महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना-यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा घटनाक्रम में विधान परिषद सदस्य यानी MLC सचिन अहीर के उद्धव गुट से अलग होकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की खबर सामने आई है। इस घटनाक्रम को महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर माना जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार, सचिन अहीर के शिंदे गुट में शामिल होने के तुरंत बाद उन्हें विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए उम्मीदवार बनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई। शिंदे गुट की ओर से उनका नामांकन दाखिल किए जाने को उद्धव ठाकरे के लिए एक और राजनीतिक झटका बताया जा रहा है।
राजनीतिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम को एकनाथ शिंदे के “ऑपरेशन टाइगर” के अगले चरण के रूप में देखा जा रहा है। पिछले दिनों शिवसेना-यूबीटी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों के शिंदे गुट में जाने की खबर सामने आई थी। NDTV की रिपोर्टिंग में भी 22 जून 2026 को “6 UBT rebel MPs join Shiv Sena” और “Operation Tiger Success” से जुड़े वीडियो अपडेट सामने आए थे।
सांसदों के इस बड़े बदलाव के बाद उद्धव ठाकरे गुट संसद में भी दबाव में आ गया है। 9 में से 6 सांसदों का अलग होना संख्या के लिहाज से दो-तिहाई माना जा रहा है, लेकिन शिवसेना-यूबीटी ने इस दावे को चुनौती देते हुए लोकसभा अध्यक्ष के सामने अपना पक्ष रखा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, UBT नेताओं ने सवाल उठाया है कि क्या दो-तिहाई सांसद अपने स्तर पर अलग होकर दूसरे दल में शामिल हो सकते हैं या इसके लिए मूल राजनीतिक दल की औपचारिक मर्जर प्रक्रिया जरूरी है।
उद्धव ठाकरे ने भी इस मामले में आक्रामक रुख अपनाया है। परभणी में रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने बागी सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई करने की अपील की और कहा कि अगर कानून का राज है, तो इन सांसदों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
दूसरी ओर, शिंदे गुट लगातार दावा कर रहा है कि उद्धव ठाकरे की पार्टी के और भी नेता उनके संपर्क में हैं। हाल ही में शिवसेना मंत्री गुलाबराव पाटिल ने दावा किया था कि “ऑपरेशन टाइगर 3.0” शुरू हो चुका है और शिवसेना-यूबीटी के 14 विधायक शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, शिंदे गुट के ही मंत्री उदय सामंत ने इस दावे को सीधे तौर पर स्वीकार नहीं किया और कहा कि कोई ऑपरेशन नहीं चल रहा, लेकिन कई नेता अपने स्तर पर संपर्क में हैं।
सचिन अहीर का नाम महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जाता है। वे मुंबई की राजनीति में सक्रिय चेहरा रहे हैं और शिवसेना-यूबीटी में संगठनात्मक स्तर पर भी उनकी भूमिका रही है। ऐसे में अगर उनका शिंदे गुट में जाना औपचारिक रूप से सामने आता है, तो यह उद्धव ठाकरे के लिए मुंबई और विधान परिषद दोनों स्तरों पर बड़ा नुकसान साबित हो सकता है।
महाराष्ट्र में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और मुंबई महानगरपालिका यानी BMC चुनावों से पहले यह सियासी हलचल बेहद अहम मानी जा रही है। उद्धव ठाकरे गुट पहले ही सांसदों की बगावत से जूझ रहा है। ऐसे में MLC और विधायकों को लेकर चल रही अटकलें पार्टी के लिए नई चुनौती बन सकती हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एकनाथ शिंदे गुट अब उद्धव ठाकरे की संगठनात्मक ताकत को धीरे-धीरे कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहा है। सांसदों के बाद अब विधान परिषद और विधायकों पर नजर होना इसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना बनाम शिवसेना की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उद्धव ठाकरे जहां बागी सांसदों के खिलाफ कानूनी और संवैधानिक लड़ाई लड़ने की तैयारी में हैं, वहीं शिंदे गुट लगातार अपने कुनबे को मजबूत करने में जुटा है। सचिन अहीर से जुड़ा ताजा घटनाक्रम अगर पूरी तरह पुष्ट होता है, तो यह उद्धव गुट के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है।
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