अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक बड़ा खुलासा सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी सेना ईरान में जमीनी सैन्य अभियान (Ground Operation) की तैयारी कर रही थी और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े संवेदनशील ठिकानों पर कब्जा करने की योजना पर काम चल रहा था। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संभावित ऑपरेशन को फिलहाल रोक दिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सेना के शीर्ष अधिकारियों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को निष्क्रिय करने और समृद्ध यूरेनियम (Enriched Uranium) पर नियंत्रण हासिल करने के लिए एक बड़े सैन्य अभियान की रणनीति तैयार की थी। यह योजना इतनी संवेदनशील थी कि जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने फ्लोरिडा स्थित अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) मुख्यालय का विशेष दौरा भी किया था।
ईरान में सैनिक भेजने के करीब पहुंच चुका था अमेरिका
सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी सैन्य नेतृत्व ईरान के अंदर विशेष सैनिकों की तैनाती और परमाणु प्रतिष्ठानों तक पहुंचने के विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहा था। योजना का मुख्य उद्देश्य उन संसाधनों और तकनीकों को जब्त करना था, जिनका उपयोग परमाणु हथियार विकसित करने में किया जा सकता है।
बताया जा रहा है कि ईरान के इस्फहान, नतांज़ और फोर्डो जैसे परमाणु केंद्र अमेरिकी रणनीति के प्रमुख लक्ष्य थे। ये सभी प्रतिष्ठान भूमिगत सुरंगों और अत्यधिक सुरक्षित संरचनाओं में स्थित हैं।
ट्रंप ने क्यों रोका सैन्य अभियान?
सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जब इस सैन्य योजना की विस्तृत जानकारी दी गई तो उन्होंने तत्काल इसे रोकने का निर्देश दिया। ट्रंप का मानना था कि यदि अमेरिका ईरान में जमीनी अभियान शुरू करता है तो इससे व्यापक युद्ध छिड़ सकता है।
राष्ट्रपति को आशंका थी कि ईरान की ओर से बड़ा सैन्य जवाबी हमला हो सकता है, जिससे अमेरिकी सैनिकों की भारी क्षति हो सकती है। इसके अलावा मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और तेल बाजार पर गंभीर असर पड़ सकता है।
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका अभी कूटनीतिक समाधान और संभावित समझौते को प्राथमिकता देना चाहता है।
न्यूक्लियर डील को लेकर जारी है खींचतान
हाल के दिनों में ट्रंप लगातार यह दावा करते रहे हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित समझौते की दिशा में प्रगति हो रही है। उनका कहना है कि दोनों पक्ष होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सुरक्षित रखने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण को लेकर बातचीत कर रहे हैं।
हालांकि, सूत्रों का दावा है कि ईरान अभी भी समझौते की कई शर्तों पर स्पष्ट सहमति देने से बच रहा है। इसी वजह से वॉशिंगटन में चिंता बनी हुई है।
अमेरिकी एजेंसियों की चेतावनी
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) से जुड़े विशेषज्ञों ने भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता जताई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम का भंडार भविष्य में बड़े खतरे का कारण बन सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान राजनीतिक निर्णय लेता है तो उसके मौजूदा संसाधन कई परमाणु हथियारों के निर्माण में इस्तेमाल हो सकते हैं। यही वजह है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
क्या फिर शुरू हो सकता है सैन्य अभियान?
फिलहाल अमेरिकी प्रशासन ने जमीनी सैन्य अभियान पर विराम लगा दिया है, लेकिन इसे पूरी तरह रद्द नहीं माना जा रहा। सूत्रों के अनुसार, यदि अमेरिका-ईरान वार्ता विफल होती है या परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई नई चिंता सामने आती है तो सैन्य विकल्प फिर से चर्चा में आ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली बातचीत इस पूरे संकट की दिशा तय करेगी। फिलहाल दुनिया की निगाहें संभावित शांति समझौते और मध्य पूर्व में स्थिरता पर टिकी हुई हैं।
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