महाराष्ट्र सरकार ने आतंकवाद और हिंसक कट्टरपंथ से जुड़े प्रचार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 114 प्रकाशनों और डिजिटल सामग्रियों को जब्त करने का आदेश जारी किया है। इनमें इस्लामिक स्टेट (IS/ISIS), इस्लामिक स्टेट इन खुरासान प्रोविंस (ISKP), हिज्ब-उल-मुजाहिदीन की पीर पंजाल रेजिमेंट और अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) से जुड़ी बताई गई सामग्री शामिल है।
सरकार के आदेश के दायरे में किताबें, पत्रिकाएं, लेख, पर्चे, तस्वीरें, सोशल मीडिया पोस्ट, ऑडियो-वीडियो फाइलें और अन्य डिजिटल सामग्री शामिल हैं। राज्य सरकार के मुताबिक, इनका इस्तेमाल हिंसक कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने, आतंकी संगठनों के प्रचार और भर्ती को बढ़ावा देने के लिए किया जा सकता है।
BNSS की धारा 98(1) के तहत कार्रवाई
महाराष्ट्र के गृह विभाग ने 6 अगस्त को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 98(1) के तहत यह आदेश जारी किया। इस प्रावधान के तहत अधिसूचना में सूचीबद्ध प्रकाशनों और सामग्रियों की प्रतियों को जब्त करने का कानूनी आधार मिलता है।
यह कदम महाराष्ट्र एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) की जांच और रिपोर्ट के बाद उठाया गया। ATS ने 17 मार्च को राज्य सरकार को पत्र भेजकर ऐसी प्रिंट और डिजिटल सामग्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी, जिसे भारत की संप्रभुता, अखंडता और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों से जुड़ा बताया गया।
वेबसाइट से एन्क्रिप्टेड चैनलों तक फैल रही थी सामग्री
जांच, खुफिया इनपुट और साइबर निगरानी के दौरान एजेंसियों को पता चला कि ऐसी सामग्री केवल किताबों या पर्चों तक सीमित नहीं थी। इसे वेबसाइटों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, एन्क्रिप्टेड चैनलों और अन्य डिजिटल नेटवर्क के माध्यम से भी प्रसारित किया जा रहा था।
सरकार का मानना है कि इस तरह की प्रचार सामग्री लोगों को कट्टरपंथ की ओर धकेल सकती है और आतंकी संगठनों को नए सदस्यों की भर्ती तथा हिंसक गतिविधियों के प्रचार में मदद कर सकती है।
CM देवेंद्र फडणवीस ने जताई चिंता
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कट्टरपंथ के प्रसार को गंभीर चिंता बताया। उनके मुताबिक, सूचीबद्ध सामग्री में कुछ ऐसी सामग्री भी शामिल थी जिसमें विस्फोटक बनाने और हिंसक गतिविधियों से संबंधित निर्देश मौजूद थे।
फडणवीस ने राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किए जाने पर जोर देते हुए कहा कि ऐसी गतिविधियों की लगातार निगरानी जरूरी है।
‘Voice of Khurasan’ के 47 अंक भी सूची में
जब्त की जाने वाली 114 सामग्रियों की सूची में इस्लामिक स्टेट और ISKP के प्रचार से संबंधित कई प्रकाशन शामिल हैं। इनमें ‘Voice of Khurasan’ के 47 अंक शामिल बताए गए हैं।
इसके अलावा Al-Bayan Radio से जुड़े ऑडियो-वीडियो कार्यक्रम और कुछ कट्टरपंथी प्रचार पर्चे भी सूची में शामिल किए गए हैं। सरकार का कहना है कि ऐसी सामग्री का इस्तेमाल चरमपंथी विचारधारा के प्रचार और लोगों को आतंकी संगठनों की ओर आकर्षित करने के लिए किया जा सकता है।
हिज्ब-उल-मुजाहिदीन और AQIS से जुड़ी सामग्री पर भी शिकंजा
आदेश में हिज्ब-उल-मुजाहिदीन की पीर पंजाल रेजिमेंट से जुड़ी बताई गई सामग्री भी शामिल है। इसमें ‘The Revolutionary Resurgence’ के 17 संस्करण शामिल बताए गए हैं, जिनका प्रकाशन अक्टूबर 2023 से दिसंबर 2025 के बीच हुआ था।
इसके अलावा अल-कायदा और AQIS से संबंधित बताए गए कई प्रकाशन भी कार्रवाई के दायरे में हैं। इनमें ‘Kashmir Kifah – Resilience & Courage’ के 10 अंक, ‘The Soul Of Resistance’ के 7 अंक और ‘Nawai Gazwa e Hind’ के 13 अंक शामिल बताए गए हैं।
सरकार का कहना है कि इन प्रकाशनों में हिंसक जिहादी विचारधारा का प्रचार किया गया और ऐसी सामग्री आतंकवादी संगठनों में भर्ती तथा हिंसक गतिविधियों को प्रोत्साहित कर सकती है।
विस्फोटकों और ऑपरेशनल तरीकों से जुड़े मैनुअल भी शामिल
सरकार की अधिसूचना में हथियारों, विस्फोटकों और हिंसक ऑपरेशनल तरीकों से संबंधित निर्देशात्मक सामग्री भी शामिल है। हालांकि सार्वजनिक सुरक्षा के मद्देनजर ऐसी सामग्री के तकनीकी विवरण साझा करना उचित नहीं है।
इसके अलावा पहचान छिपाने, सुरक्षा एजेंसियों से बचने और गुप्त गतिविधियों से जुड़ी बताई गई सामग्री भी कार्रवाई के दायरे में है।
सरकार का कहना है कि इस प्रकार की सामग्री तक पहुंच रोकना जरूरी है, ताकि इसका इस्तेमाल हिंसा या आतंकवादी गतिविधियों के लिए न किया जा सके और इसे ऑनलाइन नेटवर्क के जरिए आगे फैलने से रोका जा सके।
पुलिस को मिली सामग्री जब्त करने की शक्ति
आदेश के तहत सूचीबद्ध प्रकाशन या डिजिटल सामग्री मिलने पर कानून के अनुसार उसे जब्त किया जा सकेगा। अधिसूचना में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152, 196, 197 और 299 का भी उल्लेख किया गया है।
महाराष्ट्र सरकार के मुताबिक, पूरी कार्रवाई का उद्देश्य हिंसक चरमपंथी प्रचार और आतंकी संगठनों से जुड़ी सामग्री के प्रसार को रोकना है, ताकि कट्टरपंथ, आतंकी भर्ती और भारत की संप्रभुता, अखंडता तथा सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके।
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