पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच रक्षा सहयोग को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। 28 जून 2026 को पाकिस्तान के हाई कमिश्नर इमरान हैदर ने ढाका कैंटोनमेंट स्थित Armed Forces Division में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल रिटायर्ड डॉ. ए.के.एम. शम्सुल इस्लाम से मुलाकात की। बांग्लादेश की सरकारी समाचार एजेंसी BSS के अनुसार, इस बैठक में पाकिस्तान हाई कमिश्नर ने तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया और दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों तथा रक्षा सहयोग बढ़ाने के मुद्दों पर चर्चा की।
आधिकारिक बयान में “संयुक्त मिलिट्री कमांड” का कोई सीधा उल्लेख नहीं किया गया है। पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में द्विपक्षीय सहयोग, रक्षा सहयोग के अलग-अलग पहलुओं, सहयोग के नए क्षेत्रों और भविष्य में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने संबंधों को आगे बढ़ाने और नई संभावनाएं तलाशने पर सहमति जताई।
हालांकि रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने बांग्लादेश के सामने संयुक्त पाकिस्तान-बांग्लादेश सैन्य कमान बनाने का प्रस्ताव रखा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसे “क्षेत्रीय रक्षा हितों” के नाम पर आगे बढ़ाया गया और बैठक में संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण, रणनीतिक योजना तथा क्षेत्रीय सुरक्षा समन्वय पर विस्तार से चर्चा हुई।
‘संयुक्त मिलिट्री कमांड’ का प्रस्ताव क्या है? 3 प्वाइंट में समझें:
1. इसका मतलब क्या हो सकता है?
संयुक्त मिलिट्री कमांड का सामान्य अर्थ दो देशों की सेनाओं के बीच संरचित सैन्य समन्वय, संयुक्त योजना, संयुक्त प्रशिक्षण, इंटेलिजेंस/कम्युनिकेशन सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा मामलों में नियमित तालमेल से हो सकता है। लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान ने केवल विचार रखा है या किसी औपचारिक समझौते का मसौदा भी दिया गया है।
2. आधिकारिक बयान और रिपोर्ट में फर्क क्या है?
बांग्लादेश और पाकिस्तान के आधिकारिक बयानों में रक्षा सहयोग, प्रोफेशनल स्किल्स, सैन्य संस्थानों के बीच संपर्क और भविष्य के सहयोग की बात कही गई है, लेकिन “Joint Military Command” शब्द का उल्लेख नहीं है। वहीं कुछ अन्य रिपोर्ट्स ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि बंद कमरे की चर्चा में संयुक्त कमान और जॉइंट मिलिट्री ट्रेनिंग पर बात हुई।
3. भारत के लिए यह संवेदनशील क्यों है?
भारत के लिए बांग्लादेश की भौगोलिक स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है, खासकर पूर्वोत्तर राज्यों और सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी “चिकन नेक” के कारण। अगर पाकिस्तान-बांग्लादेश रक्षा सहयोग सिर्फ ट्रेनिंग और डिफेंस डायलॉग से आगे बढ़कर किसी संरचित सैन्य व्यवस्था में बदलता है, तो भारत की पूर्वी सुरक्षा रणनीति पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि अभी इसे संभावित चिंता के रूप में ही देखा जाना चाहिए, क्योंकि किसी औपचारिक संयुक्त कमांड की पुष्टि नहीं हुई है।
पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच हाल के महीनों में सैन्य संपर्क बढ़े हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान और बांग्लादेश के वायुसेना प्रमुखों के बीच संभावित रक्षा समझौते और बांग्लादेश को JF-17 Thunder लड़ाकू विमान बेचने पर बातचीत हुई थी। पाकिस्तान अपनी रक्षा तकनीक और हथियार निर्यात को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जबकि ढाका भी अपने वायु रक्षा बेड़े के आधुनिकीकरण पर काम कर रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश के लिए पाकिस्तान से JF-17 मल्टीरोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट खरीदने की बातचीत पहले आगे बढ़ी थी, लेकिन बाद में यह प्रक्रिया धीमी पड़ गई। इसके बाद चीन से लड़ाकू विमान खरीदने की चर्चा तेज होने की बात सामने आई। मई 2026 में लिखा था कि बांग्लादेश की संभावित JF-17 रुचि भारत की पूर्वी सुरक्षा गणना को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि JF-17 चीन-पाकिस्तान द्वारा विकसित प्लेटफॉर्म है।
बांग्लादेश के आधिकारिक और मीडिया बयानों के अनुसार, 28 जून की बैठक में दोनों देशों के रक्षा संस्थानों के बीच नियमित संपर्क, प्रोफेशनल स्किल्स को बेहतर बनाने और सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने पर जोर दिया गया। पाकिस्तान हाई कमिश्नर और बांग्लादेश के रक्षा सलाहकार के बीच बैठक का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को आगे बढ़ाना था।
यह घटनाक्रम ऐतिहासिक रूप से भी बेहद संवेदनशील है, क्योंकि बांग्लादेश के सशस्त्र बलों की स्थापना 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान हुई थी, जो तत्कालीन पाकिस्तान के खिलाफ लड़ा गया था। ऐसे में पाकिस्तान के साथ किसी भी गहरे सैन्य ढांचे की चर्चा बांग्लादेश की घरेलू राजनीति, 1971 की स्मृति और क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से विवाद का कारण बन सकती है।
भारत के रणनीतिक समुदाय में इस तरह की रिपोर्ट्स को लेकर चिंता इसलिए बढ़ती है क्योंकि पाकिस्तान पश्चिमी सीमा पर भारत का पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी है, जबकि चीन उत्तरी और पूर्वी सीमाओं पर दबाव बनाता रहा है। यदि बांग्लादेश की सैन्य दिशा पाकिस्तान या चीन-पाकिस्तान रक्षा प्लेटफॉर्म की ओर झुकती है, तो भारत की पूर्वी सीमा और पूर्वोत्तर क्षेत्र की सुरक्षा योजना में नए समीकरण बन सकते हैं।
हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि बांग्लादेश पाकिस्तान के साथ किसी औपचारिक संयुक्त सैन्य कमान पर सहमत हो गया है। उपलब्ध आधिकारिक बयान केवल रक्षा सहयोग, संपर्क और भविष्य की संभावनाओं की बात करते हैं। इसलिए इस मुद्दे को फिलहाल “प्रस्ताव/रिपोर्टेड चर्चा” के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि तय समझौते के रूप में।
कुल मिलाकर, पाकिस्तान-बांग्लादेश रक्षा संपर्कों का बढ़ना दक्षिण एशिया की बदलती रणनीतिक तस्वीर का संकेत है। यह भारत के लिए निगरानी योग्य घटनाक्रम है, खासकर सिलीगुड़ी कॉरिडोर, पूर्वोत्तर राज्यों और बंगाल की खाड़ी की सुरक्षा के संदर्भ में। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ढाका इस प्रस्ताव पर औपचारिक प्रतिक्रिया देता है या इसे केवल सामान्य रक्षा सहयोग तक सीमित रखता है।
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