गत 6 अगस्त को मुंबई में आयोजित ‘इंडियन्स इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइटेड नेशंस’ के प्रतिष्ठित मंच से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत ने देश के सामाजिक, राजनीतिक, वैश्विक, शैक्षणिक तथा सांस्कृतिक परिदृश्य पर युवाओं के साथ अपने विचार खुलकर साझा किए। उन्होंने ‘भारतीय दृष्टिकोण से विश्व को एकजुट करने में युवाओं की भूमिका’ पर विशेष जोर देते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि देश की नई पीढ़ी (जेन-जी और जेन-एल्फा) देश का भविष्य है, जिन्हें शंका की दृष्टि से देखने के बजाय अपनत्व, संवाद और उचित मार्गदर्शन की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में देश के 100 से अधिक शहरों से आए 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग के करीब 2,000 हाई स्कूल विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस दौरान सरसंघचालक ने राष्ट्रीय सुरक्षा, शिक्षा सुधार, एलजीबीटीक्यू समुदाय, महिलाओं की सहभागिता, रोजगार, आरक्षण और सतत विकास जैसे समसामयिक विषयों पर संघ का दृष्टिकोण प्रमुखता से रेखांकित किया।
1. युवा और लोकतांत्रिक अधिकार: राष्ट्रविरोधी नहीं हैं युवा
नीट पेपर लीक तथा अन्य मुद्दों को लेकर युवाओं द्वारा किए जा रहे विरोध-प्रदर्शनों के संदर्भ में श्री भागवत ने स्पष्ट किया कि युवाओं की शिकायतें पूरी तरह जायज हैं।
-
अपनत्व एवं संवाद: जब अन्य सभी प्रशासनिक रास्ते बंद हो जाते हैं, तब लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन भी संवाद का एक वैध माध्यम बन जाता है।
-
सिस्टम सुधार के लिए आंदोलन: युवाओं का आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि ‘सिस्टम सुधार’ के लिए होना चाहिए। नई पीढ़ी पुरानी पीढ़ी की तुलना में अधिक स्पष्ट और तर्कसंगत प्रश्न पूछती है।
2. शिक्षा व्यवस्था एवं नई पीढ़ी का निर्माण
शिक्षा प्रणाली में मूलभूत सुधारों की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए श्री भागवत ने कहा कि शिक्षा कोई व्यापार नहीं है, बल्कि यह जीवन की एक अनिवार्य आवश्यकता है जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुलभ होनी चाहिए।
-
शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 6 प्रतिशत व्यय करने की मांग का समर्थन करते हुए उन्होंने इसे पूरी तरह उचित बताया।
-
शिक्षा का मुख्य उद्देश्य आने वाली पीढ़ी का चरित्र-निर्माण करना है। संघ से जुड़े ‘विद्या भारती’ संगठन द्वारा लगभग 23,000 विद्यालयों का सफल संचालन इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।
3. एलजीबीटीक्यू समुदाय और सामाजिक समरसता
समाज के संवेदनशील मुद्दों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि एलजीबीटीक्यू समुदाय हमारे समाज का एक अभिन्न अंग है। विवाह संस्था के स्थान पर समलैंगिक जोड़ों के लिए एक पृथक कानूनी ढांचा होना चाहिए ताकि समाज में संतुलन बना रहे। वहीं, आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक समाज में सामाजिक भेदभाव रहेगा, तब तक आरक्षण की आवश्यकता और प्रासंगिकता बनी रहेगी, इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
4. वैश्विक संबंध और मानवता सर्वोपरि
अंतरराष्ट्रीय संबंधों और राष्ट्रीय सुरक्षा पर विचार रखते हुए उन्होंने भारतीय जीवन-दर्शन को प्रस्तुत किया।
-
स्थायी शत्रुता नहीं: सभी पाकिस्तानी नागरिक भारत के शत्रु नहीं हैं। भारत का ध्येय किसी राष्ट्र को मिटाना या पराजित करना नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से सद्भाव स्थापित करना है।
-
संघर्ष के बाद भी शांति के प्रयास जारी रहने चाहिए, क्योंकि अंततः “Humanity is One” (मानवता सर्वोपरि है)।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel