आतंकवाद और सीमा पार से संचालित आतंकी नेटवर्क के खिलाफ केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में सक्रिय 23 व्यक्तियों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत आधिकारिक रूप से आतंकवादी घोषित किया है।
गृह मंत्रालय ने इस संबंध में गजट अधिसूचना जारी करते हुए इन सभी 23 नामों को UAPA की चौथी अनुसूची में शामिल किया है। सरकार के अनुसार, ये व्यक्ति लंबे समय से जम्मू-कश्मीर और भारत के अन्य हिस्सों में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने, आतंकी साजिशों, घुसपैठ और हथियारों की तस्करी से जुड़े रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप
गृह मंत्रालय के मुताबिक, घोषित किए गए आतंकियों पर जम्मू-कश्मीर में हिंसा और आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के गंभीर आरोप हैं। सरकार का कहना है कि इनमें से कई लोग सीमा पार से आतंकियों को निर्देश देने, घुसपैठ की योजना बनाने और आतंकी हमलों के लिए सहायता उपलब्ध कराने में सक्रिय रहे हैं।
इन पर आतंकियों के लिए हथियार और गोला-बारूद उपलब्ध कराने, ड्रोन के जरिए सीमा पार से हथियार भेजने और स्थानीय युवाओं को आतंकी संगठनों में भर्ती करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
सरकार का मानना है कि पाकिस्तान और POK से संचालित आतंकी नेटवर्क जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने और सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए लगातार नई रणनीतियों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
Pursuing Modi Ji's vision of zero tolerance against terror, the MHA today declared 23 dreaded terror functionaries as terrorists under the provisions of the Unlawful Activities (Prevention) Act.
The designated terrorists are involved in anti-India activities, carrying out…
— गृहमंत्री कार्यालय, HMO India (@HMOIndia) July 4, 2026
JeM और LeT से जुड़े अधिकांश आतंकी
गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, सूची में शामिल अधिकतर व्यक्ति पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े बताए गए हैं।
इन दोनों संगठनों पर भारत में कई बड़े आतंकी हमलों और आतंकी साजिशों में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं। सरकार के मुताबिक, सूची में शामिल लोग इन संगठनों के लिए फंडिंग जुटाने, आतंकियों के बीच समन्वय स्थापित करने और हमलों की योजना तैयार करने में भूमिका निभाते रहे हैं।
हाफिज सईद के करीबी सहयोगियों पर भी शिकंजा
नई सूची में लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज मोहम्मद सईद के करीबी सहयोगी बताए जाने वाले कई नाम भी शामिल हैं। इनमें अब्दुल रऊफ, हाफिज खालिद वलीद और राना इफ्तिखार जैसे नाम प्रमुख रूप से शामिल बताए गए हैं।
सरकार के मुताबिक, ये लोग आतंकी फंडिंग, सीमा पार बैठे आतंकी कमांडरों और कश्मीर में सक्रिय आतंकियों के बीच समन्वय स्थापित करने तथा हमलों की योजना तैयार करने में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
इन व्यक्तियों को आधिकारिक रूप से आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद भारतीय जांच और सुरक्षा एजेंसियों के लिए इनके नेटवर्क, संपत्तियों और संपर्कों के खिलाफ कार्रवाई को और मजबूत करने का रास्ता साफ होगा।
नगरोटा और सुंजवाँ हमलों से जुड़े नाम भी सूची में
गृह मंत्रालय द्वारा जारी सूची में मसूद इलियास कश्मीरी, मोहम्मद मुसद्दिक, मुफ्ती मोहम्मद असगर खान, हाफिज अब्दुल शकूर और अब्दुल्ला जेहादी जैसे नाम भी शामिल बताए गए हैं।
सरकार के अनुसार, इन व्यक्तियों के तार वर्ष 2016 में हुए नगरोटा आर्मी कैंप आतंकी हमले और वर्ष 2022 के सुंजवाँ हमले से जुड़े होने के आरोप हैं।
इन हमलों में भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठानों और सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाया गया था। केंद्र सरकार लंबे समय से ऐसे हमलों के पीछे मौजूद सीमा पार आतंकी नेटवर्क और उनके हैंडलर्स के खिलाफ कार्रवाई तेज कर रही है।
सोशल मीडिया के जरिए युवाओं की भर्ती का आरोप
सूची में शामिल मोहम्मद शहीद फैसल पर सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को आतंकी गतिविधियों के लिए भर्ती करने का आरोप है।
सरकार के मुताबिक, वह युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने, हथियार चलाने की ट्रेनिंग दिलाने और आतंकी नेटवर्क के लिए नई भर्ती करने में शामिल रहा है। उस पर फर्जी पहचान का इस्तेमाल करने और सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों के जरिए संपर्क बनाए रखने के आरोप भी लगाए गए हैं।
ड्रोन से हथियार भेजने वाले नेटवर्क पर भी सरकार की नजर
सीमा पार आतंकवाद में ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए सरकार ने ऐसे नेटवर्क के खिलाफ भी कार्रवाई तेज की है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, कुछ आरोपी ड्रोन के जरिए जम्मू-कश्मीर और सीमावर्ती इलाकों में हथियार, गोला-बारूद और अन्य सामग्री भेजने के नेटवर्क से जुड़े रहे हैं।
सुरक्षा एजेंसियां पिछले कुछ वर्षों में कई बार सीमा पार से आने वाले ड्रोन और हथियारों की खेप को पकड़ चुकी हैं। ऐसे में केंद्र सरकार का यह कदम ड्रोन आधारित आतंकी सप्लाई नेटवर्क पर कानूनी शिकंजा मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
UAPA की धारा 35 के तहत क्या होती है कार्रवाई?
UAPA की धारा 35 के तहत केंद्र सरकार किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित कर सकती है, यदि उसके आतंकी गतिविधियों में शामिल होने, आतंकवाद को बढ़ावा देने, आतंकी संगठन को सहायता देने या आतंकी गतिविधियों के लिए लोगों की भर्ती करने के संबंध में पर्याप्त आधार मौजूद हों।
ऐसे व्यक्ति का नाम UAPA की चौथी अनुसूची में शामिल किया जाता है। इसके बाद सुरक्षा और जांच एजेंसियों को उससे जुड़े नेटवर्क, फंडिंग, संपर्कों और अन्य गतिविधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने में मदद मिलती है।
सीमा पार आतंकी नेटवर्क पर बढ़ेगा दबाव
गृह मंत्रालय का कहना है कि इन 23 व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित किए जाने से उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और मजबूत होगी। इसके साथ ही पाकिस्तान और POK से संचालित सीमा पार आतंकी नेटवर्क पर प्रभावी दबाव बनाने में भी मदद मिलेगी।
सरकार लगातार यह संदेश देती रही है कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले, उसकी फंडिंग करने वाले या आतंकवादी संगठनों की किसी भी रूप में सहायता करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
केंद्र का यह नया फैसला आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत एक अहम कदम के रूप में देखा जा रहा है।
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