देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 के पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 गिरफ्तार आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। यह चार्जशीट दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश की गई है। अब इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई पेपर लीक मामलों के लिए गठित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में की जाएगी।
CBI का दावा है कि उसने पेपर लीक की पूरी साजिश, प्रश्नपत्र के स्रोत और इसे अभ्यर्थियों तक पहुँचाने वाले नेटवर्क का खुलासा कर दिया है। एजेंसी के अनुसार, मामले में शामिल सभी 13 आरोपित वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि जांच अभी भी जारी है और आगे और गिरफ्तारियां या कार्रवाई संभव है।
360 गवाहों और 422 दस्तावेजों के आधार पर तैयार हुई चार्जशीट
CBI की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दाखिल चार्जशीट में 360 गवाहों के बयान, 422 महत्वपूर्ण दस्तावेज और 43 भौतिक साक्ष्य शामिल किए गए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट, हस्तलेखन विशेषज्ञों की राय और विषय विशेषज्ञों के विश्लेषण से यह पुष्टि हुई है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र का अवैध रूप से प्रसार किया गया था।
इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 और पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024 की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। CBI ने संकेत दिए हैं कि फॉरेंसिक विश्लेषण और जांच के दौरान सामने आने वाले नए तथ्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।
NTA विशेषज्ञों, कोचिंग संचालकों और बिचौलियों पर आरोप
चार्जशीट में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से जुड़े बायोलॉजी विशेषज्ञ मनीषा मंधारे, केमिस्ट्री विशेषज्ञ प्रह्लाद विठ्ठलराव कुलकर्णी और फिजिक्स विशेषज्ञ मनीषा संजय हवालदार को आरोपित बनाया गया है।
इसके अलावा यश यादव, मंगलिलाल बिवाल, दिनेश बिवाल, विकास बिवाल, शुभम माधुकर खैरनार, धनंजय निवृत्ति लोखंडे, मनीषा संजय वाघमारे और डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे के नाम भी चार्जशीट में शामिल हैं।
जांच एजेंसी ने लातूर स्थित RCC कोचिंग इंस्टीट्यूट के संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर और पुणे के APMA कोचिंग इंस्टीट्यूट से जुड़े फिजिक्स फैकल्टी एवं COO तेजस हर्षदकुमार शाह को भी आरोपी बनाया है। CBI का आरोप है कि इन सभी ने पेपर लीक की साजिश में अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं और प्रश्नपत्र को अभ्यर्थियों तक पहुँचाने में मदद की।
92 ठिकानों पर छापेमारी, बैंक खाते और लॉकर फ्रीज
CBI के अनुसार, 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में पेपर लीक की शिकायत मिलने के बाद केंद्र सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने 12 मई 2026 को जांच एजेंसी को मामला सौंपा था। उसी दिन FIR दर्ज कर जांच शुरू की गई।
मामले की जांच के लिए 72 अधिकारियों और 8 साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की विशेष टीमें गठित की गईं। जांच के दौरान महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली समेत कई राज्यों में 92 स्थानों पर छापेमारी की गई। इस दौरान मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल डिवाइस और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए।
CBI ने आरोपितों के बैंक खाते, बैंक लॉकर और एक डीमैट खाते को भी फ्रीज कर दिया है। एजेंसी का दावा है कि पेपर लीक से जुड़े पूरे नेटवर्क की पहचान कर ली गई है और मामले की जांच अभी जारी है।
चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई होगी, जहां प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों, गवाहों और फॉरेंसिक रिपोर्टों के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इस मामले को देश की सबसे बड़ी परीक्षा सुरक्षा चुनौतियों में से एक माना जा रहा है, जिस पर लाखों छात्रों और अभिभावकों की नजरें टिकी हुई हैं।
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