गुजरात के बनासकांठा जिले के जूना दीसा में पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ा प्रोजेक्ट आकार लेने जा रहा है। यहां एशिया के पहले रेगिस्तान थीम वाले ज़ूलॉजिकल पार्क में वर्ल्ड-क्लास ड्राइव-थ्रू नाइट सफारी विकसित करने की योजना है। नाइट सफारी में पर्यटक रात के अंधेरे में विशेष लाइटिंग के बीच शेर और तेंदुए समेत विभिन्न वन्यजीवों को करीब से देखने का रोमांचक अनुभव ले सकेंगे।
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को करीब 103 हेक्टेयर क्षेत्र में ₹542.14 करोड़ की लागत से विकसित करने की योजना है। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद जूना दीसा न केवल गुजरात बल्कि देश के प्रमुख वाइल्डलाइफ टूरिज्म डेस्टिनेशन में शामिल हो सकता है।
रात के अंधेरे में मिलेगा ड्राइव-थ्रू सफारी का रोमांच
जूना दीसा के प्रस्तावित ज़ूलॉजिकल पार्क की सबसे बड़ी खासियत इसकी नाइट सफारी होगी। पर्यटकों को विशेष वाहनों के जरिए निर्धारित रास्तों पर ले जाया जाएगा, जहां वे रात के प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीवों की गतिविधियों को देख सकेंगे।
नाइट सफारी के लिए खास तरह की लाइटिंग और अन्य सुविधाएं विकसित करने की योजना है, ताकि पर्यटकों को रोमांचक अनुभव मिलने के साथ जानवरों के प्राकृतिक व्यवहार और सुरक्षा का भी ध्यान रखा जा सके।
दुनिया के चुनिंदा नाइट सफारी डेस्टिनेशन में शामिल होने की तैयारी
जूना दीसा का यह प्रोजेक्ट पूरा होने पर गुजरात को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पर्यटन पहचान मिल सकती है। योजना के मुताबिक इसे थाईलैंड, सिंगापुर, चीन और इंडोनेशिया जैसे देशों में मौजूद नाइट सफारी अनुभवों की तर्ज पर विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।
इससे गुजरात में आने वाले घरेलू और विदेशी पर्यटकों के लिए वाइल्डलाइफ टूरिज्म का एक नया विकल्प तैयार होगा और उत्तर गुजरात के पर्यटन क्षेत्र को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
दीसा एयरपोर्ट से सिर्फ 12 किलोमीटर की दूरी
इस प्रोजेक्ट के लिए कनेक्टिविटी भी एक बड़ा फायदा साबित हो सकती है। नाइट सफारी साइट दीसा एयरफील्ड से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर है। दीसा में मौजूद लगभग 3.3 किलोमीटर लंबे रनवे के कारण भविष्य में बेहतर एयर कनेक्टिविटी मिलने पर पर्यटकों के लिए इस डेस्टिनेशन तक पहुंचना और आसान हो सकता है।
बेहतर सड़क और हवाई कनेक्टिविटी के साथ जूना दीसा नाइट सफारी गुजरात के पर्यटन मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण आकर्षण के रूप में उभर सकती है।
रेगिस्तान के बीच बनेगा हरा-भरा Rainforest Biome
रेगिस्तान थीम वाले इस ज़ूलॉजिकल पार्क की एक और खासियत रेनफॉरेस्ट बायोम होगी। इसका उद्देश्य पर्यटकों को सूखे और गर्म रेगिस्तानी वातावरण से बिल्कुल अलग घने, हरे-भरे और नमी वाले जंगल का अनुभव देना है।
इस विशेष क्षेत्र में रेनफॉरेस्ट वातावरण के अनुकूल वनस्पतियों के साथ चुनिंदा पशु-पक्षियों को रखने की योजना है। इससे एक ही ज़ूलॉजिकल पार्क में पर्यटक दो बिल्कुल अलग इकोसिस्टम का अनुभव कर सकेंगे।
बंजर जमीन पर लगाए गए 16 हजार पेड़
जिस जमीन पर यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट विकसित किया जा रहा है, उसका बड़ा हिस्सा पहले बंजर और चारागाह क्षेत्र था। परियोजना के तहत हरियाली बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है और अब तक करीब 16 हजार फूलदार और फलदार पेड़ लगाए जाने की जानकारी है।
इस वृक्षारोपण का उद्देश्य पार्क के लिए प्राकृतिक वातावरण तैयार करने के साथ स्थानीय जैव विविधता को बढ़ावा देना भी है।
Solar Energy से Rainwater Harvesting तक ग्रीन टेक्नोलॉजी
जूना दीसा ज़ूलॉजिकल पार्क को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए आधुनिक ग्रीन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने की योजना है। इसमें सोलर एनर्जी, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग और ग्रीन बफर ज़ोन जैसी व्यवस्थाओं पर विशेष जोर रहेगा।
इस तरह जूना दीसा का यह प्रोजेक्ट सिर्फ नाइट सफारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन, इको-टूरिज्म और सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर का एक बड़ा केंद्र बनने की क्षमता रखता है।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel