आर्थिक विकास के क्षेत्र में वैश्विक नेता के रूप में प्रस्तुत किया जाता था। साथ ही चीन को ‘ग्लोबल साउथ’ यानी विकासशील देशों का स्वाभाविक नेतृत्वकर्ता, पर्यावरण संरक्षण का समर्थक और यूरोपीय देशों के लिए बेहतर रणनीतिक साझेदार बताया जाता था।
उइगर मुद्दे पर फ्रांसीसी मीडिया को बनाया निशाना
जांच में सामने आया कि इन वेबसाइटों ने कई संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चीन के आधिकारिक रुख को बढ़ावा दिया। नेटवर्क पर प्रकाशित एक लेख में फ्रांस के सार्वजनिक टीवी चैनल France 2 की उस रिपोर्ट की आलोचना की गई थी, जिसमें चीन के शिनजियांग क्षेत्र में उइगर मुसलमानों के कथित उत्पीड़न और मानवाधिकार उल्लंघनों को उजागर किया गया था।
विश्लेषकों का कहना है कि इन लेखों का मकसद चीन की अंतरराष्ट्रीय छवि को बेहतर बनाना और उसके खिलाफ उठने वाली आलोचनाओं को कमजोर करना था।
AI और LLM तकनीक से तैयार किए जा रहे थे हजारों लेख
फ्रांसीसी जांच एजेंसी के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क अत्यधिक ऑटोमेटेड तरीके से संचालित किया जा रहा था। वर्ष 2025 के अंत से CGTN द्वारा प्रकाशित करीब 3,000 लेखों में से 2,300 से अधिक लेखों को कुछ बदलावों के साथ बेहद कम समय में इन वेबसाइटों पर दोबारा प्रकाशित किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, इसके लिए बड़े भाषा मॉडल (LLMs) और AI आधारित कंटेंट जनरेशन टूल्स का उपयोग किया गया। इन टूल्स की मदद से लेखों को युवाओं के लिए अधिक आकर्षक शैली में तैयार किया जाता था।
भाषाई विश्लेषण में पाया गया कि विभिन्न वेबसाइटों पर प्रकाशित लेखों में वाक्यों की संरचना, लंबाई और विराम चिह्नों का उपयोग असामान्य रूप से समान था, जो AI द्वारा तैयार सामग्री होने के मजबूत संकेत देते हैं।
बीजिंग से जुड़ा मिला तकनीकी नेटवर्क
तकनीकी जांच के दौरान कई अहम डिजिटल सबूत भी सामने आए। विगिनम के अनुसार, इन वेबसाइटों के डोमेन बीजिंग में पंजीकृत थे और इन्हें अलीबाबा क्लाउड के सर्वरों पर होस्ट किया गया था।
जांचकर्ताओं ने पाया कि नेटवर्क कई सर्वरों और पेड SEO टूल्स की मदद से संचालित किया जा रहा था, जिससे यह संकेत मिलता है कि इसके पीछे पर्याप्त वित्तीय और तकनीकी संसाधन लगाए गए थे।
सबसे महत्वपूर्ण खुलासा तब हुआ जब ‘Actu Méridien’ और उससे जुड़ी वेबसाइटों के एक एडमिनिस्ट्रेटर ने गलती से कुछ डिजिटल निशान छोड़ दिए। जांच में उसकी पहचान CGTN Digital के एक वरिष्ठ प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में हुई। उसके सार्वजनिक GitHub प्रोफाइल में AI और LLM आधारित ऑटोमेटेड कंटेंट सिस्टम पर काम करने के संकेत भी मिले।
89 देशों में चलाया गया सोशल मीडिया अभियान
रिपोर्ट के अनुसार, यह नेटवर्क केवल वेबसाइटों तक सीमित नहीं था। इससे जुड़े अकाउंट फेसबुक, थ्रेड्स और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी सक्रिय थे।
इन अकाउंट्स ने लगभग 89 देशों के उपयोगकर्ताओं को लक्ष्य बनाकर विज्ञापन अभियान चलाए। हालांकि, व्यापक संसाधनों और तकनीकी प्रयासों के बावजूद इस अभियान का वास्तविक प्रभाव सीमित रहा।
ज्यादातर रिपोर्ट्स को 15,000 से अधिक व्यूज नहीं मिले और बड़ी संख्या में इंटरैक्शन संदिग्ध या नकली प्रतीत हुए। जांच में बुरुंडी जैसे देशों से असामान्य गतिविधियां दर्ज की गईं, जिससे फर्जी एंगेजमेंट की आशंका और मजबूत हुई।
फ्रांस ने बताया ‘असफल प्रोपेगेंडा ऑपरेशन’
फ्रांसीसी विश्लेषकों ने इस पूरे अभियान को ‘ऑपरेशनल फेल्योर’ यानी असफल सूचना अभियान करार दिया है। रिपोर्ट में कहा गया कि नेटवर्क से जुड़ी कई वेबसाइटें, जिनमें Actu Méridien भी शामिल है, पिछले कई महीनों से निष्क्रिय या बंद पड़ी हैं।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भविष्य में AI आधारित दुष्प्रचार अभियानों के बढ़ते खतरे की ओर संकेत करता है।
ग्राफिका की रिपोर्ट के बाद शुरू हुई थी जांच
यह खुलासा अमेरिकी साइबर सुरक्षा कंपनी Graphika की 2025 की रिपोर्ट के बाद सामने आया है। ग्राफिका ने सबसे पहले इन 13 में से 11 वेबसाइटों और उनसे जुड़े सोशल मीडिया नेटवर्क की पहचान की थी।
इसके बाद विगिनम ने कई महीनों तक तकनीकी और डिजिटल फॉरेंसिक जांच की। अब पहली बार CGTN और इन फर्जी वेबसाइटों के बीच समन्वय के ठोस प्रमाण सामने आए हैं।
AI आधारित प्रचार अभियानों पर बढ़ी वैश्विक चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर सूचना युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। चीन सहित कई देश अब AI तकनीकों, ऑटोमेटेड कंटेंट सिस्टम और सोशल मीडिया नेटवर्क का उपयोग कर अंतरराष्ट्रीय जनमत को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
फ्रांस की रिपोर्ट इस बात की भी चेतावनी देती है कि आने वाले वर्षों में AI आधारित दुष्प्रचार अभियान लोकतांत्रिक देशों, मीडिया संस्थानों और युवाओं को प्रभावित करने का बड़ा माध्यम बन सकते हैं।
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