नेपाल और तिब्बत की सीमा पर आए विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है। नवीनतम मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आपदा में मरने वालों की संख्या 600 के करीब पहुंच चुकी है, जबकि लगभग दो हजार लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े राहत एवं खोज अभियान आगे बढ़ने के साथ लगातार बदल रहे हैं। नेपाल के रसुवा जिले समेत कई सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कें, पुल, मकान और दूसरी बुनियादी सुविधाएं बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक 90 हजार से अधिक लोग इस आपदा से गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं।
लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों और कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालुओं की बताई जा रही है। भारतीय नागरिकों की स्थिति का पता लगाने के लिए भारत, नेपाल और चीन के संबंधित अधिकारियों के बीच समन्वय जारी है। कई भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क स्थापित नहीं हो सका है, जबकि चीन की तरफ फंसे करीब 400 भारतीयों के सुरक्षित होने की सूचना है। तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्रियों और अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर परियोजना से जुड़े 63 लोगों समेत कुल 84 लोगों को सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी भी सामने आई है।
#WATCH | Nepal: The rescue operation has been temporarily suspended as heavy rainfall worsens weather conditions in Trishuli, preventing the helicopter from taking off. With the river level continuing to rise, people in surrounding areas have been evacuated as a precaution. pic.twitter.com/GefsbQmeW9
— ANI (@ANI) August 29, 2026
कृत्रिम झील से बढ़ा दूसरी बाढ़ का खतरा
पहली आपदा के बाद अब नेपाल-तिब्बत सीमा पर एक और बड़े संकट की आशंका पैदा हो गई है। भूस्खलन और मलबे से बनी कृत्रिम झील से पानी ओवरफ्लो होने के कारण भोटे कोशी और त्रिशूली नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। प्रशासन ने नदी किनारे तथा निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को घर खाली कर ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर जाने का निर्देश दिया है।
रॉयटर्स के अनुसार, रसुवा जिले में बनी अवरोधक झील का पानी बाहर निकलने के बाद संभावित दूसरी बाढ़ की आशंका बढ़ गई। खतरे को देखते हुए कुछ समय के लिए खोज अभियान और हेलीकॉप्टर उड़ानें रोकनी पड़ीं। खराब मौसम, लगातार बारिश, क्षतिग्रस्त रास्ते और बढ़ता जलस्तर बचाव दलों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
MEA Spokesperson Randhir Jaiswal tweets update on Indian nationals impacted by the floods in Nepal pic.twitter.com/TClD5XXYon
— ANI (@ANI) August 29, 2026
ईशा फाउंडेशन के तीर्थयात्रियों से संपर्क नहीं
ईशा फाउंडेशन के नेतृत्व में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया 77 सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय समूह भी लापता लोगों में शामिल बताया गया है। समूह में करीब 19 देशों के नागरिक थे। ईशा सेक्रेड वॉक्स की समन्वयक मां गंभीरी के अनुसार, यह दल यात्रा पूरी करने के बाद तिब्बत के ग्यिरोंग क्षेत्र में आव्रजन प्रक्रिया पूरी कर रहा था, तभी संपर्क टूट गया। समूह की तलाश के लिए भारत, चीन और नेपाल के दूतावासों एवं संबंधित मंत्रालयों से संपर्क किया गया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट में भी समूह के लापता होने की पुष्टि की गई है।
Continuing Humanitarian Assistance and Disaster Relief (HADR) efforts in Nepal: An Indian Air Force C-130 aircraft has departed, carrying 10 tonnes of essential relief supplies, including medicines and food items, to support those affected.
(Source: Indian Air Force) pic.twitter.com/3oYiYs5GEz
— ANI (@ANI) August 29, 2026
भारत ने भेजी राहत और तकनीकी सहायता
भारत ने नेपाल में मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियान के तहत जरूरी सामग्री भेजी है। भारतीय वायुसेना का C-130 विमान दवाइयों, खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुओं सहित लगभग 10 टन राहत सामग्री लेकर रवाना हुआ। हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को निकालने के लिए भारत ने विशेषज्ञ बचावकर्मियों और तकनीकी उपकरणों की टीम भी नेपाल भेजी है।
नेपाल की सेना और पुलिस संयुक्त रूप से खोज एवं बचाव अभियान चला रही हैं। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने विदेशी सहायता अस्वीकार करने संबंधी दावों को भ्रामक बताते हुए कहा है कि आवश्यक तकनीकी सहायता और राहत सामग्री के लिए भारत, चीन तथा अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ समन्वय किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार हजारों सुरक्षाकर्मियों को अभियान में लगाया गया है और बड़ी संख्या में प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया है।
तिब्बत के प्रभावित इलाकों से सूचनाओं का सीमित प्रवाह होने के कारण चीन की ओर हुए वास्तविक नुकसान का पूरा आकलन फिलहाल मुश्किल है। राहत एजेंसियों का कहना है कि दुर्गम भूभाग, संचार व्यवस्था ठप होने और दूसरी बाढ़ के खतरे के कारण मृतकों एवं लापता लोगों के आंकड़ों में आगे भी बदलाव हो सकता है।
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