भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे गुजरात के कच्छ स्थित सर क्रीक सेक्टर में एक बार फिर सामरिक गतिविधियां चर्चा में हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने इस संवेदनशील समुद्री और दलदली इलाके में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में ‘प्रोजेक्ट अबाबील’ शुरू किया है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इसके तहत पाकिस्तान नेवी के स्पेशल सर्विस ग्रुप यानी SSG-N कमांडो, ड्रोन, होवरक्राफ्ट और अन्य सैन्य संसाधनों की तैनाती पर जोर दिया जा रहा है।
इन रिपोर्टों के बीच भारत की ओर से पहले किए गए सुरक्षा इंतजाम भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 29 मई 2026 को कच्छ में भारत-पाकिस्तान सीमा के बेहद संवेदनशील हरामी नाला सेक्टर का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने बॉर्डर आउटपोस्ट BOP G-7 का उद्घाटन करने के साथ सीमा पर निगरानी और सुरक्षा ढांचे का जायजा लिया था।
क्या है हरामी नाला और क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
हरामी नाला गुजरात के कच्छ में सर क्रीक क्षेत्र के भीतर स्थित लगभग 22 किलोमीटर लंबा ज्वारीय जलमार्ग है। यह इलाका दलदली जमीन, मैंग्रोव, उथले पानी और ज्वार-भाटे के कारण बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। कुछ हिस्सों में जलमार्ग की चौड़ाई करीब 1.5 किलोमीटर तक रह जाती है।
इस पूरे क्षेत्र की भौगोलिक बनावट सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती पैदा करती है। ज्वार के साथ पानी का स्तर और रास्ते बदलते रहते हैं। दलदली जमीन तथा क्रीक के जटिल नेटवर्क के कारण सामान्य निगरानी भी आसान नहीं है। यही वजह है कि BSF और दूसरी भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इस क्षेत्र पर विशेष नजर रखती हैं।
#WATCH | Gujarat: Union Home Minister Amit Shah visited the Harami Nala area, located near the India-Pakistan border in Kutch pic.twitter.com/Zvg3qbw9xH
— ANI (@ANI) May 29, 2026
आखिर ‘हरामी नाला’ नाम कैसे पड़ा?
‘हरामी’ शब्द आम बोलचाल में अपमानजनक माना जाता है, लेकिन इस जलमार्ग के नाम को लेकर प्रचलित व्याख्या अलग है। माना जाता है कि इसकी धोखा देने वाली भौगोलिक प्रकृति के कारण इसे यह नाम मिला।
कम ज्वार के दौरान जो रास्ता सुरक्षित नजर आता है, वही पानी बढ़ने पर कुछ घंटों में खतरनाक हो सकता है। बदलते कीचड़ के मैदान और टेढ़े-मेढ़े जलमार्ग नावों को फंसा सकते हैं। अनजान व्यक्ति के लिए यहां रास्ता भटकने का जोखिम भी काफी अधिक रहता है।
मछुआरों के लिए महत्वपूर्ण, सुरक्षा के लिहाज से चुनौती
हरामी नाला समुद्री जीवों, विशेषकर झींगे के लिए भी जाना जाता है। गुजरात और पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र के मछुआरे आसपास के समुद्री क्षेत्र में मछली पकड़ते हैं। सर क्रीक में भारत-पाकिस्तान समुद्री सीमा विवाद के कारण कई बार मछुआरों के सीमा पार चले जाने और उनकी गिरफ्तारी के मामले भी सामने आते रहे हैं।
वहीं, सुरक्षा के नजरिए से उथले जलमार्ग, दलदल और मैंग्रोव किसी संदिग्ध गतिविधि की पहचान को कठिन बना सकते हैं। तस्करी और घुसपैठ जैसी आशंकाओं के चलते यह इलाका लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता में रहा है।
अमित शाह ने मई में किया था हरामी नाला का दौरा
29 मई 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हरामी नाला क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया था। उन्होंने BOP G-7 का उद्घाटन किया और OP Tower 1170 स्थित कंट्रोल रूम में निगरानी व्यवस्था देखी। उन्होंने BSF जवानों से बातचीत करने के साथ नाव के जरिए क्षेत्र का निरीक्षण भी किया।
इस दौरान सीमा सुरक्षा के लिए विकसित किए जा रहे इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी जोर दिया गया। G-7 और G-13 परियोजनाएं इस कठिन भौगोलिक क्षेत्र में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिशों का हिस्सा हैं।
पाकिस्तान का ‘Project Ababeel’ क्या है?
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने सर क्रीक क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की योजना को ‘प्रोजेक्ट अबाबील’ नाम दिया है। इसके तहत पाकिस्तान नेवी के SSG-N कमांडो की तैनाती की बात सामने आई है। ये कमांडो समुद्र, जमीन और हवा से जुड़े विशेष अभियानों के लिए प्रशिक्षित होते हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने बांधा नाला और हरामी नाला के बीच समुद्री सुरक्षा चौकियों पर भी काम किया है। इसके अलावा तुर्की मूल के हथियारबंद ड्रोन और चीनी होवरक्राफ्ट समेत आधुनिक सैन्य संसाधनों की मौजूदगी के दावे किए गए हैं। हालांकि, इन दावों के अलग-अलग हिस्सों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
एयर डिफेंस और सैन्य तैनाती के भी दावे
रिपोर्टों में सर क्रीक क्षेत्र के आसपास पाकिस्तान की ओर से एयर-डिफेंस क्षमता बढ़ाने के दावे भी किए गए हैं। यदि ऐसी तैनाती बड़े पैमाने पर होती है तो सर क्रीक की सामरिक अहमियत और बढ़ जाती है।
सर क्रीक पहले से ही भारत और पाकिस्तान के बीच संवेदनशील क्षेत्र रहा है। इसकी जटिल भौगोलिक स्थिति और समुद्री सीमा विवाद इसे सामान्य बॉर्डर सेक्टर से अलग बनाते हैं। ऐसे में पाकिस्तान की कथित नई सैन्य गतिविधियों के बीच भारत द्वारा पहले से मजबूत किए गए बॉर्डर आउटपोस्ट और निगरानी नेटवर्क रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।
क्यों अहम है सर क्रीक?
मानसून में दलदली जमीन और ज्वारीय जलमार्ग इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों तथा निगरानी को और कठिन बना देते हैं। इसी कारण सर क्रीक में किसी भी नई सैन्य तैनाती को सुरक्षा के नजरिए से गंभीरता से देखा जाता है।
पाकिस्तान के कथित ‘प्रोजेक्ट अबाबील’ से जुड़ी खबरों ने एक बार फिर सर क्रीक और हरामी नाला को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। वहीं, भारत की तरफ हरामी नाला में पहले से विकसित किए जा रहे सुरक्षा ढांचे से स्पष्ट है कि इस संवेदनशील क्षेत्र में निगरानी को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
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