झारखंड के धनबाद जिले में सुरक्षा बलों ने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में बड़ी सफलता हासिल करते हुए प्रतिबंधित CPI (माओवादी) के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय समिति (सेंट्रल कमेटी) व पोलित ब्यूरो के आखिरी सक्रिय सदस्य मिसिर बेसरा को गिरफ्तार कर लिया है। उसकी गिरफ्तारी मंगलवार (28 जुलाई) की शाम धनबाद-गिरिडीह सीमा के टुंडी-मंडिया जंगल क्षेत्र से हुई।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, मिसिर बेसरा पर ₹1 करोड़ से अधिक का इनाम घोषित था और वह पिछले दो दशकों से सुरक्षा बलों के लिए सबसे वांछित नक्सली नेताओं में शामिल था। उसके साथ दो अन्य नक्सली गौरव हसदा और मोचू को भी गिरफ्तार किया गया है।
जंगल से भागने की कोशिश में पकड़ा गया
जानकारी के मुताबिक, पारसनाथ पहाड़ियों और आसपास के जंगलों में सुरक्षा बलों ने व्यापक घेराबंदी की थी। इसी दौरान मिसिर बेसरा अपने सहयोगियों के आत्मसमर्पण के बाद इलाके से निकलने की कोशिश कर रहा था। सुरक्षा बलों ने उसे जिंदा पकड़ने में सफलता हासिल की।
अधिकारियों का कहना है कि वह लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से बाहर था और संगठन के शीर्ष नेतृत्व में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।
नक्सली संगठन को बड़ा झटका
सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, CPI (माओवादी) के चरम दौर में केंद्रीय समिति में 40 से अधिक सदस्य थे। लगातार चलाए गए अभियानों, गिरफ्तारियों, मुठभेड़ों और आत्मसमर्पण के चलते संगठन का शीर्ष नेतृत्व लगभग समाप्त हो चुका है।
मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के बाद अब संगठन का कोई सक्रिय केंद्रीय समिति सदस्य खुले तौर पर काम नहीं कर रहा है। इसे नक्सल विरोधी अभियान की ऐतिहासिक सफलता माना जा रहा है।
बेटे ने जताई खुशी
मिसिर बेसरा के बेटे सिद्धार्थ बेसरा ने कहा कि उन्हें गिरफ्तारी की आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है, लेकिन यह जानकर खुशी है कि उनके पिता को जिंदा पकड़ा गया है।
उन्होंने बताया कि पिछले 20 वर्षों से उन्होंने अपने पिता को नहीं देखा। करीब 15 दिन पहले पुलिस ने उनसे एक पत्र भी लिखवाया था, जिसमें उनके पिता से आत्मसमर्पण करने की अपील की गई थी।
16 नक्सलियों ने भी किया आत्मसमर्पण
इसी दिन झारखंड पुलिस के सामने 16 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें 6 नक्सलियों पर कुल ₹39 लाख का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण करने वालों में 128 मामलों में वांछित और ₹15 लाख के इनामी संतोष महतो का नाम भी शामिल है।
पुलिस का मानना है कि सरकार की आत्मसमर्पण नीति और सुरक्षा बलों के लगातार अभियानों का असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है।
पश्चिम सिंहभूम की स्थिति पर हो सकती है समीक्षा
अधिकारियों के अनुसार, मिसिर बेसरा की सक्रिय मौजूदगी ही उन प्रमुख कारणों में थी, जिनकी वजह से झारखंड का पश्चिम सिंहभूम जिला अब तक केंद्र सरकार की वामपंथी उग्रवाद प्रभावित “चिंता वाले जिलों” की सूची में बना हुआ था।
अब उसकी गिरफ्तारी के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय पश्चिम सिंहभूम जिले की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा कर सकता है। इससे क्षेत्र में विकास और सुरक्षा संबंधी योजनाओं को और गति मिलने की संभावना है।
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