पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में दो महीने से अधिक समय से जारी विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई के आरोपों के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के तेवर अब बदले हुए नजर आ रहे हैं। जिस जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में महंगाई, महंगी बिजली, आर्थिक उपेक्षा और चुनावी व्यवस्था के खिलाफ आंदोलन चल रहा है, अब पाकिस्तान की सत्तारूढ़ राजनीति से उसी संगठन के साथ बातचीत की पेशकश सामने आई है।
शाहबाज शरीफ ने कहा है कि समस्याओं का समाधान टकराव के बजाय बातचीत के जरिए होना चाहिए। उनके करीबी सहयोगी और सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने भी JAAC से जुड़े अधिकांश लोगों को ‘देशभक्त’ बताते हुए संकेत दिया है कि पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) की नई सरकार बनने के बाद प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत की जाएगी।
यह रुख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पिछले कुछ समय से कार्रवाई, गिरफ्तारियों, संचार पाबंदियों और हिंसा के गंभीर आरोप लगते रहे हैं।
शाहबाज शरीफ ने क्यों की बातचीत की पेशकश?
PoK में जारी असंतोष के बीच शाहबाज शरीफ ने कहा कि यदि कोई समस्या है तो उसका समाधान बातचीत की मेज पर बैठकर किया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई सरकार बनने के बाद प्रदर्शनकारियों से बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ेगा।
हालांकि, बातचीत की पेशकश के साथ शाहबाज शरीफ ने चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी शिकायतें और मांगें रखने वालों के लिए बातचीत का रास्ता खुला रहेगा, लेकिन क्षेत्र में अशांति और अराजकता पैदा करने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह बयान ऐसे समय आया है जब PoK की राजनीति चुनाव और लंबे समय से जारी जन आंदोलन के कारण तनावपूर्ण बनी हुई है।
JAAC के 99% लोग ‘देशभक्त’: राणा सनाउल्लाह
शाहबाज शरीफ के सहयोगी और सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने भी JAAC को लेकर नरम रुख दिखाया है। उन्होंने 8 अगस्त 2026 को एक रैली में कहा कि जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी से जुड़े “99 प्रतिशत लोग हमारे देशभक्त भाई हैं।”
सनाउल्लाह के मुताबिक, PML-N की सरकार बनने के बाद पार्टी के प्रतिनिधि JAAC के सदस्यों के साथ बैठकर विवादों का समाधान निकालने की कोशिश करेंगे।
यह बयान खास तौर पर चर्चा में है क्योंकि जिस संगठन को लेकर पहले कड़ा रुख अपनाया गया था, अब उसी से संवाद स्थापित करने की बात कही जा रही है।
PoK में क्यों हो रहा है विरोध प्रदर्शन?
PoK में जारी आंदोलन के पीछे केवल एक मुद्दा नहीं है। JAAC के नेतृत्व में छात्र, व्यापारी, ट्रांसपोर्टर, वकील और सामाजिक कार्यकर्ताओं समेत विभिन्न वर्ग अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
आंदोलन की प्रमुख मांगों में बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण, बिजली की ऊंची दरों से राहत और क्षेत्र की कथित आर्थिक उपेक्षा को समाप्त करना शामिल है।
इसके साथ ही PoK विधानसभा में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों का मुद्दा भी विवाद के केंद्र में है। JAAC इन सीटों को खत्म करने की मांग कर रही है। समिति का आरोप है कि इन सीटों के जरिए पाकिस्तान का सत्ता प्रतिष्ठान PoK की राजनीति और सरकार गठन पर प्रभाव डाल सकता है।
12 शरणार्थी सीटों पर क्यों है विवाद?
PoK विधानसभा की 12 आरक्षित शरणार्थी सीटें आंदोलन का बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी हैं। JAAC का कहना है कि इस व्यवस्था में बदलाव होना चाहिए और स्थानीय लोगों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
प्रदर्शनकारी चुनावी व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। हालिया चुनाव प्रक्रिया के दौरान कथित धांधली, बैलेट पेपर लूटने, झड़पों और सुरक्षा बलों से टकराव के आरोप भी सामने आए हैं।
चुनावी प्रक्रिया के कुछ हिस्सों में मतदान स्थगित होने की खबरों ने भी विवाद को और बढ़ाया है।
हिंसा और मौतों को लेकर JAAC के गंभीर दावे
आंदोलन के दौरान हुई हिंसा को लेकर JAAC ने बेहद गंभीर दावे किए हैं। संगठन का दावा है कि चुनाव शुरू होने के बाद 40 से अधिक लोगों की जान गई है। JAAC ने जून के शुरुआती दिनों से अब तक सैकड़ों प्रदर्शनकारियों की मौत होने का भी दावा किया है।
इन आंकड़ों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए जाने की आवश्यकता है। इसलिए इन्हें आधिकारिक मृत्यु संख्या के बजाय आंदोलनकारी संगठन के दावों के तौर पर देखा जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारी नेताओं का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया। पाकिस्तान की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया गया है।
कार्रवाई के बावजूद क्यों शांत नहीं हो रहा PoK?
प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई और सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद PoK में असंतोष पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इंटरनेट और संचार से जुड़ी कथित पाबंदियों तथा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग के आरोपों ने स्थिति को और संवेदनशील बनाया है।
स्थानीय प्रदर्शनकारी नेताओं का आरोप है कि कुछ जगहों पर सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की। मानवाधिकार संगठनों ने भी हिंसा की घटनाओं पर चिंता जताते हुए जांच और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की सुरक्षा की मांग की है।
ऐसे में शाहबाज शरीफ और राणा सनाउल्लाह की ओर से बातचीत की पेशकश पाकिस्तान सरकार की रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव के संकेत के रूप में देखी जा रही है।
PoK आंदोलन पर अब आगे क्या?
आने वाले दिनों में सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि बातचीत की पेशकश वास्तविक वार्ता में बदलती है या नहीं। नई सरकार बनने के बाद PML-N और JAAC के बीच वार्ता होती है तो महंगाई, बिजली की कीमतों, आर्थिक मुद्दों और 12 आरक्षित सीटों जैसे विवादों पर किसी समझौते की संभावना बन सकती है।
लेकिन यदि प्रदर्शनकारियों की मांगों और सरकार के रुख के बीच सहमति नहीं बनती, तो PoK में राजनीतिक असंतोष आगे भी जारी रह सकता है।
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