उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देर रात तक राहत-बचाव अभियान और प्रशासनिक कार्रवाई की लगातार निगरानी की। सोमवार, 22 जून 2026 को दोपहर करीब तीन बजे हुए इस हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने अलीगढ़ में आयोजित अपने सभी कार्यक्रम छोड़ दिए और सीधे लखनऊ पहुँचकर स्थिति का जायजा लिया।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाई गई, घायलों के उपचार के लिए विशेष व्यवस्था की गई और हादसे के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों तथा अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। कुछ ही घंटों के भीतर पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि प्रारंभिक जांच में लापरवाही सामने आने पर चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
घटनास्थल पर पहुँचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
लखनऊ पहुँचने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सबसे पहले अलीगंज स्थित घटनास्थल पर गए। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्यों का निरीक्षण किया और मौके पर मौजूद पुलिस, अग्निशमन विभाग, लखनऊ विकास प्राधिकरण तथा प्रशासनिक अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से पूछा कि भवन में आग लगने के बाद लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए क्या व्यवस्था की गई थी, इमरजेंसी एग्जिट उपलब्ध था या नहीं और फायर सेफ्टी से संबंधित मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। उन्होंने बचाव अभियान में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने और प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
लखनऊ में अग्नि दुर्घटना स्थल का निरीक्षण किया एवं किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय पहुंचकर इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में घायल हुए लोगों एवं उनके परिजनों से भेंट कर उनका कुशल-क्षेम जाना व चिकित्सकों से घायलों के उपचार के संबंध में जानकारी प्राप्त की।
सभी घायलों का समुचित उपचार… pic.twitter.com/cC9xhFasaV
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) June 22, 2026
KGMU में घायलों से मिले CM योगी
घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद मुख्यमंत्री किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी यानी KGMU पहुँचे। यहाँ उन्होंने अस्पताल में भर्ती घायलों का हालचाल जाना और डॉक्टरों से उनके उपचार के संबंध में जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने घायलों के परिजनों से भी बातचीत की और उन्हें सरकार की ओर से हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया। अस्पताल प्रशासन को घायलों के इलाज में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने देने तथा आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएँ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की सहायता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने प्रत्येक मृतक के परिवार को पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
इसके साथ ही हादसे में घायल प्रत्येक व्यक्ति को 50 हजार रुपये की सहायता राशि देने का भी ऐलान किया गया। राज्य सरकार ने कहा कि प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता के साथ-साथ इलाज और अन्य आवश्यक सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
मुख्यमंत्री आवास पर देर रात हाई लेवल मीटिंग
KGMU से लौटने के बाद मुख्यमंत्री ने लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास, पांच कालीदास मार्ग पर देर रात उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। बैठक में शासन, पुलिस, अग्निशमन विभाग, लखनऊ विकास प्राधिकरण, बिजली विभाग और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने अग्निकांड से जुड़े प्रत्येक पहलू की समीक्षा की और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि हादसे के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाए। उन्होंने कहा कि जांच में जिस स्तर पर भी लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आएगा, संबंधित व्यक्ति और अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
दो सदस्यीय SIT गठित, सात दिन में मांगी रिपोर्ट
मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल यानी SIT गठित करने का निर्देश दिया। इस जांच दल में पर्यटन, धर्मार्थ कार्य एवं संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और लखनऊ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है।
SIT को सात दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विशेष जांच दल यह पता लगाएगा कि भवन में फायर सेफ्टी के निर्धारित मानकों का पालन किया गया था या नहीं। इसके साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि संबंधित सरकारी विभागों ने समय-समय पर निरीक्षण किया था या नहीं तथा अधिकारियों ने अपने दायित्वों का सही तरीके से निर्वहन किया था या नहीं।
जांच में यह भी निर्धारित किया जाएगा कि किन व्यक्तियों, भवन मालिकों, संचालकों या अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ और क्या नियमों की अनदेखी करके भवन में व्यावसायिक गतिविधियाँ संचालित की जा रही थीं।
अलीगंज थाने में छह लोगों के खिलाफ मुकदमा
अग्निकांड के संबंध में अलीगंज पुलिस थाने में छह लोगों और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 110, 105, 125 और 3(5) के साथ उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम की धारा 6/10 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस की अलग-अलग टीमें मामले से जुड़े अन्य आरोपियों और जिम्मेदार लोगों की तलाश कर रही हैं। भवन के स्वामित्व, संचालन, सुरक्षा अनुमति और फायर सेफ्टी प्रमाणपत्रों से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
चार आरोपियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए घटना के कुछ ही घंटों के भीतर चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में अलीगंज निवासी रामकृष्ण उपाध्याय, सीतापुर रोड क्षेत्र निवासी वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, बालागंज निवासी तुषार कृष्ण जायसवाल और मड़ियांव निवासी सुरेश कुमार साहू शामिल हैं।
पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि भवन में संचालित गतिविधियों की जिम्मेदारी किसके पास थी और सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए भी संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
लापरवाही के आरोप में चार अधिकारी निलंबित
प्रारंभिक जांच में विभागीय लापरवाही सामने आने के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। निलंबित अधिकारियों में जानकीपुरम बिजली विभाग के एक्सईएन कलेक्शन गौरव कुमार, इंदिरा नगर अग्निशमन विभाग के एफएसएसओ कमलेन्द्र कुमार सिंह, लखनऊ विकास प्राधिकरण के सहायक अभियंता अनिल कुमार और जूनियर इंजीनियर प्रमोद पांडे शामिल हैं।
सरकार का मानना है कि संबंधित विभागों द्वारा समय पर निरीक्षण किया जाता और भवन तथा अग्नि सुरक्षा नियमों का अनुपालन सुनिश्चित कराया जाता तो संभवतः इतनी बड़ी दुर्घटना को रोका जा सकता था। हालांकि अधिकारियों की अंतिम जिम्मेदारी SIT की जांच रिपोर्ट आने के बाद तय की जाएगी।
वर्ष 2016 में जारी हुआ था ध्वस्तीकरण आदेश
जांच के दौरान सामने आए दस्तावेजों के अनुसार अलीगंज सेक्टर-डी के उषा मेहता मार्ग पर स्थित इस तीन मंजिला भवन का आवासीय नक्शा 20 अगस्त 2014 को स्वीकृत किया गया था।
वर्ष 2016 में लखनऊ विकास प्राधिकरण ने कथित अनधिकृत निर्माण को लेकर मामला दर्ज किया था। एलडीए ने 10 मई 2016 को भवन के ध्वस्तीकरण का आदेश भी जारी किया था। हालांकि भवन मालिकों की ओर से आपत्ति दर्ज कराए जाने के बाद पांच जुलाई 2016 को इस आदेश को वापस ले लिया गया था।
अब SIT इस बात की भी जांच करेगी कि ध्वस्तीकरण आदेश वापस लेने का आधार क्या था, क्या उस समय भवन का दोबारा निरीक्षण किया गया था और क्या सभी अनधिकृत निर्माण हटा दिए गए थे।
कई बार बदला गया था संपत्ति का मालिकाना हक
आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार जिस संपत्ति में आग लगी, उसका मालिकाना हक कई बार बदला गया था। भवन संख्या एमएस/102/डी का आवंटन वर्ष 1980 में हुआ था। इसके बाद वर्ष 2005 और 2013 में इसका स्वामित्व बदला गया।
सात अगस्त 2014 को लखनऊ विकास प्राधिकरण ने संपत्ति को नए मालिकों के नाम म्यूटेट किया था। जांच एजेंसियाँ अब भवन के मौजूदा मालिकों, पूर्व मालिकों, किरायेदारों और वहाँ व्यावसायिक गतिविधियाँ संचालित करने वाले लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।
AC डक्ट से आग शुरू होने की आशंका
प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि आग एयर कंडीशनिंग डक्ट से शुरू हुई और तेजी से पूरी इमारत में फैल गई। भवन में पर्याप्त इमरजेंसी एग्जिट नहीं होने की बात भी सामने आ रही है। हालांकि आग लगने के वास्तविक कारणों की पुष्टि तकनीकी और फोरेंसिक जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
जांच एजेंसियाँ यह भी पता लगा रही हैं कि भवन में फायर अलार्म, अग्निशमन यंत्र, स्प्रिंकलर, स्मोक डिटेक्टर और आपातकालीन निकास जैसी अनिवार्य व्यवस्थाएँ मौजूद थीं या नहीं। बिजली की वायरिंग, एयर कंडीशनिंग सिस्टम और अन्य उपकरणों की तकनीकी जांच भी कराई जा रही है।
SIT रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि SIT की रिपोर्ट के आधार पर दोषी भवन मालिकों, संचालकों, अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। जांच में आपराधिक लापरवाही, नियमों के उल्लंघन या दस्तावेजों में अनियमितता मिलने पर अतिरिक्त धाराएँ भी लगाई जा सकती हैं।
लखनऊ अग्निकांड ने एक बार फिर बहुमंजिला इमारतों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में फायर सेफ्टी नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन अब शहर की अन्य इमारतों में भी अग्नि सुरक्षा मानकों की जांच और निरीक्षण अभियान तेज कर सकता है।
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