फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित G7 Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक मंच से अंतरराष्ट्रीय विश्वास, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक साझेदारी को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में पश्चिम एशिया में तनाव के दौरान भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा भी उठाया और दुनिया के विकसित देशों से सुरक्षित समुद्री मार्ग सुनिश्चित करने की अपील की।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज की दुनिया पहले से कहीं अधिक एक-दूसरे से जुड़ी हुई है। किसी भी देश की ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि केवल उसकी सीमाओं तक सीमित नहीं रह सकती। वैश्विक सप्लाई चेन, डेटा, पूंजी, तकनीक और मानव संसाधन सभी देशों को आपस में जोड़ते हैं। ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय साझेदारी का महत्व बढ़ जाता है, लेकिन इन साझेदारियों की सफलता का आधार केवल और केवल विश्वास होता है।
Shared my thoughts at the Outreach Session on ‘Forging New Partnerships and Rebuilding International Solidarity’ at the G7 Summit in Evian. In a world that is getting more interconnected and interdependent than ever before, this subject becomes all the more vital. But,… pic.twitter.com/NjNddWGtFF
— Narendra Modi (@narendramodi) June 16, 2026
G7 मंच से PM मोदी का बड़ा संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के प्रसिद्ध कथन “Trust But Verify” का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सिद्धांत आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यता और संस्कृति सदैव “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” के सिद्धांत पर आधारित रही है और भारत हमेशा पूरे विश्व को एक परिवार के रूप में देखता है।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में सबसे बड़ा रणनीतिक संसाधन (Strategic Asset) कोई खनिज, तकनीक या बाजार नहीं, बल्कि आपसी विश्वास है। दुनिया वर्तमान में संसाधनों की कमी से नहीं बल्कि भरोसे की कमी से जूझ रही है। यदि वैश्विक साझेदारियों को सफल बनाना है तो विश्वास को केंद्र में रखना होगा।
We, in India, view the world as one family.
Our experience shows that development is most effective when it is connected to the aspirations of people.
This principle also forms the basis of our international partnerships like the International Solar Alliance, Coalition for…
— Narendra Modi (@narendramodi) June 16, 2026
भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा उठा
G7 समिट के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निकट बैठे प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और उसके वैश्विक प्रभावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के प्रयासों का स्वागत करता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि क्षेत्रीय संघर्षों और युद्धों के कारण कई मित्र देशों को भारी जान-माल का नुकसान उठाना पड़ा है। विशेष रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में उत्पन्न बाधाओं ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है।
उन्होंने भारतीय नाविकों की मौत का उल्लेख करते हुए कहा कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि नाविकों की सुरक्षा हमारा दायित्व है और हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि वे बिना किसी भय के अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें।
कोविड महामारी से मिली सीख का किया उल्लेख
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कोविड-19 महामारी का भी उल्लेख किया और कहा कि महामारी ने पूरी दुनिया को यह दिखा दिया कि वैश्विक एकजुटता और सहयोग के दावे कितने मजबूत हैं और कहाँ कमजोर पड़ जाते हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले सौ वर्षों में मानवता ने दो विश्व युद्धों और कई वैश्विक संकटों का सामना किया है। शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए जो वैश्विक संस्थाएं और व्यवस्थाएं विकसित की गईं, उनका आधार भी आपसी विश्वास ही था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविड काल में भारत ने “फर्स्ट रिस्पॉन्डर” की भूमिका निभाते हुए 150 से अधिक देशों को दवाइयां और वैक्सीन उपलब्ध कराईं। भारत ने संकट के समय वैश्विक मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई और सहयोग की भावना को मजबूत किया।
The interactions with world leaders continue at the G7 Summit in Evian.@G7 pic.twitter.com/ZOrAaffrcX
— Narendra Modi (@narendramodi) June 16, 2026
वैश्विक नेतृत्व में बढ़ती भारत की भूमिका
G7 Summit 2026 में प्रधानमंत्री मोदी का यह संबोधन भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और जिम्मेदार नेतृत्व का प्रतीक माना जा रहा है। वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ को प्रमुखता से उठाते हुए भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति, सहयोग और विश्वास आधारित विश्व व्यवस्था की वकालत कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री सुरक्षा, वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता जैसे मुद्दों पर भारत की सक्रिय भागीदारी भविष्य की वैश्विक नीतियों को प्रभावित कर सकती है।
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