यमुना नदी के जल बंटवारे को लेकर राजस्थान और हरियाणा के बीच दशकों से लंबित मुद्दे पर बड़ा कदम उठाया गया है। 29 जून 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में राजस्थान सरकार और हरियाणा सरकार ने यमुना जल परियोजना के निर्माण और क्रियान्वयन को लेकर महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल और दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
यह समझौता 1994 के अपर यमुना नदी बोर्ड समझौते को प्रभावी तरीके से लागू करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। करीब 32 साल से लंबित इस जल परियोजना के जरिए राजस्थान को उसके हिस्से का यमुना जल उपलब्ध कराया जाएगा। इससे राजस्थान के जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों, खासकर शेखावाटी अंचल को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
लगभग 580 MCM पानी राजस्थान तक पहुंचेगा
समझौते के तहत जुलाई से अक्टूबर के दौरान लगभग 580 मिलियन क्यूबिक मीटर यानी MCM पानी यमुना नहर प्रणाली से तीन भूमिगत पाइपलाइनों के जरिए राजस्थान तक पहुंचाया जाएगा। इन पाइपलाइनों का व्यास 3.6 मीटर से अधिक होगा। इस परियोजना को दोनों राज्यों के लिए “विन-विन” व्यवस्था बताया जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, परियोजना के तहत राजस्थान के हिस्से का करीब 577 MCM यमुना जल हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से चूरू जिले के हंसियावास जलाशय तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए करीब 295.5 किलोमीटर लंबा भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क विकसित किया जाएगा।
₹34,102 करोड़ की अनुमानित लागत
यमुना जल परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹34,102 करोड़ बताई जा रही है। परियोजना के तहत तीन भूमिगत पाइपलाइनें, निरीक्षण मार्ग, कृत्रिम जलाशय और आधुनिक जल प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी। इसके संचालन, रखरखाव, निगरानी और विवाद समाधान के लिए भी व्यवस्था तय की जाएगी।
इस परियोजना के लागू होने के बाद राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनू जैसे जल-संकट वाले जिलों में पेयजल आपूर्ति को मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही हरियाणा के भिवानी और फतेहाबाद क्षेत्रों में भी पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी।
अपर यमुना नदी बोर्ड समझौता क्या है?
अपर यमुना नदी बोर्ड समझौता 12 मई 1994 को यमुना बेसिन से जुड़े राज्यों के बीच किया गया था। इसमें हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली शामिल थे। इस समझौते का उद्देश्य यमुना के सतही जल का निर्धारित अनुपात में बंटवारा सुनिश्चित करना था।
इस समझौते के क्रियान्वयन और राज्यों के बीच समन्वय के लिए अपर यमुना नदी बोर्ड का गठन किया गया था। बोर्ड का काम जल आवंटन, जल छोड़ने की प्रक्रिया, राज्यों के बीच समन्वय और यमुना बेसिन के जल प्रबंधन से जुड़े मुद्दों को देखना है।
राजस्थान को कैसे मिलेगा यमुना का पानी?
नई व्यवस्था के तहत पश्चिमी यमुना नहर प्रणाली से राजस्थान के हिस्से का पानी भूमिगत पाइपलाइन के जरिए भेजा जाएगा। यह पानी चूरू जिले के हंसियावास जलाशय तक पहुंचाया जाएगा, जहां से आगे जल प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से जरूरतमंद इलाकों तक आपूर्ति की जा सकेगी।
इस परियोजना का उद्देश्य बरसाती और अतिरिक्त पानी का बेहतर उपयोग करना है। अभी जो पानी बेकार चला जाता था, उसे पेयजल और भूजल रिचार्ज के लिए उपयोग में लाया जाएगा। बड़े तालाबों और जलाशयों में पानी जमा होने से भूजल स्तर बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
शेखावाटी क्षेत्र को मिलेगी बड़ी राहत
राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में लंबे समय से पेयजल संकट एक बड़ी समस्या रहा है। सीकर, चूरू और झुंझुनू जैसे जिलों में कम वर्षा और घटते भूजल स्तर के कारण लोगों को पेयजल के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यमुना जल परियोजना से इन जिलों में लंबे समय के लिए जल सुरक्षा मजबूत हो सकती है।
इस परियोजना से न केवल पेयजल की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि सामाजिक-आर्थिक विकास को भी गति मिल सकती है। बेहतर जल आपूर्ति से ग्रामीण इलाकों, कृषि, उद्योग और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
हरियाणा को भी मिलेगा फायदा
समझौते को केवल राजस्थान के लिए नहीं, बल्कि हरियाणा के लिए भी लाभकारी बताया जा रहा है। परियोजना के तहत हरियाणा के करीब 10 स्थानों पर पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। विशेष रूप से भिवानी और फतेहाबाद क्षेत्रों को इससे लाभ मिलने की उम्मीद है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस समझौते को सहकारी संघवाद और संवाद से समाधान का उदाहरण बताया। उनके अनुसार, दोनों राज्यों और केंद्र के समन्वय से तीन दशक पुरानी समस्या का समाधान निकला है।
रेणुका, लखवार और किशाऊ जैसी परियोजनाओं को भी मिल सकती है गति
यमुना बेसिन से जुड़ी रेणुका डैम, लखवार डैम और किशाऊ डैम जैसी बहुउद्देशीय परियोजनाएं भी लंबे समय से चर्चा में रही हैं। माना जा रहा है कि राजस्थान-हरियाणा समझौते के बाद यमुना जल प्रबंधन से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स को भी आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य यमुना बेसिन के पानी का बेहतर उपयोग, पेयजल आपूर्ति, सिंचाई और क्षेत्रीय जल सुरक्षा को मजबूत करना है।
केंद्र-राज्य समन्वय से निकला समाधान
यह समझौता केंद्र सरकार, केंद्रीय जल आयोग, जलशक्ति मंत्रालय, राजस्थान और हरियाणा सरकारों के समन्वय से तैयार हुआ है। समझौते में वित्तीय जिम्मेदारी, लागत साझेदारी, जल आवंटन, जल छोड़ने के प्रोटोकॉल, रखरखाव और निगरानी व्यवस्था को शामिल किया गया है।
सरकार का दावा है कि यह समझौता आने वाले कई दशकों तक विवाद रहित जल प्रबंधन मॉडल के रूप में काम करेगा। अब परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन पर सभी की नजर रहेगी।
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