ग्लोबल सोलर एनर्जी और फोटोवोल्टिक मैन्युफैक्चरिंग मार्केट में लंबे समय से चीन का दबदबा रहा है, लेकिन भारत में तेजी से बढ़ती सोलर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता ने अब चीनी सोशल मीडिया और टेक सर्कल्स में नई बहस छेड़ दी है। वायरल पोस्ट्स में भारत के सोलर मैन्युफैक्चरिंग उभार को चीन के लिए “Stalingrad for Photovoltaics” तक कहा जा रहा है। IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी इंटरनेट पर “China’s Stalingrad for photovoltaics” और “India has breached China’s photovoltaic fortress” जैसे जुमले चर्चा में हैं।
चर्चा की सबसे बड़ी वजह भारत की सोलर PV मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में आया जबरदस्त उछाल है। सोशल मीडिया चर्चाओं में उद्धृत आंकड़ों के अनुसार, भारत की फोटोवोल्टिक मॉड्यूल उत्पादन क्षमता 2018 में 10 GW से कम थी, जो 2026 में बढ़कर करीब 172 GW हो गई। यानी लगभग आठ वर्षों में करीब 17 गुना वृद्धि।
चीन में क्यों हो रही ‘Stalingrad’ की चर्चा?
दूसरे विश्व युद्ध में Battle of Stalingrad को नाजी जर्मनी के खिलाफ एक निर्णायक मोड़ माना जाता है। इसी ऐतिहासिक संदर्भ का इस्तेमाल कुछ सोशल मीडिया पोस्ट भारत की सोलर मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ को समझाने के लिए कर रहे हैं। इन पोस्ट्स का तर्क है कि जिस क्षेत्र में चीन की पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती थी, उसी फोटोवोल्टिक सप्लाई चेन में भारत तेजी से घरेलू उत्पादन क्षमता तैयार कर रहा है।
एक वायरल पोस्ट में कहा गया कि भारत में सोलर मैन्युफैक्चरिंग की तेज वृद्धि से जुड़ी खबरें चीनी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं और इसे फोटोवोल्टिक्स के लिए चीन का “Stalingrad” बताया जा रहा है। दूसरी पोस्ट्स में यह दावा किया गया कि भारत ने चीन के “photovoltaic fortress” में सेंध लगा दी है। हालांकि इन शब्दों को किसी आधिकारिक चीनी सरकारी बयान की बजाय वायरल ऑनलाइन टिप्पणी और सोशल मीडिया नैरेटिव के रूप में देखना चाहिए।
Never thought this day would come:
Chinese Netizens complaining about 17 fold increase in Indian Solar Component manufacturing since 2018 and how it is driving top Chinese Solar companies into deep losses
"Chinese Photovoltaic fortress has been breached from within by India"… pic.twitter.com/hmvO0fa3hZ
— Muji Singh Rangi (@mujifren) August 10, 2026
2018 से 2026 तक भारत की सोलर मैन्युफैक्चरिंग में बड़ा बदलाव
भारत पिछले कुछ वर्षों में केवल सोलर बिजली उत्पादन ही नहीं, बल्कि घरेलू सोलर उपकरण निर्माण पर भी जोर दे रहा है। भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता अगस्त 2026 तक 300 GW के पार पहुंच चुकी है और इसमें सोलर एनर्जी की हिस्सेदारी सबसे बड़ी है।
इसी के साथ सरकार सोलर सप्लाई चेन के शुरुआती चरणों को भी देश में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। अगस्त 2026 में भारत सरकार के पॉलीसिलिकॉन के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए नई इंसेंटिव योजना पर काम करने की जानकारी सामने आई। पॉलीसिलिकॉन सोलर सेल और मॉड्यूल बनाने की सप्लाई चेन का अहम हिस्सा है और इस क्षेत्र में भारत अभी चीन पर काफी निर्भर है।
क्या चीन का सोलर दबदबा खत्म होने वाला है?
भारत की 17 गुना मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि ग्लोबल सोलर सप्लाई चेन में चीन का वर्चस्व समाप्त हो गया है। चीन अभी भी सोलर मैन्युफैक्चरिंग की कई महत्वपूर्ण कड़ियों में बड़ी भूमिका निभाता है। भारत में मॉड्यूल निर्माण तेजी से बढ़ा है, लेकिन सोलर सेल और अन्य अपस्ट्रीम कंपोनेंट्स में घरेलू क्षमता अपेक्षाकृत कम है।
Reuters की जुलाई 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की प्रभावी सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता करीब 16-18 GW बताई गई थी, जबकि मॉड्यूल क्षमता लगभग 200 GW के स्तर पर थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत में इस्तेमाल होने वाले आयातित सोलर सेल्स का बड़ा हिस्सा चीन से आता है। इसलिए भारत के सामने अगली बड़ी चुनौती मॉड्यूल असेंबली से आगे बढ़कर सेल, वेफर और पॉलीसिलिकॉन तक पूरी घरेलू सप्लाई चेन विकसित करने की है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह सोलर मैन्युफैक्चरिंग बूम?
भारत की बढ़ती घरेलू सोलर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता तीन स्तरों पर महत्वपूर्ण है—ऊर्जा सुरक्षा, आयात निर्भरता में कमी और ग्लोबल क्लीन-एनर्जी सप्लाई चेन में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाना। इसके साथ भारत 2030 तक अपने गैर-जीवाश्म ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में तेजी से क्षमता जोड़ रहा है। अगस्त 2026 में देश की कुल गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता 300 GW के पार पहुंच चुकी है।
इसलिए चीनी सोशल मीडिया पर चल रही “Stalingrad” वाली तुलना भले ही नाटकीय हो, लेकिन उसके पीछे मौजूद बड़ा बदलाव वास्तविक है—भारत अब सिर्फ दुनिया के बड़े सोलर बाजारों में से एक नहीं, बल्कि तेजी से उभरता सोलर मैन्युफैक्चरिंग हब भी बन रहा है। अगली निर्णायक लड़ाई मॉड्यूल उत्पादन से आगे बढ़कर पूरी सोलर वैल्यू चेन में आत्मनिर्भरता हासिल करने की होगी।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel