जंतर-मंतर पर चल रहा सीजेपी का प्रदर्शन भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन संसद के भीतर राजनीतिक टकराव जारी है। एक ओर विपक्षी दल संसद मार्च के दौरान छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग पर अड़े रहे, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार ने राज्यसभा से राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित करा लिया।
राज्यसभा में बुधवार को राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा हुई। इस विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’, राष्ट्रध्वज, संविधान, राष्ट्रगान और अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान या उनके प्रति अनादर को अपराध की श्रेणी में लाना है। चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति और स्पष्टीकरण की मांग करते हुए जोरदार नारेबाजी की।
हालांकि, आम आदमी पार्टी (AAP), बीजू जनता दल (BJD), भारत राष्ट्र समिति (BRS) और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के सदस्यों ने चर्चा में हिस्सा लिया। विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही जारी रही और अंततः विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी मिल गई।
दोपहर के भोजनावकाश के बाद सदन की कार्यवाही शुरू होते ही उपसभापति हरिवंश ने विधेयक पर चर्चा प्रारंभ कराई। इसी दौरान विपक्षी सांसदों ने अमित शाह से जवाब मांगते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। उपसभापति ने बार-बार सदस्यों से सदन की गरिमा और अनुशासन बनाए रखने की अपील की, लेकिन विरोध जारी रहा।
बाद में जब केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले विधेयक पर अपने विचार रख रहे थे, तब विपक्षी सांसदों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। इसके बावजूद सरकार ने विधेयक को पारित कराने में सफलता हासिल की।
विधेयक के अनुसार यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रध्वज, संविधान, राष्ट्रगान, ‘वंदे मातरम्’ या अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान करता है या उनके सम्मान में बाधा उत्पन्न करता है, तो उसे दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक की सजा का सामना करना पड़ सकता है।
गौरतलब है कि यह विधेयक 24 जुलाई 2026 को राज्यसभा में पेश किया गया था। हालांकि, नीट पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों के प्रदर्शन और उससे जुड़े राजनीतिक विवाद के कारण उस दिन इस पर चर्चा नहीं हो सकी थी। अब विस्तृत चर्चा के बाद इसे राज्यसभा की मंजूरी मिल गई है, जिससे राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर सरकार के रुख को और मजबूती मिली है।
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