अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना द्वारा कथित अतिक्रमण और सैन्य कैंप बनाए जाने की मीडिया रिपोर्ट्स को भारतीय सेना ने सिरे से खारिज कर दिया है। सेना ने साफ कहा है कि अरुणाचल प्रदेश में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी PLA द्वारा हाल में घुसपैठ करने या कैंप स्थापित करने की खबरें गलत और बिना आधार वाली हैं।
सेना ने क्या कहा?
भारतीय सेना ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि चीनी PLA ने अरुणाचल प्रदेश में हाल में अतिक्रमण किया है और कैंप बनाए हैं। सेना ने इन दावों को गलत बताया और कहा कि ऐसी रिपोर्ट्स का कोई आधार नहीं है। सेना के इस बयान के बाद सीमा क्षेत्र को लेकर फैली अटकलों पर बड़ा स्पष्टीकरण सामने आया है।
Indian Army- "We have seen some media reports alleging recent encroachment by Chinese PLA and setting up of camps in Arunachal Pradesh. These reports are incorrect and without any basis." pic.twitter.com/N3SSJQYL7l
— ANI (@ANI) June 29, 2026
मामला कैसे शुरू हुआ?
यह मामला अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले से जुड़ा है। नाह जनजातीय समुदाय से जुड़े संगठन नाह वेलफेयर सोसाइटी ने स्थानीय प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन में दावा किया गया कि पिछले कुछ वर्षों में PLA की गतिविधियां सीमावर्ती इलाकों में बढ़ी हैं और जिन क्षेत्रों का स्थानीय समुदाय परंपरागत रूप से शिकार, पशु चराने, खेती और वन उत्पादों के लिए इस्तेमाल करता रहा है, वहां पहुंच प्रभावित हुई है।
नाह वेलफेयर सोसाइटी का दावा
नाह वेलफेयर सोसाइटी ने आरोप लगाया कि Taksing क्षेत्र के आसपास कई पारंपरिक इलाकों में PLA की मौजूदगी बढ़ी है। संगठन ने यह भी दावा किया कि कुछ जगहों पर सड़क, पुल और सैन्य ढांचे जैसी गतिविधियां दिखाई दी हैं। सोसाइटी ने केंद्र और राज्य सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी।
स्थानीय लोगों की चिंता
स्थानीय समुदाय का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में उनकी पारंपरिक आवाजाही पहले जैसी नहीं रही। उनका दावा है कि जिन क्षेत्रों में वे पहले स्वतंत्र रूप से जाते थे, वहां अब स्थिति बदलती दिख रही है। हालांकि, इन दावों पर भारतीय सेना ने स्पष्ट किया है कि हालिया अतिक्रमण या अरुणाचल में PLA कैंप बनाए जाने की रिपोर्ट सही नहीं है।
Update:
My take on recent news on PLA setting up camps inside Indian territory!
There is a large area of differing perception in the upper sunbansiri frontier.
IA's perception of Border, IA LAC, PLA's perception of Border, SOI Border, Tribe's perception of border etc…
1/3 pic.twitter.com/e28kcdALlh
— Nature Desai (@NatureDesai) June 29, 2026
विधायक ने वेरिफिकेशन की मांग की
स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को गंभीर माना जा रहा है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने कहा है कि इस तरह के दावों की जांच और सत्यापन जरूरी है, क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय है। साथ ही उन्होंने भारतीय सेना पर भरोसा जताते हुए कहा कि सीमावर्ती इलाकों में किसी भी गतिविधि को लेकर सतर्कता जरूरी है।
WMCC बैठक के बाद आया स्पष्टीकरण
सेना का यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब पिछले महीने बीजिंग में भारत-चीन बॉर्डर मामलों पर Working Mechanism for Consultation and Coordination यानी WMCC की 35वीं बैठक हुई थी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की और शांति बनाए रखने की दिशा में हुई प्रगति पर संतोष जताया।
भारत-चीन सीमा पर अलग-अलग धारणा भी विवाद की वजह
भारत-चीन सीमा के कई इलाकों में LAC को लेकर दोनों देशों की अलग-अलग धारणा रही है। स्थानीय समुदायों की पारंपरिक आवाजाही, ऐतिहासिक उपयोग और आधिकारिक सीमा समझ के बीच अंतर भी कई बार विवाद और भ्रम की स्थिति पैदा करता है। यही वजह है कि अरुणाचल जैसे संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी भी दावे या रिपोर्ट पर सेना और प्रशासन की पुष्टि बेहद अहम मानी जाती है।
फिलहाल स्थिति क्या है?
फिलहाल भारतीय सेना ने स्पष्ट कर दिया है कि अरुणाचल प्रदेश में PLA द्वारा हालिया अतिक्रमण या कैंप स्थापित करने की रिपोर्ट्स गलत हैं। दूसरी ओर, स्थानीय संगठन ने अपनी चिंताओं को प्रशासन के सामने रखा है। अब प्रशासनिक और सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में इस संवेदनशील मुद्दे पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
निष्कर्ष:
अरुणाचल प्रदेश में चीनी अतिक्रमण को लेकर आई खबरों पर भारतीय सेना ने बड़ा स्पष्टीकरण देते हुए इन्हें आधारहीन बताया है। नाह वेलफेयर सोसाइटी के आरोपों ने सीमावर्ती इलाकों की संवेदनशीलता को फिर चर्चा में ला दिया है। हालांकि, सेना के बयान के बाद यह साफ है कि हालिया चीनी घुसपैठ या अरुणाचल में PLA कैंप बनने की रिपोर्ट्स की आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
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