कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार रहीं मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च अदालत ने उनके राज्यसभा नामांकन को रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद संविधान के अनुच्छेद 329 के तहत न्यायालय सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
हालाँकि, अदालत ने मीनाक्षी नटराजन को चुनाव परिणाम के बाद संबंधित मंच पर चुनाव याचिका (Election Petition) दायर करने की स्वतंत्रता दी है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल किए गए मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र को 9 जून 2026 को रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने खारिज कर दिया था।
नामांकन रद्द करने के पीछे आरोप यह था कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने चुनावी हलफनामे में तेलंगाना की एक अदालत में लंबित निजी शिकायत (Private Complaint) की जानकारी नहीं दी थी। निर्वाचन अधिकारियों का मानना था कि उम्मीदवार को अपने खिलाफ दर्ज मामलों की पूरी जानकारी शपथपत्र में देनी चाहिए।
नामांकन खारिज होने के बाद मीनाक्षी नटराजन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और निर्णय को चुनौती दी।
अभिषेक मनु सिंघवी ने क्या दलील दी?
सुप्रीम कोर्ट में मीनाक्षी नटराजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा। उन्होंने तर्क दिया कि चुनावी नियमों के अनुसार केवल उन्हीं आपराधिक मामलों की जानकारी देना अनिवार्य है, जिनमें अदालत द्वारा आरोप तय (Charges Framed) किए जा चुके हों।
सिंघवी ने कहा कि जिस निजी शिकायत का हवाला देकर नामांकन रद्द किया गया, उसमें अभी आरोप तय नहीं हुए थे। इसलिए उसका उल्लेख न करना नियमों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।
हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस तकनीकी दलील को स्वीकार नहीं किया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस ए.एस. चंदुलकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि संविधान का अनुच्छेद 329 चुनावी प्रक्रिया में न्यायालय के हस्तक्षेप को सीमित करता है।
पीठ ने कहा कि जब चुनाव प्रक्रिया जारी हो, तब अदालतें रिट याचिकाओं के माध्यम से चुनावी निर्णयों में सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं। यदि ऐसा किया गया तो यह संविधान की मूल चुनावी व्यवस्था के विपरीत होगा।
अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में चुनाव पूरा होने के बाद चुनाव याचिका दाखिल करना ही वैधानिक उपाय है।
अब आगे क्या विकल्प?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मीनाक्षी नटराजन के पास अब चुनाव न्यायाधिकरण या संबंधित कानूनी मंच पर चुनाव याचिका दायर करने का विकल्प बचा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वह चुनावी प्रक्रिया में किसी अनियमितता या नामांकन रद्द किए जाने को अवैध साबित करना चाहती हैं, तो उन्हें चुनाव कानूनों के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।
राजनीतिक और कानूनी महत्व
यह फैसला चुनावी प्रक्रिया में न्यायपालिका की सीमित भूमिका और संविधान के अनुच्छेद 329 की अहमियत को एक बार फिर रेखांकित करता है। अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि चुनाव संबंधी विवादों के लिए निर्धारित कानूनी तंत्र का ही उपयोग किया जाना चाहिए।
फिलहाल कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा नामांकन विवाद में तत्काल राहत नहीं मिली है और अब उनकी अगली कानूनी रणनीति पर सबकी नजर रहेगी।
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