तापी जिले के सोनगढ़ तालुका के कुछ सुदूरवर्ती गांवों में प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों के चयन में धार्मिक भेदभाव किए जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। चिमेर, मेढ़ा, धनमोली और खांजर समेत कई गांवों के ग्रामीणों ने दावा किया है कि ईसाई धर्म अपनाने वाले परिवारों को आवास योजना का लाभ दिया जा रहा है, जबकि अन्य पात्र परिवारों को वर्षों से योजना से वंचित रखा गया है।
जिला स्वागत कार्यक्रम में ग्रामीणों ने रखी शिकायत
आवास योजना का लाभ नहीं मिलने से परेशान महिलाओं सहित कई ग्रामीण तापी जिले के जिला स्तरीय शिकायत निवारण ‘स्वागत’ कार्यक्रम में पहुंचे। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर देव चौधरी के समक्ष अपनी समस्याएं रखते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की।
ग्रामीणों के अनुसार, वे लंबे समय से पक्का मकान, सड़क, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए ग्राम पंचायत और संबंधित अधिकारियों के समक्ष आवेदन एवं शिकायतें कर रहे हैं। इसके बावजूद उनकी समस्याओं पर उचित कार्रवाई नहीं की गई है।
घटना- सोनगढ़, गुजरात
दक्षिण गुजरात में खुलेआम चल रहा जनजाति समाज के विरुद्ध कन्वर्टेड क्रिप्टो नेताओ का “आवास योजना कांड”
जनजाति हिंदू समाज के लोगो ने सरकारी तंत्र और स्थानिक नेताओ पर आरोप लगाया है की आवास योजना का लाभ केवल उन्हें ही मिल रहा है जो ईसाई बन चुके है लेकिन जो मूल… pic.twitter.com/B7tTlx6teB
— Kajal HINDUsthani (@kajal_jaihind) June 23, 2026
तलाटी और सरपंच की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
शिकायत करने वाले ग्रामीणों ने गांव के तलाटी और सरपंच पर मिलीभगत से काम करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का दावा है कि आवास योजना के लाभार्थियों का चयन पारदर्शी तरीके से नहीं किया जा रहा है। कुछ लोगों को एक से अधिक बार आवास योजना का लाभ दिए जाने की आशंका भी जताई गई है।
ग्रामीणों ने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर और कच्चे मकानों में रहने वाले कई परिवार योजना के लिए पात्र होने के बावजूद लाभार्थी सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। दूसरी ओर, कुछ चुनिंदा परिवारों को प्राथमिकता दिए जाने का आरोप लगाया गया है।
धर्म के आधार पर योजना का लाभ देने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ गांवों में धर्मांतरण कर ईसाई बने आदिवासी परिवारों को ही आवास योजना में प्राथमिकता दी जा रही है। हालांकि ग्रामीणों के इन आरोपों की अभी तक स्वतंत्र या आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि वर्तमान लाभार्थी सूची, पूर्व में आवंटित किए गए आवासों और पात्र परिवारों के आवेदनों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारियों और पदाधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
प्रशासन ने कार्रवाई का दिया आश्वासन
ग्रामीणों के अनुसार, शिकायत प्रस्तुत किए जाने के बाद जिला प्रशासन ने प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ पात्रता और नियमों के अनुसार दिलाने के लिए जांच एवं आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
हालांकि ग्रामीणों ने केवल आश्वासन के बजाय मौके पर जांच, ग्रामसभा में पारदर्शी तरीके से लाभार्थियों का चयन और लिखित कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की ‘सबका साथ, सबका विकास’ नीति के तहत किसी भी पात्र परिवार को धर्म, समुदाय या व्यक्तिगत पहचान के आधार पर सरकारी योजना से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने आवास योजना के सभी लाभार्थियों की जांच, वंचित परिवारों का दोबारा सर्वेक्षण, ग्रामसभा में पारदर्शी लाभार्थी सूची जारी करने और गांवों में बुनियादी सुविधाएं जल्द उपलब्ध कराने की मांग की है।
इस पूरे मामले में संबंधित ग्राम पंचायत अथवा जिला प्रशासन की ओर से अभी तक विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel