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कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान ने फिर लगाई UN से गुहार, PoK में विरोध के बीच शहबाज शरीफ ने उठाया पुराना राग

कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान ने फिर लगाई UN से गुहार, PoK में विरोध के बीच शहबाज शरीफ ने उठाया पुराना राग

पाकिस्तान ने एक बार फिर कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाते हुए संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक समुदाय से समर्थन मांगा है। इस्लामाबाद ने जम्मू-कश्मीर विवाद को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और कश्मीरी लोगों की कथित आकांक्षाओं के अनुरूप हल करने की अपील की है।

पाकिस्तान की ओर से यह मांग रविवार, 19 जुलाई को उस अवसर पर की गई, जिसे वह कथित तौर पर ‘कश्मीर के पाकिस्तान में विलय दिवस’ के रूप में मनाता है। इस मौके पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने अलग-अलग बयान जारी कर कश्मीर का मुद्दा उठाया।

जरदारी ने संयुक्त राष्ट्र से मांगा समर्थन

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने अपने संदेश में कहा कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर विवाद के शांतिपूर्ण और न्यायपूर्ण समाधान की वकालत करता रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस विवाद का समाधान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों और कश्मीरी लोगों की आकांक्षाओं के अनुसार होना चाहिए।

जरदारी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र से अपील करते हुए कहा कि वह कश्मीरी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन करे और इस दिशा में अपनी जिम्मेदारी निभाए।

शहबाज शरीफ ने भी अलापा कश्मीर राग

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी अपने बयान में कहा कि दक्षिण एशिया में स्थायी शांति के लिए कश्मीर विवाद का शांतिपूर्ण समाधान जरूरी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के लोगों के आत्मनिर्णय के कथित अधिकार के प्रति अपना समर्थन जारी रखेगा।

शहबाज शरीफ ने दावा किया कि यह अधिकार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों में भी दर्ज है। पाकिस्तान लंबे समय से इन्हीं प्रस्तावों का हवाला देकर कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की कोशिश करता रहा है।

PoK में विरोध के बीच पाकिस्तान ने तेज की बयानबाजी

पाकिस्तान की ओर से कश्मीर को लेकर यह बयानबाजी ऐसे समय में तेज की गई है, जब उसे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ रहा है।

प्राप्त जानकारी और स्थानीय दावों के अनुसार, PoK में 27 जुलाई को चुनाव प्रस्तावित हैं। चुनाव से पहले विभिन्न इलाकों में सरकार और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किए जा रहे हैं। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के दौरान सुरक्षाबलों की कार्रवाई में कई लोगों की मौत हुई है और दर्जनों लोग घायल हुए हैं।

आंदोलन को दबाने के लिए पाकिस्तान द्वारा बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती किए जाने के भी आरोप लगाए गए हैं।

क्या PoK के हालात से ध्यान भटका रहा पाकिस्तान?

विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे को दोबारा अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाकर PoK में जारी असंतोष और कथित दमन से दुनिया का ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है।

पाकिस्तान घरेलू स्तर पर जनता की सहानुभूति हासिल करने और राजनीतिक दबाव कम करने के लिए भी कश्मीर मुद्दे का इस्तेमाल करता रहा है। हर साल विशेष अवसरों पर कश्मीर को लेकर बयान जारी करना उसकी प्रचार रणनीति का हिस्सा माना जाता है।

ब्रिटेन और यूरोपीय संघ में प्रतिनिधिमंडल भेजने की तैयारी

पिछले सप्ताह ऐसी जानकारी भी सामने आई थी कि पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे पर समर्थन जुटाने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल ब्रिटेन और यूरोपीय संघ भेजने की योजना बना रहा है।

यह प्रतिनिधिमंडल यूरोपीय नेताओं और अधिकारियों के सामने कश्मीर का मुद्दा उठाकर पाकिस्तान के पक्ष में समर्थन हासिल करने की कोशिश कर सकता है। हालांकि भारत हमेशा स्पष्ट करता रहा है कि जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न हिस्सा है और इससे जुड़ा कोई भी मामला भारत का आंतरिक विषय है।

पाकिस्तान की पुरानी रणनीति

पाकिस्तान की यह रणनीति नई नहीं है। वह संयुक्त राष्ट्र महासभा, इस्लामिक सहयोग संगठन और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार कश्मीर का मुद्दा उठाता रहा है। हालांकि उसे अधिकतर मौकों पर अपेक्षित अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं मिला है।

भारत का रुख स्पष्ट रहा है कि पाकिस्तान को कश्मीर पर बयानबाजी करने के बजाय आतंकवाद, सीमा पार घुसपैठ और अपने कब्जे वाले क्षेत्रों में मानवाधिकारों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।

 

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